नहीं जाना छोड़ के अब तेरा द्वार
श्याम मेरे श्याम .........
श्याम मेरे श्याम .........
सारी होशियारी मेरी सारी चालाकी मेरी,
सब ज़ाहिर है तेरे सामने,
जानू ना पूजा विधि जानू न जप तप कोई,
फिर भी अपनाया मुझे श्याम ने,
मुझे श्याम ने..........
नहीं जाना छोड़ के अब तेरा द्वार श्याम हमें नहीं जाना,
नहीं जाना छोड़ के अब तेरा द्वार श्याम हमें नहीं जाना,
जाने कैसे कर्म का फल है, जो द्वार तुम्हारा पाया,
अब लगे जहाँ बेगाना, मुझे रास तू ही एक आया,
नहीं जाना सांवरे नहीं जाना,
नहीं जाना छोड़ के अब तेरा द्वार श्याम हमें नहीं जाना,
दर दर ठोकर खा के प्रभु द्वार तुम्हारे आया,
गैरो की क्या मैं बोलूं अपनों ने भी ठुकराया,
ठोकर खा खा के हारा, जब हारा तुझे पुकारा,
हारे का साथ निभाया, प्रभु देकर तूने सहारा,
नहीं जाना सांवरे नहीं जाना,
नहीं जाना छोड़ के अब तेरा द्वार श्याम हमें नहीं जाना,
तू पास रहा है हर दम मेरे हर एहसासो में,
परछाइयाँ भी जब छोड़े तू था उन लम्हातो में,
मुझे लगता जहाँ गंवारा, बस तेरा प्यार ही प्यारा,
गोलू की ख़ुशी का कारण बस तू है खाटूवाला,
नहीं जाना सांवरे नहीं जाना,
नहीं जाना छोड़ के अब तेरा द्वार श्याम हमें नहीं जाना,
इतनी अरज सरकार सुन लीजिये,
खुद से कभी मुझे दूर ना कीजिये,
हमको सहारा तेरा तू पालनहारा,
बेगाना जग ये सारा तू बस हमारा,
सुन ले ओ खाटूवाले हम है बस तेरे हवाले,
तेरा द्वारा छोड़ के कहीं भी नहीं जाना,
नहीं जाना छोड़ के अब तेरा द्वार श्याम हमें नहीं जाना,
श्रेणी : खाटू श्याम भजन
Nahi Jana Chhod Ke Ab Tera Dwar | Khatu Shyam Latest Bhajan | Puja Nathani
यह भजन भगवान खाटू श्याम के प्रति अटूट विश्वास, पूर्ण समर्पण और शरणागति की भावना को व्यक्त करता है। “नहीं जाना छोड़ के अब तेरा द्वार” एक अत्यंत भावपूर्ण खाटू श्याम भजन है, जिसके मूल रचयिता की प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसे अनेक भजन गायकों ने स्वर दिया है और यह विशेष रूप से श्याम भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है।
इस भजन का मुख्य भाव भगवान की शरण में स्थायी आश्रय प्राप्त करने की प्रार्थना है। भक्त स्वीकार करता है कि उसके पास न कोई विशेष ज्ञान है, न पूजा-पाठ की पूर्ण विधि और न ही तपस्या का अहंकार। फिर भी श्याम बाबा ने उसे अपना लिया। “जानू ना पूजा विधि, जानू न जप तप कोई, फिर भी अपनाया मुझे श्याम ने” पंक्तियाँ यह संदेश देती हैं कि भगवान बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि सच्चे मन और निष्कपट प्रेम को स्वीकार करते हैं।
भजन में जीवन के संघर्षों का भी मार्मिक चित्रण है। भक्त कहता है कि वह संसार में अनेक ठोकरें खाकर, अपनों से ठुकराकर अंततः श्याम बाबा के दरबार तक पहुँचा। “दर-दर ठोकर खा के प्रभु द्वार तुम्हारे आया” और “हारे का साथ निभाया” जैसी पंक्तियाँ इस विश्वास को प्रकट करती हैं कि खाटू श्याम जी सदैव निराश, दुखी और पराजित लोगों का सहारा बनते हैं। यही कारण है कि उन्हें “हारे का सहारा” कहा जाता है।
भजन का एक सुंदर भाव यह भी है कि भक्त अनुभव करता है कि कठिन समय में जब सबने उसका साथ छोड़ दिया, तब भी श्याम बाबा उसके साथ थे। “परछाइयाँ भी जब छोड़े, तू था उन लम्हातों में” पंक्ति ईश्वर की अदृश्य उपस्थिति और करुणा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन करती है। भक्त अब संसार के किसी अन्य सहारे को स्वीकार नहीं करना चाहता और केवल श्याम बाबा के चरणों में ही अपना जीवन बिताने की इच्छा व्यक्त करता है।
अंतिम प्रार्थना—“खुद से कभी मुझे दूर ना कीजिये”—पूर्ण शरणागति का सर्वोच्च भाव है। भक्त भगवान से केवल यही वरदान माँगता है कि चाहे जीवन में कैसी भी परिस्थितियाँ आएँ, उनका साथ कभी न छूटे।
कुल मिलाकर, यह भजन खाटू श्याम जी के प्रति अटूट श्रद्धा, कृतज्ञता और संपूर्ण आत्मसमर्पण का सुंदर चित्रण है। इसका संदेश है कि जब मनुष्य अहंकार छोड़कर सच्चे हृदय से भगवान की शरण में आता है, तब उसे जीवन का वास्तविक सहारा, आंतरिक शांति और अडिग विश्वास प्राप्त होता है।