झूला झुलाये अंजना झूले तेरा लाल, jhula jhulaye anjana jhule tera laal

झूला झुलाये अंजना झूले तेरा लाल



झूला झुलाये अंजना झूले तेरा लाल,
लल्ला लल्ला लोरी सुनाऊँ सो जा मेरा लाल,
झूला झुलाये अंजना झूले तेरा लाल,

ज़िद्दी बड़ा है तेरा पवन कुमार,
रंग सिन्दूरी से मेरा कर दे श्रृंगार,
बैठे ना यो गोद में मेरी ऊँगली पकडे चाल,
झूला झुलाये अंजना झूले तेरा लाल,

एक दिन उड़ गए मारुती नंदन,
कहाँ चले गए रे हे दुःख भंजन,
सूरज को मुख में ले गया फल समझ के लाल,
झूला झुलाये अंजना झूले तेरा लाल,

राम से मिलूंगा माँ चल अयोध्या नगरी,
बाँध लिए घुँघरू पाँव में छम छम बजरी,
छोटो सो वानर सज्जन कर गयो देखो कमाल,
झूला झुलाये अंजना झूले तेरा लाल,



श्रेणी : हनुमान भजन



Jhoola Jhulaye Anjana | झूला झुलाये अंजना झूले तेरा लाल | Hanuman Bhajan | Vicky Sharma

यह भजन भगवान हनुमान के बाल स्वरूप का अत्यंत स्नेहमय और वात्सल्य रस से भरपूर वर्णन करता है। “झूला झुलाये अंजना, झूले तेरा लाल” एक लोकप्रिय हनुमान भजन है, जिसमें माता अंजना अपने बालक हनुमान को झूला झुलाते हुए लोरी सुना रही हैं। इस भजन के मूल रचयिता की प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, जबकि इसे अनेक भजन गायकों ने अपनी मधुर आवाज़ में प्रस्तुत किया है।

इस भजन का मुख्य भाव मातृ प्रेम (वात्सल्य रस), बाल-लीला और हनुमान जी के दिव्य बाल स्वरूप का वर्णन है। इसमें हनुमान जी को किसी महाबली योद्धा के रूप में नहीं, बल्कि एक चंचल, नटखट और प्यारे बालक के रूप में दिखाया गया है। “लल्ला लल्ला लोरी सुनाऊँ, सो जा मेरा लाल” जैसी पंक्तियाँ माता अंजना के स्नेह, ममता और वात्सल्य को अत्यंत सुंदर ढंग से व्यक्त करती हैं।

भजन में बाल हनुमान की नटखट लीलाओं का भी उल्लेख है। “ज़िद्दी बड़ा है तेरा पवन कुमार” पंक्ति उनके चंचल स्वभाव को दर्शाती है, जबकि “रंग सिंदूरी से मेरा कर दे श्रृंगार” हनुमान जी के सिंदूर-प्रेम की लोकमान्यता की ओर संकेत करती है। भक्तिभाव में यह प्रसंग उनके प्रेम, समर्पण और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

“सूरज को मुख में ले गया फल समझ के लाल” पंक्ति रामायण और पुराणों में वर्णित उस प्रसिद्ध कथा का स्मरण कराती है, जिसमें बाल हनुमान ने उगते हुए सूर्य को लाल फल समझकर निगलने का प्रयास किया था। यह कथा उनकी अद्भुत शक्ति, निर्भीकता और दिव्य स्वरूप को दर्शाती है।

अंतिम अंतरे में “राम से मिलूँगा माँ, चल अयोध्या नगरी” के माध्यम से हनुमान जी की भविष्य की रामभक्ति का संकेत दिया गया है। आगे चलकर यही बालक भगवान राम का सबसे महान सेवक और अनन्य भक्त बनता है। “छोटो सो वानर कर गयो देखो कमाल” पंक्ति यह दर्शाती है कि छोटी आयु में भी उनका जीवन असाधारण दिव्य कार्यों के लिए नियत था।

कुल मिलाकर, यह भजन माता अंजना और बाल हनुमान के स्नेहपूर्ण संबंध, बाल-लीलाओं और भविष्य में प्रकट होने वाली उनकी महान रामभक्ति का अत्यंत मधुर और भावपूर्ण चित्रण है। इसका संदेश है कि भगवान के बाल स्वरूप का स्मरण भक्त के हृदय में प्रेम, सरलता, निष्कपटता और भक्ति की भावना जागृत करता है।

Harshit Jain

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