माँ का ध्यान लगाओ
माँ का ध्यान लगाओ,
सब संकट मिट जाएंगे,
तुम माँ का ध्यान लगाओ,
सब संकट मिट जाएंगे,
चरणों में शीश झुकाओ,
चरणों में शीश झुकाओ,
ओ सब संकट मिट जाएंगे,
माँ का ध्यान लगाओ.....
मन ही मन में माँ के नाम का,
सुमिरन करते रहना,
सब कष्टो को दूर करो माँ,
हाथ जोड़ कर कहना,
तुम मन से अर्जी लगाओ,
तुम मन से अर्जी लगाओ,
ओ सब संकट मिट जाएंगे,
माँ का ध्यान लगाओ.....
शक्तिशाली नाम मैया का,
मन शीतल कर देता,
खाली झोली पल भर में ही,
खुशियों से भर देता,
तुम जय माँ जय माँ बुलाओ,
तुम जय माँ जय माँ बुलाओ,
ओ सब संकट मिट जाएंगे,
माँ का ध्यान लगाओ.....
अंग संग रहती अम्बे मैया,
करती सबके काम है,
जिन आंखों में बहते आंसू,
करती वो मुस्कान है,
तुम सच्ची ज्योत जगाओ,
तुम सच्ची ज्योत जगाओ,
ओ सब संकट मिट जाएंगे,
माँ का ध्यान लगाओ.....
सच्चे मन से की गई विनती,
करती माँ स्वीकार है,
सब भक्तो का शेरोंवाली,
करती बेड़ा पार है,
नित माँ की महिमा गाओ,
नित माँ की महिमा गाओ,
ओ सब संकट मिट जाएंगे,
माँ का ध्यान लगाओ.....
श्रेणी : दुर्गा भजन
यह “माँ का ध्यान लगाओ” एक सरल और भावपूर्ण दुर्गा भजन है, जिसमें भक्तों को मां अम्बे का ध्यान करने, उनके नाम का सुमिरन करने और उनके चरणों में श्रद्धापूर्वक शीश झुकाने का संदेश दिया गया है। भजन की मुख्य भावना यह है कि कठिन समय में मनुष्य को घबराने के बजाय माता का स्मरण करना चाहिए और विश्वास के साथ अपनी प्रार्थना उनके सामने रखनी चाहिए।
इस भजन का मुख्य भाव श्रद्धा, विश्वास, शरणागति और माता के नाम की महिमा का है। बार-बार “माँ का ध्यान लगाओ” कहकर भक्तों को यह प्रेरणा दी गई है कि माता का ध्यान और नाम-स्मरण मन को सहारा और शांति प्रदान कर सकता है। “चरणों में शीश झुकाओ” के माध्यम से भक्त अपने अहंकार को छोड़कर मां के प्रति विनम्रता और समर्पण की भावना व्यक्त करता है।
भजन में मां के नाम के सुमिरन और मन की प्रार्थना को विशेष महत्व दिया गया है। भक्त से कहा गया है कि वह मन ही मन माता का नाम लेता रहे और अपने कष्टों को दूर करने के लिए हाथ जोड़कर उनसे अर्जी करे। यहां “अर्जी” भक्त और माता के बीच उस आत्मीय संवाद का प्रतीक है, जिसमें भक्त अपने मन की बात बिना किसी संकोच के मां के सामने रखता है।
आगे मां के नाम को मन को शीतल करने वाली शक्ति के रूप में बताया गया है। “खाली झोली” का भाव भक्त की इच्छाओं और उम्मीदों का प्रतीक है, जिसे वह माता की कृपा और आशीर्वाद से भरने की कामना करता है। साथ ही “जय मां, जय मां” का जाप भजन में सामूहिक भक्ति और उत्साह का वातावरण बनाता है। यह संदेश दिया गया है कि माता का स्मरण भक्त के भीतर आशा और सकारात्मकता बनाए रख सकता है।
भजन में मां अम्बे को हर समय अपने भक्तों के साथ रहने वाली और दुखों को मुस्कान में बदलने वाली मां के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जिन आंखों में आंसू हैं, उनमें मुस्कान लाने का भाव माता की करुणामयी छवि को सामने लाता है। “सच्ची ज्योत जगाओ” के माध्यम से भक्त को श्रद्धा और विश्वास के साथ माता की आराधना करने की प्रेरणा दी गई है।