कपि राम दूत कहलाए जब लंका जलाने आए
कपि रामदूत कहलाए,
जब लंका जलाने आए,
कपि राम दूत कहलाए,
जब लंका जलाने आए ॥
कभी इस डाल पर कभी उस डाल पर,
कभी इस डाल पर कभी उस डाल पर,
सारे फल फूल तोड़ गिराए,
जब लंका जलाने आए,
कपि राम दूत कहलाए,
जब लंका जलाने आए ॥
बोला लंकेश्वर है बड़ा ये निडर,
बोला लंकेश्वर है बड़ा ये निडर,
अपनी भक्ति की शक्ति दिखाए,
जब लंका जलाने आए,
कपि राम दूत कहलाए,
जब लंका जलाने आए ॥
जब वो पकडे गए धर के जकड़े गए,
जब वो पकडे गए धर के जकड़े गए,
पूँछ अपनी वो इतनी बढ़ाए,
जब लंका जलाने आए,
कपि राम दूत कहलाए,
जब लंका जलाने आए ॥
आग बढ़ने लगी लंका जलने लगी,
आग बढ़ने लगी लंका जलने लगी,
हर तरफ हाहाकार मचाए,
जब लंका जलाने आए,
कपि राम दूत कहलाए,
जब लंका जलाने आए ॥
जब वो शंकर सुवन किए लंका दहन,
जब वो शंकर सुवन किए लंका दहन,
इक विभीषण की कुटिया जलाए,
जब लंका जलाने आए,
कपि राम दूत कहलाए,
जब लंका जलाने आए॥
श्रेणी : हनुमान भजन
हनुमान जयंती का नया भजन सुनिए 🙏 कपि राम दूत कहलाए जब लंका जलाने आए 🙏🙏👌#hanumanjayantibhajan
यह “कपि राम दूत कहलाए, जब लंका जलाने आए” एक भक्तिमय हनुमान भजन है, जिसमें भगवान श्रीराम के परम भक्त और दूत हनुमान जी के लंका दहन की वीरगाथा का वर्णन किया गया है। भजन में हनुमान जी को श्रीराम का सच्चा दूत बताया गया है, जो माता सीता की खोज में लंका पहुंचते हैं और वहां रावण की नगरी में अपनी अद्भुत शक्ति और पराक्रम का परिचय देते हैं। भजन की पंक्तियों में हनुमान जी के लंका में घूमने, फल-फूल तोड़ने और राक्षसों को अपनी शक्ति का एहसास कराने का प्रसंग भक्तिमय और सरल शैली में प्रस्तुत किया गया है।
इस भजन का मुख्य भाव वीर रस, भक्ति, साहस और श्रीराम के प्रति हनुमान जी की अटूट निष्ठा है। जब हनुमान जी को रावण के सैनिक पकड़कर उनकी पूंछ में आग लगा देते हैं, तब हनुमान जी अपनी पूंछ को इतना बड़ा कर लेते हैं कि राक्षसों को उसे बांधने में कठिनाई होती है। इसके बाद वे उसी अग्नि से पूरी लंका में आग लगा देते हैं। भजन में “आग बढ़ने लगी, लंका जलने लगी” के माध्यम से लंका दहन के उस प्रसिद्ध प्रसंग को दर्शाया गया है, जिसमें हनुमान जी ने रावण के अहंकार और अधर्म को चुनौती दी थी।
इस भजन में एक महत्वपूर्ण भाव यह भी है कि हनुमान जी ने विभीषण की कुटिया को नहीं जलाया। रामायण की कथा में विभीषण भगवान श्रीराम के भक्त और धर्म के पक्षधर थे, इसलिए हनुमान जी ने उनके घर को सुरक्षित रखा। यह प्रसंग बताता है कि हनुमान जी केवल शक्तिशाली ही नहीं, बल्कि धर्म, भक्ति और विवेक को पहचानने वाले भी हैं। भजन में “शंकर सुवन” कहकर हनुमान जी को भगवान शिव का अंश या पुत्रस्वरूप माना गया है, जो उनकी दिव्य शक्ति और महिमा को दर्शाता है।