तू राजा बना दे या भिखारी
तू राजा बना दे या भिखारी, तीन बाण के धारी,
मैं भीख मांगने आउंगी, चौखट पे श्याम तुम्हारी,
ग्यारस पे आके खाटू तेरी हाज़री भरूंगी,
तेरी रज़ा में राज़ी रहूंगी,
सजा जो मिलेगी हंस के सहूंगी,
तेरे आगे हाथ फैलाउंगी मैं सबसे बड़ी भिखारी,
तू राजा बना दे या भिखारी, तीन बाण के धारी
मुझसे नज़रें तोड़ ली तो टूट गाँठ लग जाएगी
तेरे दर से हार गई जो, नज़रे कभी ना जुड़ पाएंगी
मैं अपना फ़र्ज़ निभाऊंगी, मेरे मनमोहन गिरधारी
तू राजा बना दे या भिखारी ,तीन बाण के धारी
बिखर ना जाऊं बाबा तू हारे का सहारा
खाली गई जो होगी बदनामी,
समझेगा पीड़ा मेरी अन्तर्यामी
सज्जन कब तक गम पियेगा मैं हार गई बनवारी
तू राजा बना दे या भिखारी ,तीन बाण के धारी
श्रेणी : खाटू श्याम भजन
Tu Raja Bana De Ya Bhikhari (Full Song) | Teen Baan Ke Dhaari | Muskan Soni Shyam Bhajan
यह भजन भगवान खाटू श्याम के प्रति पूर्ण समर्पण, अटूट विश्वास और विनम्र प्रार्थना का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण है। “तू राजा बना दे या भिखारी” एक लोकप्रिय खाटू श्याम भजन है, जिसके मूल रचयिता की प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसे विभिन्न भजन गायकों द्वारा गाया गया है और विशेष रूप से खाटू श्याम भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है।
इस भजन का मुख्य भाव पूर्ण शरणागति (समर्पण) है। भक्त भगवान से कहता है कि वे उसे राजा बनाएं या भिखारी, यह निर्णय उन्हीं का है। उसे धन, वैभव या सम्मान की इच्छा नहीं है; उसकी सबसे बड़ी अभिलाषा केवल श्याम बाबा के चरणों में स्थान और उनकी कृपा प्राप्त करना है। “मैं भीख मांगने आउंगी, चौखट पे श्याम तुम्हारी” पंक्ति सांसारिक भीख नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति, कृपा और दर्शन की याचना का प्रतीक है।
भजन में एकादशी (ग्यारस) का उल्लेख है, जो खाटू श्याम भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है। भक्त संकल्प करता है कि वह प्रत्येक ग्यारस को खाटू श्याम मंदिर में उपस्थित होकर बाबा के दर्शन करेगा और उनकी इच्छा को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करेगा। “सजा जो मिलेगी हंस के सहूंगी” पंक्ति यह दर्शाती है कि सच्चा भक्त भगवान के हर निर्णय को प्रसाद मानकर स्वीकार करता है।
“मुझसे नज़रें तोड़ ली तो टूट गाँठ लग जाएगी” जैसी पंक्तियाँ भक्त और भगवान के बीच गहरे प्रेमपूर्ण संबंध को व्यक्त करती हैं। भक्त मानता है कि यदि श्याम बाबा का साथ छूट गया तो जीवन का सबसे बड़ा सहारा समाप्त हो जाएगा। इसलिए वह उनसे कभी अपने ऊपर से कृपा-दृष्टि न हटाने की प्रार्थना करता है।
अंतिम अंतरे में भगवान को “हारे का सहारा” कहा गया है। खाटू श्याम जी की सबसे प्रसिद्ध मान्यता यही है कि वे जीवन में निराश, दुखी और पराजित लोगों का सहारा बनते हैं। भक्त विश्वास करता है कि बाबा उसके मन की पीड़ा बिना कहे ही समझते हैं और उचित समय पर उसकी रक्षा अवश्य करते हैं।
कुल मिलाकर, यह भजन खाटू श्याम जी के प्रति अटूट विश्वास, विनम्रता, समर्पण और उनकी कृपा पर पूर्ण निर्भरता का अत्यंत मार्मिक चित्रण है। इसका संदेश है कि जो व्यक्ति अहंकार छोड़कर सच्चे मन से श्याम बाबा की शरण में आता है, उसे जीवन के हर संघर्ष में आध्यात्मिक शक्ति, आशा और दिव्य सहारा प्राप्त होता है।