हमारे लाडले ठाकुर
तर्ज - तुम्हारी याद आती है
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
जो खुद सुंन्दर से सुंन्दर है, निहारें रूप प्यारी का,
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृगांर प्यारी का...
फैलाया हाथ गोबिंन्द ने, के प्यारी कर करो आगे,
सजानें हाथ में चुड़ी, पकड़कर हाथ प्यारी का,
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
जो खुद सुंन्दर से सुंन्दर है, निहारें रूप प्यारी का,
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का...
सजाया कर फुलों को, लगा नत्थंनी बहुत हरश़ै,
सितारों से बना टिका, सजावें भांन प्यारी का,
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
जो खुद सुंन्दर से सुंन्दर है, निहारें रूप प्यारी का,
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का...
लिए घुटनों पे चरणों को, लगे महन्दीं लगानें वो,
छलकते आंख के आंसू, पख़ारें चरन प्यारी के,
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
जो खुद सुंदर से सुंदर है, निहारें रूप प्यारी का,
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का...
पितांम्बर से चरण पौंछे, फिर सजादी पांव में पायल,
उसी पायल की रुंनझुंन में, खो गया दिल बिहारी का,
जो ख़ुद सुंन्दर से सुंन्दर हैं, निहारें रूप प्यारी का,
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
जो खुद सुंन्दर से सुंन्दर है, निहारें रूप प्यारी का,
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का...
बनाते हैं जो दुनिया को, लगे बैंनी बनाने वो,
औड़ाकर शीश पर चुंनरी, करें मनुंहार प्यारी का,
जो ख़ुद सुंन्दर से सुंन्दर हैं, करें श्रृगांर प्यारी का,
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
हमारे लाडले ठाकुर करें श्रृंगार प्यारी का...
दोई कर जोड़ कर बैठे, लगे ईक टक निहारंन को,
बहे राजीव लौंचन प्यार पानें, श्यामा प्यारी का,
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
जो खुद सुंन्दर से सुंन्दर है, निहारें रूप प्यारी का,
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का...
रचनां-राजीव शास्त्री जी (सोनीपत)
बाबा धसका पागल पानीपत
संपर्कं सुत्र - 7206526000
श्रेणी : कृष्ण भजन
New 2020 सबसे सुंदर भजन हमारे लाडले ठाकुर करें शृंगार प्यारी का , श्री राजीव शास्त्रीजी
यह “हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का” एक अत्यंत भावपूर्ण राधा-कृष्ण भजन है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण द्वारा श्री राधा रानी के श्रृंगार करने की सुंदर और प्रेममयी कल्पना प्रस्तुत की गई है। भजन में श्री कृष्ण को “लाडले ठाकुर” और राधा रानी को “प्यारी” कहकर उनके दिव्य प्रेम और मधुर संबंध का वर्णन किया गया है। इसमें भाव है कि जो श्री कृष्ण स्वयं अत्यंत सुंदर हैं, वे भी श्री राधा रानी के सुंदर रूप को निहारते हुए उनके श्रृंगार में आनंद अनुभव करते हैं। भजन की प्रत्येक पंक्ति में राधा-कृष्ण के बीच के दिव्य प्रेम, स्नेह और माधुर्य भाव की झलक दिखाई देती है।
इस भजन का मुख्य भाव माधुर्य भक्ति, प्रेम, समर्पण और राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम की अनुभूति है। भजन में श्री कृष्ण द्वारा राधा रानी को चूड़ियां पहनाना, नथनी सजाना, माथे पर टीका लगाना, पैरों में मेहंदी लगाना और पायल पहनाना जैसे सुंदर श्रृंगार प्रसंगों का वर्णन किया गया है। इन प्रसंगों में भक्त का भाव यह है कि स्वयं भगवान श्री कृष्ण भी राधा रानी की सेवा और उनके श्रृंगार में आनंद प्राप्त करते हैं। यह भाव राधा-कृष्ण भक्ति की उस परंपरा से जुड़ा है, जिसमें प्रेम को केवल पूजा या आराधना के रूप में नहीं, बल्कि अत्यंत आत्मीय और मधुर संबंध के रूप में अनुभव किया जाता है।
भजन का सबसे भावुक प्रसंग वह है, जब श्री कृष्ण राधा रानी के चरणों को अपने घुटनों पर लेकर उन्हें मेहंदी लगाने का भाव प्रकट करते हैं और फिर उनके चरणों को अश्रुओं से पखारते हैं। इसके बाद राधा रानी के पैरों में पायल सजाई जाती है और उसकी रुनझुन सुनकर श्री कृष्ण का मन उस मधुर ध्वनि में खो जाता है। आगे श्री कृष्ण द्वारा राधा रानी के सिर पर चुनरी ओढ़ाने और उनके प्रति मनुहार करने का वर्णन मिलता है। अंतिम अंतरे में श्री कृष्ण दोनों हाथ जोड़कर एकटक राधा रानी को निहारते हैं। यह दृश्य भक्त के मन में राधा रानी के प्रति श्री कृष्ण की अनन्य प्रेम-भावना और उनकी सेवा को ही सबसे बड़ा आनंद मानने की अनुभूति उत्पन्न करता है।