मैं तो दंदरौआ को जाऊं जाके अर्जी लगाऊं
मैं तो दंदरौआ में जाऊं, जाके अर्जी लगाऊं,
और चोला चढ़ाऊँ चलके, लगाऊं पैदल परिक्रमा,
मेरी विनती सुनेंगे, दंदरौआ वाले,
मेरे कष्ट हरेगे, मेरे रखवाले,
मेरी विनती सुनेगे ,मेरे कष्ट हरेगे, मेरे रोग कटेगें सारे,
लगाऊं पैदल परिक्रमा़,
मैं तो शीश झुकाऊं, हनुमत को मनाऊं,
हनुमत को मनाऊं, उन्हें भोग लगाऊं,
मैं तो शीश झुकाऊं, हनुमत को मनाऊं,,
उन्हें भोग लगाऊं चलके, लगाऊं पैदल परिक्रमा़,
अरे बूडो मंगल, दंदरौआ में मेला,,
और भक्त भी आवे, यहाँ भर भर के ठेला,
सब अर्जी लगावे मिलके, लगाऊं पैदल परिक्रमा़,
श्रेणी : हनुमान भजन
मैं तो दंदरौआ को जाऊं जाके अर्जी लगाऊ~ दंदरौआ भजन~#dandrauasarkar1008 #dandrauadham #hanuman 🙏🌹
यह भजन हनुमान जी के प्रसिद्ध दंदरौआ धाम की महिमा और वहाँ की अटूट श्रद्धा को व्यक्त करता है। “मैं तो दंदरौआ में जाऊं, जाके अर्जी लगाऊं” एक लोकभक्ति शैली का लोकप्रिय हनुमान भजन है, जिसके रचयिता के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह भजन विशेष रूप से दंदरौआ सरकार के भक्तों के बीच अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
इस भजन का मुख्य भाव “श्रद्धा, विश्वास और शरणागति” है। इसमें भक्त संकल्प करता है कि वह दंदरौआ धाम जाकर हनुमान जी के चरणों में अपनी अर्जी (प्रार्थना) लगाएगा, चोला चढ़ाएगा और पैदल परिक्रमा करेगा। यह भाव केवल धार्मिक अनुष्ठान का नहीं, बल्कि अपनी आस्था, कृतज्ञता और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। भक्त का विश्वास है कि दंदरौआ वाले हनुमान उसकी विनती सुनेंगे, उसके कष्ट दूर करेंगे और जीवन की बाधाओं को समाप्त करेंगे।
भजन में “शीश झुकाऊँ, हनुमत को मनाऊँ” जैसी पंक्तियाँ विनम्रता और भक्ति की भावना को दर्शाती हैं। भक्त हनुमान जी को भोग अर्पित कर उनकी कृपा प्राप्त करने की कामना करता है। यहाँ चोला चढ़ाना, परिक्रमा करना और भोग लगाना पारंपरिक श्रद्धा और सेवा के प्रतीक हैं, जिन्हें भक्त अपनी भक्ति का माध्यम मानता है।
“बूढ़ो मंगल” मेले का उल्लेख इस भजन की विशेषता है। बूढ़वा मंगल के अवसर पर दंदरौआ धाम में विशाल मेला लगता है, जहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए आते हैं। भजन इसी जीवंत धार्मिक वातावरण और सामूहिक आस्था का चित्रण करता है।
कुल मिलाकर, यह भजन दंदरौआ धाम के हनुमान जी के प्रति भक्तों के अटूट विश्वास, सेवा-भाव और श्रद्धा का सुंदर चित्रण है। इसका संदेश यह है कि सच्चे मन, विश्वास और समर्पण के साथ की गई प्रार्थना भगवान अवश्य सुनते हैं और अपने भक्तों को साहस, संरक्षण तथा कृपा प्रदान करते हैं।