दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया ।
राम एक देवता, पुजारी सारी दुनिया ॥
द्वारे पे उसके जाके कोई भी पुकारता,
परम कृपा दे अपनी भव से उभारता ।
ऐसे दीनानाथ पे बलिहारी सारी दुनिया,
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया ॥
दो दिन का जीवन प्राणी कर ले विचार तू,
प्यारे प्रभु को अपने मन में निहार तू ।
बिना हरी नाम के दुखिआरी सारी दुनिया,
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया ॥
नाम का प्रकाश जब अंदर जगायेगा,
प्यारे श्री राम का तू दर्शन पायेगा ।
ज्योति से जिसकी है उजयारी सारी दुनिया,
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया ॥
श्रेणी : राम भजन
यह “दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया” एक अत्यंत प्रेरणादायक और आध्यात्मिक श्रीराम भजन है, जिसमें भगवान श्री राम को समस्त संसार का एकमात्र दाता और पालनकर्ता बताया गया है। भजन का मूल संदेश यह है कि इस संसार में हर प्राणी किसी न किसी रूप में याचक है, जबकि सच्चा दाता केवल भगवान श्रीराम हैं। मनुष्य चाहे कितना भी धनवान, शक्तिशाली या प्रतिष्ठित क्यों न हो, अंततः वह ईश्वर की कृपा पर ही निर्भर रहता है। इसलिए भगवान के प्रति विनम्रता, श्रद्धा और विश्वास ही जीवन का सबसे बड़ा आधार है।
इस भजन का मुख्य भाव भक्ति, वैराग्य, आत्मचिंतन और ईश्वर पर पूर्ण विश्वास है। इसमें बताया गया है कि जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान श्रीराम के द्वार पर जाकर उन्हें पुकारता है, वे अपनी असीम कृपा से उसके दुखों को दूर करते हैं और उसे संसार रूपी भवसागर से पार लगाने का मार्ग दिखाते हैं। “परम कृपा दे अपनी भव से उभारता” जैसी पंक्ति भगवान श्रीराम की करुणा और भक्तवत्सल स्वभाव को प्रकट करती है। यही कारण है कि भजन में समस्त संसार को उनके प्रति कृतज्ञ और समर्पित बताया गया है।
भजन का दूसरा अंतरा मनुष्य को जीवन की क्षणभंगुरता का स्मरण कराता है। इसमें कहा गया है कि यह जीवन केवल कुछ दिनों का है, इसलिए सांसारिक मोह-माया में उलझने के बजाय अपने मन में भगवान श्रीराम का ध्यान करना चाहिए। “बिना हरि नाम के दुखियारी सारी दुनिया” का अर्थ है कि भगवान के नाम और भक्ति के बिना मनुष्य कभी वास्तविक शांति और संतोष प्राप्त नहीं कर सकता। धन, वैभव और भौतिक सुख क्षणिक हैं, जबकि भगवान का नाम ही स्थायी आनंद और आध्यात्मिक सुख प्रदान करता है।
अंतिम अंतरे में राम नाम की महिमा का सुंदर वर्णन किया गया है। भजन के अनुसार जब मनुष्य अपने भीतर भगवान के नाम का प्रकाश जगाता है, तब उसके जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर हो जाता है और उसे भगवान के दिव्य स्वरूप का अनुभव होने लगता है। “ज्योति से जिसकी है उजियारी सारी दुनिया” के माध्यम से भगवान श्रीराम को समस्त सृष्टि का प्रकाश और जीवन का वास्तविक मार्गदर्शक बताया गया है। यह संदेश देता है कि राम नाम केवल जपने का मंत्र नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम है।
यह भजन राम भक्ति परंपरा की प्रसिद्ध रचनाओं में से एक माना जाता है और वर्षों से भजन, सत्संग तथा धार्मिक आयोजनों में गाया जाता रहा है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसके मूल गीतकार या रचनाकार का प्रमाणित नाम स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है, इसलिए बिना विश्वसनीय प्रमाण के किसी व्यक्ति को इसका लेखक बताना उचित नहीं होगा। कुल मिलाकर, यह भजन सिखाता है कि संसार का वास्तविक दाता केवल भगवान श्रीराम हैं, मनुष्य को उनके नाम का स्मरण, उनकी शरण और उनकी कृपा पर विश्वास रखकर ही जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।