वृन्दावन से आया बुलावा मेरे श्याम का
।। श्री बांके बिहारी जी का नया भजन ।।
वृन्दावन से आया, बुलावा मेरे श्याम का,
हो गया दीवाना, मैं राधे राधे नाम का,
क्या मैं करू कुछ समझ नहीं आए,
मन ये मेरा बस राधे राधे गाए,
कैसा हैं ये जादू, मेरे घनश्याम का,
हो गया दीवाना, मैं राधे राधे नाम का,
वृन्दावन से आया, बुलावा मेरे श्याम का,
हो गया दीवाना, मैं राधे राधे नाम का,
आँखों से बहते आंसू, अब सुबह शाम हैं,
होठो पे रहता बस, राधा राधा नाम हैं,
कैसा हैं ये जादू, मेरे घनश्याम का,
हो गया दीवाना, मैं राधे राधे नाम का,
वृन्दावन से आया, बुलावा मेरे श्याम का,
हो गया दीवाना, मैं राधे राधे नाम का,
कितने जनम के मेरे पुण्य फले हैं,
अब जा कर मुझे श्याम मिले हैं,
मिल गया मुझको दर्शन मेरे घनश्याम का,
हो गया दीवाना, मैं राधे राधे नाम का,
वृन्दावन से आया, बुलावा मेरे श्याम का,
हो गया दीवाना, मैं राधे राधे नाम का,
Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : कृष्ण भजन
वृन्दावन से आया बुलावा मेरे श्याम का । श्री बांके बिहारी जी का नया भजन #bankebihari #krishnabhajan
यह भजन भगवान श्री कृष्ण, विशेष रूप से बांके बिहारी के प्रति भक्त की गहरी श्रद्धा, प्रेम और वृन्दावन धाम के दिव्य आकर्षण का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन करता है। इस भजन के गीतकार जय प्रकाश वर्मा, इंदौर हैं, जैसा कि भजन में स्वयं उल्लेखित है। यह एक आधुनिक कृष्ण भजन है, जो राधा-कृष्ण भक्ति की माधुर्य परंपरा से प्रेरित है।
इस भजन का मुख्य भाव वृन्दावन धाम का दिव्य बुलावा, राधे नाम की महिमा और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति पूर्ण आत्मसमर्पण है। “वृन्दावन से आया बुलावा मेरे श्याम का” पंक्ति का अर्थ केवल किसी स्थान की यात्रा का निमंत्रण नहीं है, बल्कि यह उस आध्यात्मिक पुकार का प्रतीक है, जब भगवान स्वयं अपने भक्त को अपनी भक्ति और प्रेम के मार्ग पर बुलाते हैं। भक्त इस दिव्य बुलावे को अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य मानता है।
भजन में “हो गया दीवाना, मैं राधे राधे नाम का” के माध्यम से यह बताया गया है कि भक्त का मन अब पूरी तरह राधा नाम के रस में डूब चुका है। “मन ये मेरा बस राधे राधे गाए” का भाव यह है कि भगवान के प्रेम में डूबने के बाद मन स्वतः उनके नाम का स्मरण करने लगता है। यहाँ “जादू” शब्द भगवान की मोहिनी कृपा और दिव्य प्रेम का काव्यात्मक प्रतीक है।
दूसरे अंतरे में “आँखों से बहते आँसू” और “होठों पे रहता बस राधा राधा नाम” जैसी पंक्तियाँ भक्त की गहन भावावस्था को व्यक्त करती हैं। ये आँसू दुःख के नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रेम, विरह और भक्ति-रस के आँसू हैं। वैष्णव भक्ति परंपरा में ऐसी भावावस्था को भगवान की विशेष कृपा का संकेत माना गया है, जहाँ भक्त का प्रत्येक विचार और प्रत्येक श्वास प्रभु के नाम में लीन हो जाता है।
अंतिम अंतरे में “कितने जनम के मेरे पुण्य फले हैं” के माध्यम से यह भाव प्रकट किया गया है कि भगवान का दर्शन और उनकी भक्ति अनेक जन्मों के शुभ कर्मों का फल मानी जाती है। “मिल गया मुझको दर्शन मेरे घनश्याम का” भक्त की उस परम संतुष्टि और आध्यात्मिक आनंद का प्रतीक है, जहाँ उसे अपने जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य प्राप्त हो जाता है।
कुल मिलाकर, यह भजन वृन्दावन धाम की महिमा, राधा नाम की शक्ति और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति निष्काम प्रेम एवं समर्पण का अत्यंत सुंदर गुणगान है। इसका संदेश है कि जब भक्त सच्चे मन, श्रद्धा और प्रेम के साथ राधा-कृष्ण का स्मरण करता है, तब उसका जीवन भक्ति, शांति और दिव्य आनंद से भर जाता है तथा उसे ईश्वर की कृपा का अनुभव होने लगता है।
Radhe - Radhe Sir ,
ReplyDeleteThanks for your kind support in my religious journey " Bhajano Ka Safar "
Jay Prakash Verma, Indore