पूनम का चंद्रमा पूनम की चांदनी
पूनम का चन्द्रमा, पूनम की चांदनी,
लग रही है रात देखो, आज मन भावनी,
ये आज चंदा को, क्या हो गया है,
ये आज तारो को, क्या हो गया है,
ये आज चंदा को, क्या हो गया है,
ये आज तारो को, क्या हो गया है,
कितनी सुन्दर, कितनी प्यारी, लगे आज चांदनी,
कितनी सुन्दर, कितनी प्यारी, लगे आज चांदनी,
पूनम का चन्द्रमा, पूनम की चांदनी,
लग रही है रात देखो, आज मन भावनी,
धुन मुरली पे, श्याम ने बजायी,
देखो राधा जी, दोड़ी दोड़ी आयी,
धुन मुरली पे, श्याम ने बजायी,
देखो राधा जी, दोड़ी दोड़ी आयी,
कितनी सुन्दर, कितनी प्यारी, लगे आज रागिनी,
कितनी सुन्दर, कितनी प्यारी, लगे आज रागिनी,
पूनम का चन्द्रमा, पूनम की चांदनी,
लग रही है रात देखो, आज मन भावनी,
आज कान्हा ने रचा, महारास है,
सारी गोपिया भी, उनके साथ है,
आज कान्हा ने रचा, महारास है,
सारी गोपिया भी, उनके साथ है,
कितनी सुन्दर, कितनी प्यारी, लगे रात सुहानी,
कितनी सुन्दर, कितनी प्यारी, लगे रात सुहानी,
पूनम का चन्द्रमा, पूनम की चांदनी,
लग रही है रात देखो, आज मन भावनी,
Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : कृष्ण भजन
शरद पूर्णिमा महारास भजन 2026 ।। पूनम का चंद्रमा पूनम की चांदनी ।। #sharadpurnima #radhekrishna
पूनम का चंद्रमा, पूनम की चांदनी एक सुंदर और मधुर श्रीकृष्ण भजन है, जिसमें शरद पूर्णिमा की मनमोहक रात, चंद्रमा की शीतल चांदनी और राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का अद्भुत वर्णन किया गया है। इस भजन के बोल मन में भक्ति, प्रेम और आनंद की अनुभूति जगाते हैं। पूर्णिमा की सुंदर रात में जब चारों ओर चांदनी बिखरी होती है, तब ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति स्वयं श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन हो गई हो।
इस भजन के रचयिता एवं श्रेय: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस भजन के साथ गीतकार के रूप में जय प्रकाश वर्मा, इंदौर का नाम दिया गया है। भजन में शरद पूर्णिमा की रात को आधार बनाकर भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक लीलाओं का भावपूर्ण चित्रण किया गया है।
भजन का आध्यात्मिक भाव: भजन की शुरुआती पंक्तियों में पूनम के चंद्रमा और चांदनी से सजी रात की सुंदरता का वर्णन है। चंद्रमा और तारों की खूबसूरती को देखकर मन आनंदित हो उठता है। यह दृश्य केवल प्रकृति की सुंदरता नहीं, बल्कि उस दिव्य वातावरण का प्रतीक है, जिसमें भक्त अपने आराध्य श्रीकृष्ण का स्मरण करके आत्मिक शांति और प्रेम का अनुभव करता है।
श्रीकृष्ण की मुरली और राधा रानी का प्रेम: भजन में आगे भगवान श्रीकृष्ण की मधुर मुरली की धुन का वर्णन किया गया है। जब कान्हा अपनी बांसुरी बजाते हैं, तो उसकी मधुर तान सुनकर राधा रानी दौड़ी चली आती हैं। यह प्रसंग राधा-कृष्ण के निश्छल प्रेम, समर्पण और दिव्य आकर्षण को दर्शाता है। मुरली की धुन भक्त और भगवान के बीच प्रेमपूर्ण संबंध का भी प्रतीक है।
शरद पूर्णिमा की महारास लीला: इस भजन का सबसे मनमोहक प्रसंग भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रचाए गए महारास का है। मान्यता और कृष्ण भक्ति परंपरा के अनुसार, शरद पूर्णिमा की पावन रात में श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ दिव्य महारास लीला की थी। यह लीला भगवान के प्रति गोपियों के अनन्य प्रेम, पूर्ण समर्पण और आध्यात्मिक आनंद को प्रकट करती है। भजन के मधुर शब्द इस दिव्य प्रसंग की सुंदरता को मन में सजीव कर देते हैं।
Radhe Radhe Sir Ji.
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