आओ मेरे कान्हा आ जाओ
।। रक्षाबंधन कृष्ण भजन 2026 ।।
आओ मेरे कान्हा आ जाओ, राखी का दिन आया है,
राखी तो बंधवा जाओ, बहना ने तुम्हे बुलाया है,
रिश्ता मेने तुमसे जोड़ा, तुमको बनाया भाई,
अपनी इस बहना के लिए, अब आ भी जाओ कन्हाई,
आओ मेरे कान्हा आ जाओ, राखी का दिन आया है,
राखी तो बंधवा जाओ, बहना ने तुम्हे बुलाया है,
प्रेम के धागे जोड़ के मेने, राखी एक बनाई,
अब ना देर लगाओ कान्हा, अब आ भी जाओ कन्हाई,
आओ मेरे कान्हा आ जाओ, राखी का दिन आया है,
राखी तो बंधवा जाओ, बहना ने तुम्हे बुलाया है,
सुन के मेरी पुकार को देखो, आ गए कृष्ण कन्हाई,
एक बार कान्हा ने फिर से, बहन की लाज बचाई,
आओ मेरे कान्हा आ जाओ, राखी का दिन आया है,
राखी तो बंधवा जाओ, बहना ने तुम्हे बुलाया है,
Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : कृष्ण भजन
आओ मेरे कान्हा आ जाओ, राखी का दिन आया हैं । रक्षाबंधन कृष्ण भजन 2026 । #rakhi #rakhisong #krishna
यह “आओ मेरे कान्हा आ जाओ, राखी का दिन आया है” एक भावपूर्ण रक्षाबंधन कृष्ण भजन है, जिसमें बहन अपने आराध्य श्री कृष्ण को भाई के रूप में मानकर उन्हें राखी बंधवाने के लिए प्रेमपूर्वक बुलाती है। भजन में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को कृष्ण भक्ति के साथ जोड़ा गया है। बहन कहती है कि उसने कृष्ण से अपना रिश्ता जोड़कर उन्हें अपना भाई बनाया है और अब राखी के शुभ अवसर पर वह अपने कान्हा को अपने पास बुलाना चाहती है।
इस भजन का मुख्य भाव भाई-बहन के प्रेम, श्रद्धा, विश्वास और भगवान श्री कृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण का है। “प्रेम के धागे” से बनाई गई राखी केवल एक सामान्य राखी नहीं, बल्कि बहन की श्रद्धा और कृष्ण के प्रति उसके अटूट प्रेम का प्रतीक बन जाती है। यहां बहन कृष्ण से किसी सांसारिक भाई की तरह अपने रिश्ते को निभाने की विनती करती है और उनके दर्शन तथा स्नेह की इच्छा व्यक्त करती है।
भजन की सबसे भावपूर्ण पंक्तियों में बहन की पुकार सुनकर कृष्ण कन्हाई के आ जाने और “बहन की लाज बचाने” का वर्णन मिलता है। यह प्रसंग कृष्ण के उस स्वरूप को दर्शाता है जिसमें भगवान अपने भक्तों और उनसे जुड़े पवित्र रिश्तों की रक्षा करने वाले माने जाते हैं। इस कारण भजन में रक्षाबंधन का उत्सव केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भगवान और भक्त के बीच प्रेम, सुरक्षा और विश्वास के आध्यात्मिक संबंध का रूप ले लेता है।
इस भजन के बोलों में कान्हा, कन्हाई और कृष्ण कन्हाई जैसे नामों के माध्यम से श्री कृष्ण के बाल और स्नेहमय स्वरूप को सामने रखा गया है। रक्षाबंधन के अवसर पर कृष्ण को भाई मानकर राखी अर्पित करने की भावना इस भजन को विशेष रूप से भावुक और पारिवारिक बना देती है। इसे रक्षाबंधन, कृष्ण जन्माष्टमी या कृष्ण भक्ति से जुड़े धार्मिक आयोजनों में गाया और सुना जा सकता है।