आज मेरे घर आना भक्तों
आज मेरे घर आना भक्तों आज मेरे घर कीर्तन है,
आज मेरे घर आना भक्तों....
नींद तुम्हें तो आई होगी क्या देखा तुमने सपना,
सपने में मैंने गणपति देखे सिद्धि -कराये रहे मेरे अंगना,
आज मेरे घर आना भक्तों आज मेरे घर कीर्तन है,
आज मेरे घर आना भक्तों....
नींद तुम्हें तो आई होगी क्या देखा तुमने सपना,
सपने में मैंने ब्रह्मा जी को देखा वेद सुनाये रहे मेरे अंगना,
आज मेरे घर आना भक्तों आज मेरे घर कीर्तन है,
आज मेरे घर आना भक्तों.....
नींद तुम्हें तो आई होगी क्या देखा तुमने सपना,
सपने में मैंने शंकर जी को देखा डमरू बजाए रहे मेरे अंगना,
आज मेरे घर आना भक्तों आज मेरे घर कीर्तन है,
आज मेरे घर आना भक्तों.....
नींद तुम्हें तो आई होगी क्या देखा तुमने सपना,
सपने में मैंने राम जी को देखा धनुष चलाये रहे मेरे अंगना,
आज मेरे घर आना भक्तों आज मेरे घर कीर्तन है,
आज मेरे घर आना भक्तों.....
श्रेणी : दुर्गा भजन
नवरात्रि गीत▹आज मेरे घर आना भक्तों आज मेरे घर कीर्तन है |Mata Bhajan |Navratri Bhajan |Bhajan Kirtan
यह भजन एक उत्सवपूर्ण भक्ति गीत है, जिसमें घर में होने वाले कीर्तन और देवी-देवताओं के स्वागत का आनंद व्यक्त किया गया है। “आज मेरे घर आना भक्तों” भजन में भक्त अपने घर में कीर्तन का आयोजन होने पर सभी को आमंत्रित करता है और साथ ही अपने दिव्य सपनों का वर्णन करता है, जिनमें अलग-अलग देवी-देवता उसके घर (अंगना) में पधारते दिखाई देते हैं। इसमें गणेश, ब्रह्मा, शिव और राम का उल्लेख है, जो इस भजन को बहु-देव भक्ति (सर्वदेव उपासना) का रूप देता है।
इस भजन का रचयिता निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है, इसलिए इसे लोक-भक्ति परंपरा का हिस्सा माना जाता है। यह खासतौर पर नवरात्रि, कीर्तन, जागरण या घर के धार्मिक आयोजनों में गाया जाता है, जहाँ भक्ति के साथ-साथ उत्सव और सामूहिक आनंद का वातावरण होता है।
भजन का मुख्य भाव “आमंत्रण, उत्सव और श्रद्धा” है। इसमें भक्त अपने घर को मंदिर जैसा पवित्र मानकर सभी को कीर्तन में बुलाता है। सपनों में देवी-देवताओं का आना इस बात का प्रतीक है कि जहाँ सच्ची भक्ति होती है, वहाँ भगवान स्वयं विराजमान होते हैं।
“सपने में मैंने…” वाली पंक्तियाँ यह दर्शाती हैं कि भक्त का मन पूरी तरह भगवान में लीन है, इसलिए उसे हर जगह और हर रूप में दिव्यता का अनुभव होता है।
कुल मिलाकर, यह भजन भक्ति के साथ खुशी, सामूहिकता और भगवान के स्वागत की भावना को प्रकट करता है, और यह संदेश देता है कि जब सच्चे मन से कीर्तन होता है, तो घर ही मंदिर बन जाता है।