जिस पथ पे चला उस पथ पे मुझे आँचल
जिस पथ पे चला,
उस पथ पे मुझे,
आँचल तो बिछाने दे,
साथी ना समझ,
कोई बात नहीं,
मुझे साथ तो आने दे ।।
थक जायेगा जब राहों में,
बाहों का सिरहाना दूँगी,
तेरे सुने सुने जीवन में,
मैं प्यार का रंग भर दूँगी,
मुझे तेरे कदम,
नहीं बिंदीया से कम,
माथे पे सजाने दे ।।
जीवन की डगर पे तुझ को,
साथी की ज़रूरत होगी,
दिया कैसे जलेगा अकेले,
बाती की ज़रूरत होगी,
मैं बनूँगी पिया,
तेरे पथ का दिया,
दिया पथ में जलाने दे ।।
जिस पथ पे चला,
उस पथ पे मुझे,
आँचल तो बिछाने दे,
साथी ना समझ,
कोई बात नहीं,
मुझे साथ तो आने दे ।।
श्रेणी : कृष्ण भजन
जिस पथ पे चला उस पथ पे मुझे आँचल तो बिछाने दे | 16.12.2021 | रोहिणी दिल्ली | पूनम दीदी | @Bansuri
यह भजन "जिस पथ पे चला" एक सुंदर और भावनात्मक अभिव्यक्ति है, जिसमें प्रेम और साथ चलने की महत्वपूर्णता को दर्शाया गया है। इसमें एक साथी से यह निवेदन किया गया है कि वे जीवन की यात्रा में साथ चलें और पथ के संघर्षों को साझा करें। भजन की प्रत्येक पंक्ति में प्रेम, समर्थन, और विश्वास का संदेश है, जो एक मजबूत और स्थिर रिश्ते की आवश्यकता को महसूस कराता है।
इस भजन में यह भी कहा गया है कि जीवन की कठिन राहों पर एक दूसरे का सहारा बनकर ही हम उस पथ को साकार कर सकते हैं। जब जीवन की राह में कठिनाइयाँ आएं, तो हम एक दूसरे के सहारे ही आगे बढ़ सकते हैं। यह भजन न केवल प्रेम के बारे में है, बल्कि यह एक गहरी समझ और साथी के लिए भावनाओं को भी व्यक्त करता है।