श्री बांके बिहारी स्तुति - Shree Banke Bihari Stuti

श्री बांके बिहारी स्तुति



।। श्री बांके बिहारी स्तुति ।।

श्याम सलोने बांके बिहारी, महिमा इनकी सबसे न्यारी ।
सर पे इनके मोर मुकुट हैं, हाथो में हैं मुरली प्यारी ।।

मुरली पे जब तान ये छेड़े, भक्त सभी आते हैं दौड़े ।
कुंज गलिन में बैठे बिहारी, दर्शन देते बारी बारी ।।

दर्शन इनके सबसे निराले, बार बार पर्दा ये डाले ।
परदे में छुप छुप के देखो, करते हैं ये खेल निराले ।।

खेल खेल में पूतना मारी, खेल खेल में कुब्जा तारी ।
खेल खेल में कंश को मारा, खेल खेल में सबको तारा ।।

तारण हारे, पालन हारे, हारे हुए के ये हैं सहारे ।
जो भी इनको दिल से पुकारे, उसके बन जाते हैं सहारे ।।

प्रेम भाव से ये हैं रीझते, भक्ति भाव से ये हैं मिलते ।
मीरा जैसा प्रेम करो तो, विष को भी अमृत कर देते ।।

बृज की इनको मिट्टी प्यारी, माखन के रसिया ये बिहारी ।
माखन मिश्री भोग लगाओ, प्रेम भाव से इन्हे खिलाओ ।।

हाथ जोड़कर कर लो विनती, मांग लो इनसे सच्ची भक्ति ।
इनकी भक्ति मिल जाये तो, भवसागर से मिलेगी मुक्ति ।।

Stuti Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore



श्रेणी : कृष्ण भजन


श्री बांके बिहारी स्तुति ।। Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore ।। #bankebihari #bankebiharitemple

यह “श्री बांके बिहारी स्तुति” भगवान श्री कृष्ण के मनमोहक रूप “बांके बिहारी” की महिमा का सुंदर वर्णन करती है। इसमें उनके स्वरूप (मोर मुकुट, मुरली), उनकी लीलाओं और भक्तों पर उनकी कृपा को सरल और भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत किया गया है। “बांके बिहारी” विशेष रूप से बांके बिहारी मंदिर से जुड़े रूप में पूजे जाते हैं, जहाँ उनके दर्शन का अनोखा तरीका (बार-बार पर्दा लगना) भी स्तुति में वर्णित है।

इस स्तुति के रचयिता Jay Prakash Verma माने जाते हैं, जैसा कि अंत में उल्लेख है। यह एक आधुनिक रचना है, लेकिन इसकी भाषा और भाव पारंपरिक कृष्ण-भक्ति से प्रेरित हैं, खासकर ब्रज संस्कृति से।

इस स्तुति का मुख्य भाव “माधुर्य भक्ति, प्रेम और भगवान की लीलाओं का गुणगान” है। इसमें भगवान की बाल-लीलाओं (जैसे पूतना वध, कंस वध, कुब्जा उद्धार) को “खेल-खेल में” बताया गया है, जिससे यह संदेश मिलता है कि भगवान के लिए असंभव कुछ भी नहीं है। वे भक्तों के “तारणहार” (उद्धार करने वाले) और “सहारे” हैं—जो भी सच्चे मन से उन्हें पुकारता है, वे उसकी सहायता करते हैं।

“मीरा जैसा प्रेम करो तो, विष को भी अमृत कर देते” पंक्ति यह दर्शाती है कि सच्ची और निष्कपट भक्ति में इतनी शक्ति होती है कि वह हर कष्ट को आनंद में बदल सकती है। साथ ही, “माखन मिश्री भोग लगाओ” और “ब्रज की मिट्टी प्यारी” जैसी पंक्तियाँ भगवान के स्नेहमय, सरल और लीलामय स्वरूप को दर्शाती हैं।

अंत में यह स्तुति सिखाती है कि सच्चे प्रेम और भक्ति से भगवान को पाया जा सकता है, और उनकी कृपा से ही “भवसागर” (जन्म-मरण के चक्र) से मुक्ति संभव है।

कुल मिलाकर, यह स्तुति भगवान बांके बिहारी के प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण का सुंदर संगम है, जो भक्त को भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

Harshit Jain

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1 Comments

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  1. Radhe - Radhe !! Sir ji ,
    Apka Bahut Bahut Aabhar !!

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