आओ म्हारी और मैया आओ म्हारी और
रथोड़ा मोड लो माजीसा थारो भगता की और,
टाबरिया बुलावे मैया आओ म्हारी और,
आओ म्हारी और मैया आओ म्हारी और....
मैं कदसू अर्जी किनी थे नहीं सुनिया माजीसा,
कोई अर्जी पढ़कर मैया कर लो थोड़ा गौर,
टाबरिया बुलावे मैया आओ म्हारी और....
खींच लो नकेल थारे रथड़ा री माजीसा,
ढीली छोढयां माता थाने ले जासी कठे और,
टाबरिया बुलावे मैया आओ म्हारी और....
दास केवै यो प्रेम को नातो,
कोई प्रीत के बंधन की माता कसके बांधी डोर,
टाबरिया बुलावे मैया आओ म्हारी और....
श्रेणी : दुर्गा भजन
Rathdo Mod Do by Uma Sharma Chittoragh.
यह “आओ म्हारी और मैया आओ म्हारी और” एक भावपूर्ण दुर्गा भजन है, जिसमें भक्त माता से अपने भक्तों और बच्चों की ओर आने की विनती करता है। भजन की भाषा में राजस्थानी लोकभाषा की मिठास दिखाई देती है और इसमें माता को प्रेम से “माजीसा” और “मैया” कहकर पुकारा गया है। भक्त माता से अपने रथ का रुख भक्तों की ओर करने और उनकी पुकार सुनने की प्रार्थना करता है।
इस भजन का मुख्य भाव प्रेम, विनती, ममता और माता के प्रति अटूट विश्वास का है। “टाबरिया बुलावे मैया” में टाबरिया अर्थात माता के बच्चे अपने स्नेह और अधिकार के साथ उन्हें अपने पास बुला रहे हैं। भक्त कई बार अपनी अर्जी माता के सामने रख चुका है, फिर भी उसका विश्वास कम नहीं हुआ है। वह माता से आग्रह करता है कि उसकी प्रार्थना पर थोड़ा गौर करें और अपने भक्तों की ओर कृपा करके आएं।
भजन में माता के रथ को भक्तों की ओर मोड़ने की सुंदर लोक-भक्ति कल्पना की गई है। “खींच लो नकेल थारे रथड़ा री” जैसी पंक्तियां भक्त की व्याकुलता और माता को अपने पास बुलाने की तीव्र इच्छा को दर्शाती हैं। यहां माता को दूर रहने वाली शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि अपने बच्चों की पुकार सुनने वाली स्नेहमयी मां के रूप में संबोधित किया गया है।
अंत में भजन का भाव और भी गहरा हो जाता है, जब भक्त कहता है कि माता और दास के बीच प्रेम का नाता और प्रीत की डोर बंधी हुई है। यह डोर सांसारिक संबंधों से अलग भक्ति और श्रद्धा का संबंध है, जिसमें भक्त स्वयं को माता का दास और माता को अपना सहारा मानता है। इसी प्रेम के कारण वह विश्वास करता है कि उसकी पुकार माता तक अवश्य पहुंचेगी।