मैं राधे राधे नाम की दीवानी हो गयी
मैं राधे राधे नाम की दीवानी हो गयी,
मैं राधे राधे नाम की दीवानी हो गयी,
दीवानी हो गई मैं मस्तानी हो गई,
दीवानी मस्तानी मस्तानी दीवानी हो गई,
मैं राधे राधे नाम की दीवानी हो गयी,
मैं राधे राधे नाम की दीवानी हो गयी,
वृन्दावन में राधे राधे, गोवर्धन में राधे राधे,
बरसाने में राधे राधे, कुञ्ज गलिन में राधे राधे,
मैं झूठी दुनियादारी से बेगानी हो गई,
मैं राधे राधे नाम की दीवानी हो गयी,
मैं राधे राधे नाम की दीवानी हो गयी,
तुझमे मुझमे राधे राधे, सृष्टि के कण कण में राधे,
सब जीवो में राधे राधे, श्याम के मन में राधे राधे
मैं राधे राधे नाम की मस्ती में खो गई,
मैं राधे राधे नाम की दीवानी हो गयी,
मैं राधे राधे नाम की दीवानी हो गयी,
श्रेणी : कृष्ण भजन
Main Radhe Radhe Naam Ki Deewani 🙏 | Radha Rani Beautiful Bhajan | Anjali Sharma
यह भजन राधा नाम की महिमा, उनकी निष्काम भक्ति और भक्त के पूर्ण आध्यात्मिक समर्पण का अत्यंत मधुर एवं भावपूर्ण वर्णन करता है। “मैं राधे राधे नाम की दीवानी हो गयी” एक लोकप्रिय राधा-कृष्ण भजन है, जिसके मूल रचयिता की प्रामाणिक जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसे अनेक भजन गायकों ने अपने-अपने स्वर में प्रस्तुत किया है। यह भजन विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र की राधा-भक्ति (माधुर्य भक्ति) परंपरा से प्रेरित है, जहाँ राधा नाम को प्रेम, करुणा और भगवान तक पहुँचने का सर्वोत्तम मार्ग माना जाता है।
इस भजन का मुख्य भाव राधा नाम की महिमा, प्रेममयी भक्ति और संसार से वैराग्य है। “मैं राधे राधे नाम की दीवानी हो गयी” पंक्ति यह दर्शाती है कि भक्त का मन राधा रानी के नाम और स्मरण में पूरी तरह डूब चुका है। यहाँ “दीवानी” और “मस्तानी” शब्द सांसारिक आसक्ति नहीं, बल्कि ईश्वर-प्रेम में पूर्ण तल्लीनता और आध्यात्मिक आनंद का प्रतीक हैं।
भजन में वृन्दावन, गोवर्धन, बरसाना और ब्रज की कुंज गलियों का उल्लेख अत्यंत सुंदर ढंग से किया गया है। इन स्थानों को राधा-कृष्ण की दिव्य लीलाओं की पावन भूमि माना जाता है। “वृन्दावन में राधे राधे, गोवर्धन में राधे राधे, बरसाने में राधे राधे” का भाव यह है कि ब्रज की प्रत्येक गली, प्रत्येक धूलकण और प्रत्येक वातावरण राधा नाम से गुंजायमान है। भक्त भी उसी दिव्य वातावरण में अपने मन को पूरी तरह समर्पित कर देना चाहता है।
“मैं झूठी दुनियादारी से बेगानी हो गई” पंक्ति संसार के प्रति घृणा का नहीं, बल्कि यह भाव व्यक्त करती है कि जब मन ईश्वर के प्रेम में रम जाता है, तब सांसारिक मोह, अहंकार और क्षणिक आकर्षण स्वतः कम होने लगते हैं। भक्त का सबसे बड़ा आनंद अब राधा नाम का स्मरण और भक्ति बन जाता है।
अंतिम अंतरे में “तुझमें मुझमें राधे राधे, सृष्टि के कण-कण में राधे” के माध्यम से यह भाव प्रकट किया गया है कि राधा का प्रेम केवल किसी एक स्थान या व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त दिव्य प्रेम का प्रतीक है। “श्याम के मन में राधे राधे” यह दर्शाता है कि राधा और श्री कृष्ण का प्रेम अद्वैत और अविभाज्य है। भक्त इसी प्रेमरस में डूबकर स्वयं को धन्य मानता है।
कुल मिलाकर, यह भजन राधा नाम की महिमा, ब्रज की भक्ति परंपरा, निष्काम प्रेम और पूर्ण आत्मसमर्पण का अत्यंत सुंदर गुणगान है। इसका संदेश है कि जो भक्त श्रद्धा, प्रेम और विश्वास के साथ “राधे-राधे” नाम का स्मरण करता है, उसके हृदय में भक्ति, शांति, आनंद और ईश्वर के प्रति अटूट प्रेम का प्रकाश जागृत होता है।