माखन मिश्री का दीवाना मेरा श्याम
।। श्री कृष्ण जन्माष्टमी भजन 2026 ।।
माखन मिश्री का दीवाना मेरा श्याम, चुरावे माखन गोकुल में,
मटकी माखन की फोड़े घनश्याम, चुरावे माखन गोकुल में,
ग्वालो की एक टोली बनाई, जिसके मुखिया श्याम,
रोज रोज माखन चुरावे, गोकुल में घनश्याम,
केसी लीला दिखावे मेरा श्याम, चुरावे माखन गोकुल में,
माखन मिश्री का दीवाना मेरा श्याम, चुरावे माखन गोकुल में,
मटकी माखन की फोड़े घनश्याम, चुरावे माखन गोकुल में,
सारे जग का पालनहारा, लीला अजब है करता,
मटकी से माखन को चुराने, ग्वालो के ऊपर हैं चढ़ता,
केसी लीला दिखावे मेरा श्याम, चुरावे माखन गोकुल में,
माखन मिश्री का दीवाना मेरा श्याम, चुरावे माखन गोकुल में,
मटकी माखन की फोड़े घनश्याम, चुरावे माखन गोकुल में,
कभी कभी जो पकड़ा जाता, बन जाता भोला भाला,
भोली सी सूरत बना के, सबको छलता नन्द का लाला,
केसी लीला दिखावे मेरा श्याम, चुरावे माखन गोकुल में,
माखन मिश्री का दीवाना मेरा श्याम, चुरावे माखन गोकुल में,
मटकी माखन की फोड़े घनश्याम, चुरावे माखन गोकुल में,
Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : कृष्ण भजन
माखन मिश्री का दीवाना मेरा श्याम , चुरावे माखन गोकुल में । श्री कृष्ण जन्माष्टमी भजन 2026 । #krishna
यह “माखन मिश्री का दीवाना मेरा श्याम” एक आनंदमय कृष्ण भजन है, जो विशेष रूप से श्री कृष्ण जन्माष्टमी के उत्सव और बाल कृष्ण की मनमोहक लीलाओं को समर्पित है। भजन में भगवान श्रीकृष्ण को गोकुल के नटखट नंदलाल के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो माखन और मिश्री के बहुत शौकीन हैं और गोकुल की गलियों में गोप-ग्वालों के साथ मिलकर माखन चुराने की बाल लीलाएं करते हैं। मटकी फोड़ना, माखन चुराना और पकड़े जाने पर भोला-भाला बन जाना जैसे प्रसंग भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की चंचलता और मनमोहक स्वभाव को दर्शाते हैं।
इस भजन का मुख्य भाव बाल कृष्ण की नटखट लीलाओं के प्रति प्रेम, वात्सल्य और आनंद है। इसमें कृष्ण को केवल संसार के पालनहार के रूप में नहीं, बल्कि गोकुल के एक प्यारे और शरारती बालक के रूप में देखा गया है। “ग्वालों की एक टोली बनाई, जिसके मुखिया श्याम” के माध्यम से कृष्ण के अपने सखाओं के साथ खेलने और माखन चोरी करने का सुंदर चित्र सामने आता है। भक्त इन बाल लीलाओं को देखकर आनंदित होता है और कृष्ण की हर शरारत को उनकी दिव्य लीला के रूप में स्वीकार करता है।
भजन में श्रीकृष्ण की माखन चोरी की प्रसिद्ध बाल लीला को बहुत सरल लोकभाषा में प्रस्तुत किया गया है। ग्वालों के कंधों पर चढ़कर मटकी तक पहुंचना और माखन निकालना कृष्ण की चंचलता को दर्शाता है। वहीं जब कृष्ण पकड़े जाते हैं तो “भोली सी सूरत बना के” सबको अपनी मासूमियत से मोहित कर लेते हैं। इस भाव में कृष्ण की वह छवि दिखाई देती है जिसमें उनकी शरारत भी भक्तों को प्रेम और आनंद से भर देती है। माखन-मिश्री यहां कृष्ण की प्रिय बाल-लीला और गोकुल के ग्रामीण जीवन की मधुरता का प्रतीक बन जाते हैं।
भजन का एक सुंदर पक्ष यह भी है कि इसमें “सारे जग का पालनहारा” कहकर कृष्ण के दो रूपों को एक साथ जोड़ा गया है। एक ओर वे पूरे संसार का पालन करने वाले परमात्मा हैं और दूसरी ओर गोकुल में माखन चुराने वाले नंद के लाला हैं। यही विरोधाभास कृष्ण भक्ति की विशेषता को दर्शाता है—परम शक्ति का बाल रूप में सहज, सरल और प्रेममय होकर भक्तों के बीच लीला करना।