लगे मोरछड़ी का झाड़ा यहाँ आराम के लिए
तेरी हाज़री लगाता रहूं,
जब तक है सांसें मेरी,
तू बुलाता रहे, मैं आता रहूं .........
एक फूल गुलाब का लाया हूँ मेरे श्याम के लिए,
लगे मोरछड़ी का झाड़ा यहाँ आराम के लिए,
श्याम मेरे श्याम..........
श्याम मेरे श्याम..........
हर दुःख में साथ निभावे,
मेरा कारोबार चलावे,
दो टेम की रोटी कुनबा,
बस तेरी दया से खावे,
मिला तेरा सहारा बाबा पहचान के लिए,
लगे मोरछड़ी का झाड़ा यहाँ आराम के लिए,
रींगस ते निशान उठाया,
नंगे पैरो चल आया,
तोरण द्वार का देख नज़ारा,
आनंद होगी काया,
तेरा करूँ शुक्रियां बाबा बुलाण के लिए,
लगे मोरछड़ी का झाड़ा यहाँ आराम के लिए,
मेरा चोला रंग्या तेरे रंग में,
तू चले मेरे संग संग में,
बिन मांगे मन्ने सब मिलगया,
ना कमी रही जीवन में,
संदीप दीवाना आया गुणगान के लिए,
लगे मोरछड़ी का झाड़ा यहाँ आराम के लिए,
श्रेणी : खाटू श्याम भजन
Khatu Bhajan | Lage Morchadi Ka Jhada Aaram Ke Liye | Sandeep Deewana | Baba Shyam Bhajan
यह “लगे मोरछड़ी का झाड़ा यहाँ आराम के लिए” एक भावपूर्ण खाटू श्याम भजन है, जिसमें भक्त बाबा श्याम के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा, प्रेम और समर्पण को व्यक्त करता है। भजन की शुरुआत भक्त की इस भावना से होती है कि जब तक उसके शरीर में सांसें हैं, तब तक वह बाबा श्याम की हाजिरी लगाता रहे और बाबा उसे बार-बार अपने दरबार में बुलाते रहें। भक्त बाबा के चरणों में गुलाब का फूल अर्पित करता है और मोरछड़ी को बाबा की कृपा और शीतल छाया के प्रतीक के रूप में देखता है। “मोरछड़ी का झाड़ा” भक्त के लिए जीवन के दुख, चिंता और थकान से राहत देने वाली बाबा श्याम की कृपा का प्रतीक बन जाता है।
इस भजन का मुख्य भाव श्रद्धा, कृतज्ञता, सेवा और बाबा श्याम पर पूर्ण विश्वास है। भक्त मानता है कि जीवन के हर सुख-दुःख में बाबा श्याम उसके साथ खड़े हैं और उसके परिवार तथा कारोबार को उनकी कृपा से ही सहारा मिलता है। “दो टेम की रोटी कुनबा बस तेरी दया से खावे” जैसी पंक्तियों में भक्त बाबा के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करता है और जीवन में मिलने वाली हर छोटी-बड़ी खुशी को उनकी कृपा मानता है। भक्त का विश्वास है कि बाबा ने उसे बिना मांगे भी बहुत कुछ दिया है और अब उसके जीवन में किसी चीज की कमी नहीं है।
भजन में रींगस से निशान उठाकर नंगे पैर खाटू श्याम जी के दरबार तक पहुंचने की भक्तिमय यात्रा का भी वर्णन मिलता है। रींगस से खाटू धाम की पदयात्रा और बाबा के मंदिर के तोरण द्वार के दर्शन भक्त के लिए अत्यंत आनंद और सौभाग्य का अनुभव हैं। यह भाव खाटू श्याम भक्तों की उस आस्था को दर्शाता है, जिसमें वे बाबा के दरबार तक पैदल यात्रा करके अपनी श्रद्धा और समर्पण प्रकट करते हैं। अंतिम अंतरे में भक्त कहता है कि उसका जीवन बाबा श्याम के रंग में रंग चुका है और बाबा हर कदम पर उसके साथ हैं। इस तरह पूरा भजन बाबा श्याम की कृपा, उनके दरबार के प्रति प्रेम और भक्त के पूर्ण समर्पण की सुंदर अभिव्यक्ति है।