मै नाचूं तेरे अंगना में, Odh Chunariya Laal Mai Naachu Tere Angana Mein

मै नाचूं तेरे अंगना में



ओढ़ चुनरिया लाल मै नाचूं तेरे अंगना में,
मैं नाचूं तेरे अंगना में, मैं नाचूं तेरे अंगना में,
ओढ़ चुनरिया लाल मै नाचूं तेरे अंगना में....

पांव में अपने बांध के घुंघरू, आठों पहर तेरे नाम को सिमरु,
और बजाओ खड़ताल मैं नाचूं तेरे अंगना में,
ओढ़ चुनरिया लाल मै नाचूं तेरे अंगना में....

बिन तेरे मुंह में कुछ नहीं भावे व्याकुल मनवा चैन ना पाव,
मेरे भी संकट काट मैं नाचूं तेरे अंगना में,
ओढ़ चुनरिया लाल मै नाचूं तेरे अंगना में....

चरणों में तेरे शीश झुकाऊं जी भर के मैं दर्शन पाऊ,
कर दो बेड़ा पार मैं नाचूं तेरे अंगना में,
ओढ़ चुनरिया लाल मै नाचूं तेरे अंगना में....

ज्योति कलश और दीपक जागे प्रेम सुधा बरसा दो आके,
आज हो जाओ मां दयाल मैं नाचूं तेरे अंगना में,
ओढ़ चुनरिया लाल मै नाचूं तेरे अंगना में....



श्रेणी : दुर्गा भजन


Odh Chunariya Laal

यह भजन माँ दुर्गा (माता रानी) के प्रति प्रेम, उत्साह और पूर्ण समर्पण की भावना को दर्शाता है। “ओढ़ चुनरिया लाल मैं नाचूं तेरे अंगना में” एक लोकप्रिय दुर्गा भजन शैली का गीत है, जिसे अक्सर जागरण, माता की चौकी और नवरात्रि जैसे अवसरों पर बड़े उत्साह से गाया और प्रस्तुत किया जाता है। इसके रचयिता के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती, इसलिए इसे लोक-भक्ति परंपरा का हिस्सा माना जाता है।

इस भजन का मुख्य भाव “आनंदमयी भक्ति (उल्लास और समर्पण)” है। इसमें भक्त माँ के दरबार में नृत्य करके अपनी भक्ति व्यक्त करना चाहता है—लाल चुनरिया ओढ़ना माँ के प्रति श्रद्धा, पवित्रता और समर्पण का प्रतीक है। “पांव में घुंघरू बांध के आठों पहर तेरे नाम को सिमरु” पंक्ति यह दर्शाती है कि भक्त हर पल माँ का स्मरण करते हुए अपनी भक्ति को नृत्य और संगीत के माध्यम से प्रकट करता है।

भजन में भक्त की व्याकुलता भी झलकती है—“बिन तेरे मुंह में कुछ नहीं भावे, व्याकुल मनवा चैन ना पाव” यानी माँ के बिना जीवन अधूरा लगता है। साथ ही, वह अपने दुखों को दूर करने और जीवन की नैया पार लगाने की प्रार्थना करता है—“कर दो बेड़ा पार”।

अंत में “ज्योति कलश और दीपक जागे, प्रेम सुधा बरसा दो आके” पंक्तियाँ भक्ति के पवित्र वातावरण और देवी की कृपा की वर्षा का सुंदर चित्र प्रस्तुत करती हैं, जहाँ भक्त माँ से दया और आशीर्वाद की याचना करता है।

कुल मिलाकर, यह भजन नृत्य, संगीत और भावनाओं के माध्यम से माँ दुर्गा के प्रति प्रेम, आनंद और पूर्ण समर्पण को व्यक्त करता है, और भक्त को भक्ति में डूबकर देवी की कृपा पाने की प्रेरणा देता है।

Harshit Jain

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