नवरात्रि में अम्बे माता नव रूप में आती है
नवरात्रि में अम्बे माता,
नव रूप में आती है,
सब रूपों में उनकी महिमा,
दुनिया सारी गाती है....
प्रथम रूप शैलपुत्री माता,
हिम सुता कहलाती है,
नवरात्रि में अम्बे माता,
नव रूप में आती है....
द्वितीय है ब्रह्मचारिणी माता,
दुख सबके हर जाती है,
नवरात्रि में अम्बे माता,
नव रूप में आती है....
तृतीय रूप चंद्रघंटा माता,
जगत कल्याण को आती हैं,
नवरात्रि में अम्बे माता,
नव रूप में आती है....
चतुर्थ हैं कुष्मांडा माता,
भवसागर से पार लगाती है,
नवरात्रि में अम्बे माता,
नव रूप में आती है....
पंचम रूप स्कंदमाता,
जग आलोकित कर जाती हैं,
नवरात्रि में अम्बे माता,
नव रूप में आती है....
षष्ठम है कात्यानी माता,
राजीव सुलोचना वर दे जाती हैं,
नवरात्रि में अम्बे माता,
नव रूप में आती है....
सप्तम रूप कालरात्रि माता,
दुष्ट दलन को आती हैं,
नवरात्रि में अम्बे माता,
नव रूप में आती है....
अष्टम है महागौरी माता,
सुख समृद्धि बरसाती हैं,
नवरात्रि में अम्बे माता,
नव रूप में आती है....
नवम रूप सिद्धिदात्री माता,
साधना सिद्ध कर जाती हैं,
नवरात्रि में अम्बे माता,
नव रूप में आती है,
सब रूपों में उनकी महिमा,
दुनिया सारी गाती है,
सब रूपों में उनकी महिमा,
दुनिया सारी गाती है....
श्रेणी : दुर्गा भजन
यह “नवरात्रि में अम्बे माता नव रूप में आती है” एक भक्तिमय दुर्गा भजन है, जिसमें नवरात्रि के दौरान पूजी जाने वाली मां दुर्गा के नौ स्वरूपों यानी नवदुर्गा की महिमा का वर्णन किया गया है। भजन की शुरुआत इस भाव से होती है कि नवरात्रि के पावन दिनों में अम्बे माता अपने नौ अलग-अलग स्वरूपों में भक्तों के बीच विराजमान होती हैं और संसार उनकी महिमा का गुणगान करता है। इसलिए यह भजन नवरात्रि के धार्मिक वातावरण और मां भगवती की आराधना के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।
इस भजन का मुख्य भाव माता की महिमा, श्रद्धा, शक्ति और भक्तों के कल्याण का है। इसमें नवदुर्गा के प्रत्येक स्वरूप का क्रम से नाम लेकर उनकी विशेषता बताई गई है। सबसे पहले शैलपुत्री माता, फिर ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री का वर्णन आता है। इस क्रम के कारण भजन सुनने वाला व्यक्ति नवरात्रि के नौ दिनों और देवी के नौ स्वरूपों को आसानी से समझ और स्मरण कर सकता है।
भजन में शैलपुत्री माता को हिमसुता के रूप में बताया गया है और ब्रह्मचारिणी माता को दुखों को दूर करने वाली शक्ति के रूप में याद किया गया है। चंद्रघंटा माता को जगत के कल्याण से जोड़ा गया है, जबकि कुष्मांडा माता को भवसागर से पार लगाने वाली देवी कहा गया है। इस तरह प्रत्येक स्वरूप के साथ देवी की किसी विशेष शक्ति या कृपा का भक्तिपूर्ण उल्लेख किया गया है।
आगे स्कंदमाता, कात्यायनी और कालरात्रि के स्वरूपों का वर्णन मिलता है। स्कंदमाता को जगत को आलोकित करने वाली, कात्यायनी माता को वर प्रदान करने वाली और कालरात्रि माता को दुष्टों के संहार से जुड़ी शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसके बाद महागौरी माता को सुख-समृद्धि प्रदान करने वाली तथा सिद्धिदात्री माता को साधना सिद्ध करने वाली देवी के रूप में स्मरण किया गया है। इस प्रकार भजन में नवदुर्गा के नौ स्वरूपों को एक साथ श्रद्धा के साथ नमन किया गया है।
इस भजन की खासियत यह है कि इसके बोल सरल और स्मरण करने में आसान हैं। हर अंतरे के बाद “नवरात्रि में अम्बे माता, नव रूप में आती है” की पुनरावृत्ति भजन के मुख्य भाव को मजबूत करती है और सामूहिक भजन, माता की चौकी, जागरण तथा नवरात्रि के धार्मिक आयोजनों के लिए इसे उपयुक्त बनाती है। कुल मिलाकर यह भजन नवदुर्गा के नौ स्वरूपों की महिमा, माता की शक्ति और भक्तों के प्रति उनकी कृपा का सरल एवं भक्तिमय वर्णन प्रस्तुत करता है। उपलब्ध बोलों में रचनाकार या गीतकार का नाम नहीं दिया गया है, इसलिए किसी व्यक्ति को इसका लेखक बताना उचित नहीं होगा।