ऊँचे ऊँचे पहाड़ो वाली मेरी मैया
ऊँचे ऊँचे पहाड़ो वाली मेरी मैया शेरोवाली,
आजा करके सिंह रुत आई नवरातो वाली ही,
गूंज रही जय कारी सजी है माँ की द्वारी,
भक्त दिल से तुझे पुकारे,
आजा करके सिंह रुत आई नवरातो वाली....
पहली हो माता शैलपुतरी पर्वत हिमालय की बेटी है,
ब्रह्मचारणी दूजी हो माता शांतिरुपनि बैठी है,
चन्द्रघण्टा के नेत्रों वाली तेरे दर्शन को आये सवाली,
आस दर्शन की है मन में भारी,
आजा करके सिंह रुत आई नवरातो वाली.....
भरमांड की निर्माता है खुश्मांड़ा माता,
अग्नि की जो देवी है रूप स्कन्द माता,
अपने भक्तो की है हितकारी तुझे पूजे है दुनिया सारी,
आजा करके सिंह रुत आई नवरातो वाली.....
कात्यानी माँ दुर्गा रूप में भक्तो को वर देती है,
काल रात्रि रूप भयंकर पार्वती माँ गोरी है,
सिद्धिदात्री माँ ज्ञान की देवी,
तेरे दर्शन को आये सवाली पल में भर्ती झोली खाली,
आजा करके सिंह रुत आई नवरातो वाली.....
श्रेणी : दुर्गा भजन
Unche Unche Pahado Wali || Rupali Kusumkar - 9300769949 || Navratri Special - Lord Durga -Video Song
यह “ऊँचे ऊँचे पहाड़ों वाली मेरी मैया” एक भक्तिमय दुर्गा भजन और नवरात्रि विशेष माता रानी का भजन है। इसमें मां शेरावाली को ऊंचे पर्वतों पर विराजमान देवी के रूप में स्मरण किया गया है और भक्त उन्हें सिंह पर सवार होकर नवरात्रि के पावन अवसर पर आने के लिए पुकारते हैं। भजन में माता के दरबार की सजावट, जयकारों की गूंज और भक्तों की दर्शन की लालसा का सुंदर चित्रण मिलता है।
इस भजन का मुख्य भाव श्रद्धा, दर्शन की लालसा, माता की महिमा और भक्तों के प्रति उनकी कृपा का है। भक्त दिल से मां को पुकारते हुए कहता है कि नवरात्रि का पावन समय आ गया है और माता अपने भक्तों को दर्शन देने आएं। “गूंज रही जयकारी, सजी है मां की द्वारी” जैसी पंक्तियां नवरात्रि के दौरान माता के मंदिरों और दरबारों में दिखाई देने वाले भक्तिमय वातावरण को दर्शाती हैं।
भजन की खास बात यह है कि इसमें नवदुर्गा के स्वरूपों का क्रम से वर्णन किया गया है। सबसे पहले शैलपुत्री माता को हिमालय की पुत्री बताया गया है, फिर ब्रह्मचारिणी और चंद्रघंटा माता का स्मरण आता है। आगे कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री के स्वरूपों का उल्लेख किया गया है। इस प्रकार गीत नवरात्रि के नौ दिनों में पूजे जाने वाले देवी के नौ रूपों को भक्तिभाव से एक साथ प्रस्तुत करता है।
भजन में प्रत्येक देवी स्वरूप के साथ उनकी किसी विशेष शक्ति या गुण को जोड़ा गया है। कुष्मांडा को सृष्टि की रचना से, स्कंदमाता को भक्तों के हित से, कात्यायनी को वर प्रदान करने से, कालरात्रि को उग्र शक्ति से और सिद्धिदात्री को ज्ञान तथा सिद्धि से जोड़ा गया है। इन वर्णनों के माध्यम से भक्त मां के विभिन्न रूपों में एक ही दिव्य शक्ति का दर्शन करता है और उनके चरणों में अपनी मनोकामना लेकर पहुंचता है।
अंतिम पंक्तियों में “दर्शन को आये सवाली” और “झोली भरने” की भावना दिखाई देती है। भक्त स्वयं को माता के सामने याचक मानकर उनके दर्शन और कृपा की इच्छा रखता है। यह भाव नवरात्रि की भक्ति परंपरा में बहुत महत्वपूर्ण है, जहां भक्त माता के दरबार में अपनी श्रद्धा, प्रार्थना और मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं।