जगदम्बा हमरे घर मे पधार रहीं रे
जगदम्बा हमरे घर में पधार रहीं रे....
मुतियन चौक में द्वारे पुराऊं,
मल मल आसन सजाये दइयों रे,
जगदम्बा हमरे घर में पधार रहीं रे...
गंगा जल से चरण पखारुं,
चरणन फूल चढ़ाए दइयों रे,
जगदम्बा हमरे घर में पधार रहीं रे...
कंचन थार कपूर की बाती,
मैया की आरती उतार दइयों रे,
जगदम्बा हमरे घर में पधार रहीं रे....
हलुआ पूरी खीर बताशा,
मैया को भोग लगाएं दइयों रे,
जगदम्बा हमरे घर में पधार रहीं रे....
पान सुपाड़ी ध्वजा नारियल,
"राजेंद्र" भेंट चढ़ाए दइयों रे,
जगदम्बा हमरे घर में पधार रहीं रे....
श्रेणी : दुर्गा भजन
जगदम्बा हमरे घर में पधार रहीं रे।।माता जी के भजन,देवी गीत,दुर्गा पूजा,नवरात्रे स्पेशल,दुर्गा चालीसा
“जगदम्बा हमरे घर में पधार रहीं रे” माता रानी का एक सुंदर और भावपूर्ण भजन है, जिसमें भक्त माँ जगदम्बा के अपने घर पधारने की खुशी और उनके स्वागत की तैयारियों का वर्णन करता है। इस भजन में भक्त अपने घर के द्वार पर मोतियों का चौक सजाता है, माँ के बैठने के लिए सुंदर आसन तैयार करता है और गंगाजल से उनके पावन चरणों को धोकर फूल अर्पित करता है। भक्त सोने की थाली में कपूर की बाती जलाकर माता रानी की आरती उतारता है और हलुआ, पूरी, खीर व बताशे का भोग लगाकर अपनी श्रद्धा प्रकट करता है। भजन की प्रत्येक पंक्ति में माँ के प्रति प्रेम, सम्मान और समर्पण का भाव दिखाई देता है। 🌹🙏
इस भजन का गहरा आध्यात्मिक संदेश यह है कि माँ जगदम्बा का स्वागत केवल घर को सजाकर ही नहीं, बल्कि अपने मन को पवित्र बनाकर और हृदय में सच्ची श्रद्धा जगाकर भी करना चाहिए। जब भक्त प्रेम और विश्वास के साथ माँ को याद करता है, तो उसका मन भक्ति और सकारात्मकता से भर जाता है। माँ के चरणों में ध्वजा, नारियल, पान-सुपारी और अन्य भेंट अर्पित करना भक्त की आस्था और समर्पण का प्रतीक है। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति दिखावे में नहीं, बल्कि मन की पवित्रता, प्रेम और विश्वास में होती है। आइए, हम सब मिलकर माँ जगदम्बा का अपने घर और हृदय में स्वागत करें और प्रार्थना करें कि माता रानी सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखें। जय माता दी! 🙏🌺