कैसा ये राम का दीवाना है
जय अंजनी लाला, जय कपीसा...
तेरी लीला का अंत न पाया...
तेरी लीला का अंत न पाया...
कैसा ये राम का दीवाना है,
कैसी ये भक्ति कमाई है
जो खुद है शक्ति का सागर,
उसने दासता अपनाई है
कैसा ये राम का दीवाना है...
कैसा ये राम का दीवाना है...
कैसा ये राम का दीवाना है,
कैसी ये भक्ति कमाई है
जो खुद है शक्ति का सागर,
उसने दासता अपनाई है
कैसा ये राम का दीवाना है...
कैसा ये राम का दीवाना है...
जो उड़ के सूरज को मुख में भरे,
वो क्यों चरणों में झुक जाता है?
जिसके डर से काल भी काँपे,
वो क्यों सिंदूर से सुहाता है?
जिसके डर से काल भी काँपे,
वो क्यों सिंदूर से सुहाता है?
अतुलित बल का जो स्वामी है,
क्यों सूक्ष्म रूप बना के चले?
जो लंका को क्षण में फूँक सके,
क्यों विभीषण के द्वार खड़ा मिले?
जो लंका को क्षण में फूँक सके,
क्यों विभीषण के द्वार खड़ा मिले?
कैसा ये राम का दीवाना है,
कैसी ये भक्ति कमाई है
जो खुद है शक्ति का सागर,
उसने दासता अपनाई है
कैसा ये राम का दीवाना है...
कैसा ये राम का दीवाना है...
जो अष्ट-सिद्धि का दाता है,
क्यों वानर भेस में रहता है?
जो पर्वत को हथेली पे तोले,
क्यों विरह के आँसू सहता है?
जो पर्वत को हथेली पे तोले,
क्यों विरह के आँसू सहता है?
जिसके हृदय में सिया-राम बसे,
उसे मोतियों की क्या चाहत है?
जो अमरता का वरदान लिए,
क्यों सेवा में पाता राहत है?
जो अमरता का वरदान लिए,
क्यों सेवा में पाता राहत है?
कैसा ये राम का दीवाना है,
कैसी ये भक्ति कमाई है
जो खुद है शक्ति का सागर,
उसने दासता अपनाई है
कैसा ये राम का दीवाना है...
कैसा ये राम का दीवाना है...
जो ज्ञानियों में है अग्रगण्य,
वो क्यों मुग्ध भजन में खोया है?
जिसने सुग्रीव का राज फिराया,
वो क्यों प्रभु-चरणों में सोया है?
जिसने सुग्रीव का राज फिराया,
वो क्यों प्रभु-चरणों में सोया है?
जो गदा उठाए तो प्रलय मचे,
क्यों हाथ जोड़ मुस्काता है?
वो राम का सबसे बड़ा सखा,
क्यों खुद को अधम बताता है?
वो राम का सबसे बड़ा सखा,
क्यों खुद को अधम बताता है?
कैसा ये राम का दीवाना है,
कैसी ये भक्ति कमाई है
जो खुद है शक्ति का सागर,
उसने दासता अपनाई है
कैसा ये राम का दीवाना है...
कैसा ये राम का दीवाना है...
वज्र शरीर, कोमल मन...
अजब ये राम का दीवाना है...
जय हनुमान... जय हनुमान...
कैसा ये राम का दीवाना है,
कैसी ये भक्ति कमाई है
जो खुद है शक्ति का सागर,
उसने दासता अपनाई है
कैसा ये राम का दीवाना है...
कैसा ये राम का दीवाना है...
कैसा ये राम का दीवाना है...
कैसा ये राम का दीवाना है...
श्रेणी : हनुमान भजन
पवनपुत्र की माया | Pawanputra Ki Maya - New Hanuman Bhajan 2026
यह “कैसा ये राम का दीवाना है” एक भावपूर्ण हनुमान भजन है, जिसमें भगवान हनुमान जी की अद्भुत शक्ति और भगवान श्रीराम के प्रति उनकी अनन्य भक्ति का वर्णन किया गया है। भजन का मुख्य प्रश्न यही है कि जो हनुमान जी स्वयं शक्ति के सागर हैं, जिनके पराक्रम से देवता और दुष्ट भी भयभीत होते हैं, वही हनुमान जी भगवान श्रीराम के सामने पूर्ण विनम्रता और दास भाव क्यों धारण करते हैं। इसी विरोधाभास के माध्यम से भजन हनुमान जी की महानता को दर्शाता है कि उनके लिए उनकी शक्ति से भी बड़ा कुछ है तो वह श्रीराम के प्रति प्रेम और भक्ति है।
इस भजन का मुख्य भाव दास्य भक्ति, प्रेम, समर्पण, विनम्रता और श्रीराम के प्रति अटूट निष्ठा है। इसमें हनुमान जी के कई प्रसिद्ध स्वरूपों और लीलाओं का उल्लेख किया गया है। भजन में पूछा गया है कि जो सूर्य को निगलने की शक्ति रखते हैं, वे प्रभु श्रीराम के चरणों में क्यों झुकते हैं; जो लंका को जलाकर अधर्म को चुनौती दे सकते हैं, वे विभीषण जैसे भक्त के द्वार पर विनम्र होकर क्यों खड़े होते हैं; और जो अष्ट सिद्धियों के दाता हैं, वे एक साधारण वानर का रूप धारण करके भगवान की सेवा क्यों करते हैं। इन प्रश्नों का उत्तर भजन स्वयं देता है—क्योंकि हनुमान जी की सबसे बड़ी शक्ति उनकी राम भक्ति है।
भजन में संजीवनी पर्वत उठाने, लंका दहन करने, सूर्य को बाल रूप में निगलने का प्रयास करने और सुग्रीव को उनका राज्य वापस दिलाने जैसे प्रसंगों के माध्यम से हनुमान जी के अद्भुत पराक्रम को याद किया गया है। वहीं “जिसके हृदय में सिया-राम बसे” जैसी पंक्तियां हनुमान जी के उस दिव्य स्वरूप को सामने लाती हैं, जिसमें उनके हृदय में सदैव माता सीता और भगवान श्रीराम का वास माना जाता है। यहां मोती, धन-संपत्ति या अमरता से अधिक महत्व प्रभु की सेवा को दिया गया है। यह संदेश देता है कि सच्चा भक्त भगवान से किसी भौतिक वस्तु की इच्छा नहीं करता, बल्कि उनकी सेवा और चरणों में स्थान को ही अपना सबसे बड़ा सौभाग्य मानता है।
भजन का एक अत्यंत सुंदर भाव “वज्र शरीर, कोमल मन” में दिखाई देता है। हनुमान जी बाहरी रूप से अत्यंत शक्तिशाली और वज्र के समान कठोर हैं, लेकिन उनका हृदय अत्यंत कोमल और प्रेम से भरा हुआ है। वे श्रीराम के सबसे बड़े भक्त और प्रिय सखा होते हुए भी स्वयं को सदैव उनका सेवक मानते हैं। यही विनम्रता हनुमान जी को भक्तों के लिए आदर्श बनाती है। भजन यह संदेश देता है कि वास्तविक शक्ति वही है जो अहंकार को जन्म न दे और सच्ची भक्ति वही है जिसमें भक्त अपनी सारी सामर्थ्य भगवान के चरणों में समर्पित कर दे।