चलो रे चले हम वृन्दावन-वृन्दावन में करेंगे
।। वृन्दावन की अदभुत यात्रा का भजन ।।
चलो रे चले हम वृन्दावन' वृन्दावन में करेंगे भजन'
चलो रे चले हम वृन्दावन' वृन्दावन में करेंगे भजन'
वहा राधे राधे गाएंगे और श्याम के दर्शन पाएंगे.....
कुंज गली में बैठे है घनश्याम' हाथ जोड़कर कर लो उनको प्रणाम,
कुंज गली में बैठे है घनश्याम' हाथ जोड़कर कर लो उनको प्रणाम,
चलो बंसीवट' चलो यमुनातट' चलो बंसीवट' चलो यमुनातट'
वहा राधे राधे गाएंगे और श्याम के दर्शन पाएंगे'
चलो रे चले हम वृन्दावन' वृन्दावन में करेंगे भजन'
चलो रे चले हम वृन्दावन' वृन्दावन में करेंगे भजन.....
चलो वहा से गोवर्धन की ओर' कर लो परिक्रमा उसके चारो ओर'
चलो वहा से गोवर्धन की ओर' कर लो परिक्रमा उसके चारो ओर'
चलो राधाकुण्ड' चलो श्यामकुण्ड' चलो राधाकुण्ड' चलो श्यामकुण्ड'
वहा राधे राधे गाएंगे और मानसी गंगा में नहाएंगे'
चलो रे चले हम वृन्दावन' वृन्दावन में करेंगे भजन'
चलो रे चले हम वृन्दावन' वृन्दावन में करेंगे भजन.......
चलो वहा से बरसाना धाम' राधा जी के चरणो में कर लो प्रणाम'
चलो वहा से बरसाना धाम' राधा जी के चरणो में कर लो प्रणाम'
चलो नंदगाव' कान्हा के गाव' चलो नंदगाव' कान्हा के गाव'
वहा राधे राधे गाएंगे और श्याम के हम हो जाएंगे'
चलो रे चले हम वृन्दावन' वृन्दावन में करेंगे भजन'
चलो रे चले हम वृन्दावन' वृन्दावन में करेंगे भजन.......
Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : कृष्ण भजन
चलो रे चले हम वृन्दावन , वृन्दावन में करेंगे भजन ।। वृन्दावन की अदभुत यात्रा का भजन ।। #vrindavan
“चलो रे चले हम वृन्दावन-वृन्दावन में करेंगे” एक सुंदर कृष्ण भजन है, जिसमें वृन्दावन और ब्रजभूमि की धार्मिक एवं आध्यात्मिक यात्रा का भावपूर्ण वर्णन किया गया है। यह भजन भक्तों को वृन्दावन चलने, वहां राधे-राधे नाम का संकीर्तन करने और श्रीकृष्ण के दर्शन की अभिलाषा रखने के लिए प्रेरित करता है। पूरे भजन में ब्रज के प्रमुख धार्मिक स्थलों को एक भक्तिमय यात्रा के रूप में जोड़ा गया है।
भजन की शुरुआत वृन्दावन धाम से होती है, जहां भक्त राधा-कृष्ण का नाम लेकर भजन करने की इच्छा व्यक्त करता है। कुंज गलियों में घनश्याम के विराजमान होने का भाव कृष्ण की बाल एवं रासलीला से जुड़े वृन्दावन की धार्मिक मान्यताओं को सामने लाता है। इसके बाद बंसीवट और यमुना तट का उल्लेख आता है, जो ब्रज की कृष्ण-भक्ति परंपरा में विशेष महत्व रखने वाले स्थान हैं। यहां “राधे-राधे” गाने और श्याम के दर्शन पाने की इच्छा भक्त की गहरी कृष्ण-प्रेम भावना को दर्शाती है।
इसके बाद भजन की यात्रा गोवर्धन धाम की ओर बढ़ती है। भक्त गोवर्धन की परिक्रमा करने और उसके चारों ओर श्रद्धा से चलने की बात करता है। साथ ही राधाकुंड, श्यामकुंड और मानसी गंगा का उल्लेख किया गया है। ये सभी ब्रज की कृष्ण-भक्ति परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण तीर्थ माने जाते हैं। इन स्थानों का नाम लेकर भजन केवल यात्रा का वर्णन नहीं करता, बल्कि भक्त को ब्रज की अलग-अलग आध्यात्मिक स्मृतियों और श्रीराधा-कृष्ण की भक्ति से जोड़ता है।
अगले अंतरे में भक्त बरसाना धाम पहुंचता है और श्रीराधा जी के चरणों में प्रणाम करने की भावना व्यक्त करता है। बरसाना को राधा जी की नगरी के रूप में श्रद्धा से देखा जाता है। इसके बाद नंदगांव का उल्लेख आता है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण के बाल जीवन और नंद बाबा के परिवार से जोड़ा जाता है। “वहां राधे राधे गाएंगे और श्याम के हम हो जाएंगे” पंक्ति भक्त के पूर्ण समर्पण को व्यक्त करती है, जिसमें भक्त स्वयं को राधा-कृष्ण की भक्ति में समर्पित करना चाहता है।
इस भजन का मुख्य भाव ब्रज यात्रा, राधा-कृष्ण प्रेम, नाम-संकीर्तन, दर्शन की लालसा और धाम के प्रति श्रद्धा है। इसमें वृन्दावन से लेकर गोवर्धन, राधाकुंड, श्यामकुंड, मानसी गंगा, बरसाना और नंदगांव तक की यात्रा को भक्ति के क्रम में प्रस्तुत किया गया है। इसलिए इसे केवल सामान्य कृष्ण भजन के बजाय वृन्दावन एवं ब्रज धाम की आध्यात्मिक यात्रा का भजन भी कहा जा सकता है।