जय माता दी बोलोगे कभी जीवन में ना डोलोगे
जय माता दी बोलोगे कभी जीवन में ना डोलोगे,
बोल बोल के अम्बे रानी अपनी किस्मत खोलोगे,
जय माता दी....
जय माता दी गर तुम बोलोगे,
जीवन में कभी ना डोलोगे,
बोल बोल के माँ अम्बे रानी,
अपनी किस्मत खोलोगे,
जय माता दी गर तुम बोलोगे,
जीवन में कभी ना डोलोगे,
जय माता दी....
कोई कहे माँ वैष्णो देवी, कोई कहे माँ झंडेवाली,
रूप हैं उसके सारे ही सुन्दर शान है उसकी बड़ी निराली,
पा पा कर तुम प्यार मैया का,
पापों को अपने धोलोगे,
जय माता दी गर तुम बोलोगे,
जीवन में कभी ना डोलोगे,
जय माता दी....
चलो चलें अब दर मैया के, माँ का संदेसा आया है,
रस्ते कठिन हैं कट जाएंगे सब माँ की ही माया है,
कर कर के दीदार मैया का,
माँ के ही तुम तो हो लोगे,
जय माता दी गर तुम बोलोगे,
जीवन में कभी ना डोलोगे,
जय माता दी....
कहीं से भी जा कर माँ को पुकारो, दौड़ी दौड़ी वो चली आती है,
काम तुम्हारा होगा वो लेकिन मैया आकर कर जाती है,
जप जप के नाम मैया का,
कानो में रस घोलोगे,
जय माता दी गर तुम बोलोगे,
जीवन में कभी ना डोलोगे,
बोल बोल के माँ अम्बे रानी,
अपनी किस्मत खोलोगे,
जय माता दी गर तुम बोलोगे,
जीवन में कभी ना डोलोगे,
जय माता दी....
श्रेणी : दुर्गा भजन
Jai Mata Di | Maa Ambey Rani Latest Bhajan |जय माता दी गर तुम बोलोगे जीवन में कभी ना डोलोगे | Rampal
यह “जय माता दी बोलोगे कभी जीवन में ना डोलोगे” एक उत्साहपूर्ण दुर्गा भजन और माता रानी का जयकारा भजन है। इसमें भक्तों को मां अम्बे का नाम लेने, “जय माता दी” का जयकारा लगाने और माता के प्रति विश्वास बनाए रखने का संदेश दिया गया है। भजन की मुख्य पंक्ति में यह भावना व्यक्त होती है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से माता का नाम लेता है, वह कठिन परिस्थितियों में भी अपने विश्वास से विचलित नहीं होता।
इस भजन का मुख्य भाव श्रद्धा, विश्वास, उत्साह और माता के नाम की महिमा का है। “जय माता दी” को केवल एक जयकारे के रूप में नहीं, बल्कि भक्त के आत्मविश्वास और मां के प्रति भरोसे के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। “अपनी किस्मत खोलोगे” जैसी पंक्ति भक्त की उस आस्था को दर्शाती है कि माता की कृपा और नाम-स्मरण से जीवन की कठिनाइयों में आशा और सकारात्मकता मिलती है।
भजन में माता के विभिन्न प्रसिद्ध स्वरूपों का भी उल्लेख है। कहीं उन्हें मां वैष्णो देवी कहा गया है तो कहीं मां झंडेवाली, और साथ ही यह भाव रखा गया है कि माता के अनेक रूप हैं, लेकिन उनकी महिमा और शक्ति अद्भुत है। भक्त माता का प्रेम प्राप्त करके अपने जीवन के पापों को धोने और स्वयं को उनकी भक्ति में समर्पित करने की भावना व्यक्त करता है।
आगे भजन में माता के दरबार में जाने और उनके संदेश या बुलावे का सुंदर वर्णन मिलता है। रास्ते कठिन होने के बावजूद भक्त को विश्वास है कि मां की कृपा से सभी बाधाएं पार हो जाएंगी। माता के दर्शन को भक्त के जीवन का महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव माना गया है। “कर कर के दीदार मैया का, मां के ही तुम तो हो लोगे” में माता के दर्शन के बाद उनके प्रति और अधिक समर्पित हो जाने की भावना दिखाई देती है।
भजन का अंतिम भाग माता की करुणामयी और शीघ्र सहायता करने वाली मां के रूप को सामने लाता है। भक्त कहीं से भी मां को पुकारे, मां दौड़ी चली आती हैं—यह देवी भक्ति में प्रचलित उस विश्वास को व्यक्त करता है कि सच्चे मन से की गई पुकार माता तक पहुंचती है। अंत में माता के नाम का बार-बार जाप करने से मन को आनंद और शांति मिलने की भावना व्यक्त की गई है।