श्रीराम की गली में तुम जाना, shree ram ki gali main tum jaana

श्री राम की गली में तुम जाना



राम नाम की धुन में देखो, नाचे हनुमान।
संकट काटे कष्ट मिटाए भजलो राम राम

आए कैसा भी संकट, बिल्कुल ना घबराना
जिनके नाम से कांपे संकट उनकी शरण में जाना
जिनके नाम से कांपे संकट उनकी शरण में जाना

(मुखड़ा)
श्री राम की गली में
श्री राम की गली में तुम जाना
वहा नाचते मिलेंगे हनुमाना

(अंतरा)
उनके तन में है राम उनके मन में है राम
अपनी आंखो से देखे उनके सीने में राम
श्री राम का, हो गया दीवाना
वहा नाचते मिलेंगे हनुमाना
श्री...

(अंतरा)
उनसे कहना राम राम , वो कहेंगे राम राम
कुछ भी सुनते नही बस सुनेंगे राम राम
मैने रामजी का भजन सुनाया
देखो बजरंगी दौड़ा दौड़ा आया
श्री...

(अंतरा)
ऐसा राम जी से जोड़ लिया नाता
जब भी देखो उन्ही के गुण गाता
श्री राम के चरनो में ठिकाना
वहा नाचते मिलेंगे हनुमाना
श्री...



श्रेणी : हनुमान भजन



Shree Ram Ki Gali Me (Official New Version) 2026 (Vol.1) Abhishek Naagar श्रीराम की गली में तुम जाना

यह भजन भगवान हनुमान की श्रीराम के प्रति अनन्य भक्ति और समर्पण का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन करता है। “श्री राम की गली में तुम जाना” एक आधुनिक हनुमान भजन है, जिसमें भक्ति, उत्साह और राम नाम की महिमा का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। इसके मूल रचयिता की प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, जबकि इसे कई भजन गायकों द्वारा प्रस्तुत किया गया है।

इस भजन का मुख्य भाव “राम नाम की महिमा और हनुमान जी की अनन्य रामभक्ति” है। आरंभ में ही कहा गया है कि “राम नाम की धुन में देखो, नाचे हनुमान”, जिससे यह संदेश मिलता है कि भगवान का नाम ही हनुमान जी के लिए सबसे बड़ा आनंद और साधना है। साथ ही “संकट काटे कष्ट मिटाए, भज लो राम राम” पंक्ति यह विश्वास प्रकट करती है कि श्रीराम के नाम का स्मरण भक्त के जीवन के दुखों और संकटों को दूर करने की शक्ति रखता है।

भजन का मुखड़ा—“श्री राम की गली में तुम जाना, वहाँ नाचते मिलेंगे हनुमाना”—एक प्रतीकात्मक भाव है। इसका अर्थ यह नहीं कि कोई विशेष गली है, बल्कि जहाँ भी श्रीराम का नाम, कीर्तन और भक्ति होती है, वहाँ हनुमान जी की दिव्य उपस्थिति मानी जाती है। हनुमान जी सदैव राम नाम के रस में मग्न रहते हैं और भक्तों को भी उसी मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

“उनके तन में है राम, उनके मन में है राम, अपनी आँखों से देखे उनके सीने में राम” पंक्तियाँ उस प्रसिद्ध प्रसंग की ओर संकेत करती हैं, जिसमें हनुमान ने अपना सीना चीरकर उसमें राम और सीता का दिव्य स्वरूप दिखाया था। यह घटना उनकी निष्काम, अटूट और पूर्ण समर्पित भक्ति का प्रतीक मानी जाती है।

भजन यह भी सिखाता है कि हनुमान जी के जीवन का एकमात्र उद्देश्य श्रीराम का गुणगान करना और उनके चरणों की सेवा करना है। “कुछ भी सुनते नहीं, बस सुनेंगे राम राम” पंक्ति इस बात को दर्शाती है कि उनके लिए संसार की सबसे प्रिय ध्वनि केवल राम नाम है।

कुल मिलाकर, यह भजन श्रीराम के नाम की महिमा, हनुमान जी की अद्वितीय भक्ति और भक्तों को राम नाम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला अत्यंत प्रेरणादायक भजन है। इसका संदेश है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से राम का स्मरण करता है और हनुमान जी की भक्ति करता है, उसके जीवन के भय, संकट और दुख धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं तथा उसका जीवन ईश्वर की कृपा से प्रकाशित हो जाता है।

Harshit Jain

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