सांवरियो सरकार लगा कर बैठ्यो है दरबार
सांवरियो सरकार लगा कर बैठ्यो है दरबार,
भगतां कानि रयो निहार, सांवरो मुलको है जी मुलके है,
बैठ्यो है दरबार में आकर है सिंहासन फूलां को,
मोर मुकुट काना में कुण्डल, जड़यो है बागो हीरा को,
भगतां खातिर आप देखो आयो लखदातार,
सांवरो मुलको है जी मुलके है.....
खीर चूरमा को भोग लगावे, सेवक चलू करावे है,
सांवरियो के बैठ सामने मन की बात बतावे है,
सुण रयो सबकी बात बाबो स्याम धणी दातार,
सांवरो मुलको है जी मुलके है.....
दुखियाँ रा दुःख दूर करे है, हारयोडा ने जितावे है,
मोरछड़ी को झाड़ो देकर सबका कष्ट मिटावे है,
राखज्यो सिर पर हाथ सदा थारे चेतन की या पुकार,
सांवरो मुलको है जी मुलके है......
श्रेणी : खाटू श्याम भजन
सांवरो मुलको है जी मुलके है | Sanwaro Mulke Hai Ji Mulke Hai | Shyam Bhajan | Chaitanya Dadhich
यह भजन भगवान खाटू श्याम के दिव्य दरबार, उनकी करुणा और भक्तों पर बरसने वाली कृपा का अत्यंत सुंदर चित्रण करता है। “सांवरियो सरकार लगा कर बैठ्यो है दरबार” एक लोकप्रिय राजस्थानी खाटू श्याम भजन है। इसके मूल रचयिता की प्रामाणिक जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। भजन के अंतिम चरण में “चेतन” नाम का उल्लेख मिलता है, जो संभवतः रचनाकार या गायक का नाम/उपनाम हो सकता है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। यह भजन राजस्थान की श्याम भक्ति परंपरा से जुड़ा हुआ है और विशेष रूप से श्याम दरबार एवं भजन संकीर्तन में गाया जाता है।
इस भजन का मुख्य भाव भगवान खाटू श्याम के दिव्य दरबार की महिमा, उनकी करुणा और भक्तों के प्रति वात्सल्य को व्यक्त करना है। “सांवरियो सरकार लगा कर बैठ्यो है दरबार, भगतां कानी रयो निहार” पंक्तियाँ यह दर्शाती हैं कि श्याम बाबा अपने भक्तों की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उनकी प्रत्येक पुकार को प्रेमपूर्वक सुनने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। “सांवरो मुलको है” का अर्थ है कि भगवान अपने भक्तों को देखकर प्रसन्नता और स्नेह से मुस्कुरा रहे हैं।
भजन में श्याम बाबा के दिव्य स्वरूप का भी अत्यंत मनोहारी वर्णन किया गया है। “सिंहासन फूलां को, मोर मुकुट, कानों में कुण्डल और हीरों से सुसज्जित बागा” जैसी पंक्तियाँ भगवान के राजसी और अलौकिक स्वरूप का चित्र खींचती हैं। यह वर्णन केवल बाहरी वैभव का नहीं, बल्कि भगवान की दिव्यता, सौंदर्य और महिमा का प्रतीक है, जो भक्त के मन में श्रद्धा और प्रेम उत्पन्न करता है।
आगे भजन में “खीर-चूरमा का भोग” और भक्तों द्वारा अपनी मन की बात भगवान को सुनाने का उल्लेख है। यह राजस्थान की श्याम भक्ति परंपरा की झलक प्रस्तुत करता है, जहाँ भक्त प्रेमपूर्वक भोग अर्पित करते हैं और भगवान को अपना सबसे निकट का सखा एवं संरक्षक मानकर अपने सुख-दुःख उनके सामने रखते हैं। “सुण रयो सबकी बात बाबो श्याम धणी दातार” का भाव यह है कि भगवान हर भक्त की पुकार सुनते हैं और उचित समय पर उस पर कृपा करते हैं।
अंतिम अंतरे में भगवान को “दुखियों का दुःख दूर करने वाला” और “हारे हुए को जिताने वाला” बताया गया है। “मोरछड़ी को झाड़ो देकर सबका कष्ट मिटावे है” खाटू श्याम जी की लोक-परंपरा का प्रतीकात्मक वर्णन है। भक्तों की मान्यता है कि श्याम बाबा की कृपा, आशीर्वाद और संरक्षण से जीवन में साहस, आशा और मानसिक शांति प्राप्त होती है। अंत में भक्त प्रार्थना करता है कि बाबा का कृपामय हाथ सदैव उसके सिर पर बना रहे।
कुल मिलाकर, यह भजन भगवान खाटू श्याम के दिव्य दरबार, उनके मनमोहक स्वरूप, असीम दया और भक्तवत्सल स्वभाव का भावपूर्ण गुणगान है। इसका संदेश है कि जो भक्त सच्चे मन, श्रद्धा और विश्वास के साथ श्याम बाबा की शरण में आता है, भगवान उसकी प्रार्थना सुनते हैं, उसे आध्यात्मिक संबल प्रदान करते हैं और जीवन की कठिन राहों में उसका मार्गदर्शन करते हैं।