हनुमान अंश - Part 2 ।। ओ बाबा नीम करोली ।।
।। हनुमान अंश - पार्ट 2 का नया भजन ।।
सीधा साधा भोला भाला, छोटा सा एक बालक,
सीधा साधा भोला भाला, छोटा सा एक बालक,
जाने कैसे बन गया वो, राम जी का साधक,
जाने कैसे बन गया वो, राम जी का साधक,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
भूखे को भोजन वो देता, मन की बाते पढ़ लेता,
भूखे को भोजन वो देता, मन की बाते पढ़ लेता,
जो भी जाए उसके शरण में, संकट उसका हर लेता,
जो भी जाए उसके शरण में, संकट उसका हर लेता,
लीला उसकी बड़ी निराली, लीला उसकी बड़ी निराली,
और महिमा है अपरम्पार,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
ना पैसे का मोह उसको, ना धन की कोई चाह,
ना पैसे का मोह उसको, ना धन की कोई चाह,
एक हाथ में ले के कमण्डल, चल दिया धर्म की राह,
एक हाथ में ले के कमण्डल, चल दिया धर्म की राह,
राम को दिल में बसा लिया, राम को दिल में बसा लिया,
और छोड़ दिया घर बार,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
ना किसी से कोई रिश्ता, ना किसी से नाता,
ना किसी से कोई रिश्ता, ना किसी से नाता,
राम जी से जोड़ा उसने, जनम जनम का नाता,
राम जी से जोड़ा उसने, जनम जनम का नाता,
राम ही उसके स्वामी है, राम ही उसके स्वामी है,
और राम ही भाग्य विधाता,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
हनुमान सी भक्ति उसकी, वो तो हनुमान का अंश,
हनुमान सी भक्ति उसकी, वो तो हनुमान का अंश,
उसके दिल में बसा हुआ है, सीता राम का अंश,
उसके दिल में बसा हुआ है, सीता राम का अंश,
राम का वो तो सच्चा सेवक, राम का वो तो सच्चा सेवक,
और राम का परम भक्त,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
Lyrics by - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : राम भजन
हनुमान अंश - Part 2 का नया भजन ।। ओ बाबा नीम करोली ।। #hanumanansh #neemkarolibaba #hanuman #ram
यह “हनुमान अंश - Part 2 | ओ बाबा नीम करोली” एक भावपूर्ण राम भजन है, जिसमें बाबा नीम करोली को श्रीराम के परम भक्त और हनुमान जी की भक्ति से जुड़े संत स्वरूप में श्रद्धापूर्वक प्रस्तुत किया गया है। भजन में उनके सरल, भोले और त्यागपूर्ण जीवन का वर्णन करते हुए बताया गया है कि किस प्रकार एक साधारण बालक आगे चलकर श्रीराम की भक्ति में पूरी तरह समर्पित हो गया। बार-बार “ओ बाबा नीम करोली” का जाप उनके प्रति भक्तों की श्रद्धा और प्रेम को प्रकट करता है।
इस भजन का मुख्य भाव श्रीराम भक्ति, त्याग, सेवा, संत-श्रद्धा और पूर्ण समर्पण का है। गीत में बाबा के बारे में कहा गया है कि वे भूखे लोगों को भोजन देते थे और भक्तों के मन की बात समझ लेते थे। जो व्यक्ति उनकी शरण में आता था, उसके संकट दूर होने की भक्तिपरक भावना भी इसमें व्यक्त की गई है। “लीला उसकी बड़ी निराली, और महिमा है अपरम्पार” जैसी पंक्तियां बाबा के प्रति भक्तों की गहरी आस्था को दर्शाती हैं।
भजन के अगले हिस्से में त्याग और वैराग्य को विशेष महत्व दिया गया है। बाबा को धन और पैसे के मोह से दूर बताया गया है तथा कमंडल लेकर धर्म और आध्यात्मिकता की राह पर चलने का चित्र प्रस्तुत किया गया है। “राम को दिल में बसा लिया और छोड़ दिया घर-बार” जैसी पंक्तियां यह भाव व्यक्त करती हैं कि उनके लिए सांसारिक मोह से अधिक महत्वपूर्ण श्रीराम की भक्ति थी। इस तरह भजन बाबा के जीवन को त्याग और प्रभु-समर्पण की प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत करता है।
आगे गीत में बाबा के श्रीराम के साथ आध्यात्मिक संबंध को बहुत गहरे भाव में बताया गया है। “राम जी से जोड़ा उसने जनम-जनम का नाता” और “राम ही उसके स्वामी हैं” जैसी पंक्तियां भक्त और भगवान के बीच पूर्ण समर्पण का भाव दिखाती हैं। अंतिम अंतरे में उनकी भक्ति को हनुमान जी की भक्ति के समान बताया गया है और उनके हृदय में सीता-राम के निवास की बात कही गई है। यहां “हनुमान का अंश” बाबा के प्रति प्रचलित भक्तिपरक मान्यता के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि स्वतंत्र रूप से प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य के रूप में।
इस भजन के साथ “Lyrics by - Jay Prakash Verma, Indore” स्पष्ट रूप से दिया गया है, इसलिए उपलब्ध विवरण के अनुसार Jay Prakash Verma, Indore को इसके गीतकार के रूप में श्रेय दिया गया है। कुल मिलाकर यह भजन बाबा नीम करोली के प्रति श्रद्धा, श्रीराम के प्रति उनकी भक्ति, त्याग, सेवा और हनुमान जी जैसी समर्पित भक्ति को सरल और भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करता है। इसे राम भक्ति, हनुमान भक्ति तथा नीम करोली बाबा से जुड़े आध्यात्मिक आयोजनों में विशेष भाव के साथ सुना जा सकता है।