करले तू विश्वास रे पगले मैया दौड़ी आएगी
करले तू विश्वास रे पगले मैया दौड़ी आएगी,
जो तू दिल से माँ को पुकारे इक पल देर ना लाएगी,
लाख मुसीबत आये तुझपे बाल ना बांका हो तेरा,
दिल में बसा ले महारानी को छोड़ दे मेरा मेरा,
मुसीबत में तुझको कर पीछे आगे खुद अड़ जायेगी,
करले तू विश्वास रे पगले मैया दौड़ी आएगी,
क्यों कोसे है किस्मत को तू तेरा साथ निभाएगी,
समझे क्यों तू खुद को अकेला अपना तुझे बनाएगी,
गोद में रखके सर तेरा ममता से सहलाएगी,
करले तू विश्वास रे पगले मैया दौड़ी आएगी,
बोझ है सर पे दुनिया का रे अपनों ने दिल तोडा है,
देख के दुःख में तुझको पगले बीच भवर में छोड़ा है,
किशोरी दास तू ना कर चिंता माँ अंजलि हाथ बढ़ाएगी,
करले तू विश्वास रे पगले मैया दौड़ी आएगी,
श्रेणी : दुर्गा भजन
Maiya Daudi Aayegi | Devi Bhakti Bhajan | मैया दौड़ी आएगी | Kishori Dass Kanishk Bhaiya | Full HD
यह “करले तू विश्वास रे पगले, मैया दौड़ी आएगी” एक भावुक और विश्वास से भरा दुर्गा भजन है, जिसमें भक्त को माता रानी पर पूरा भरोसा रखने का संदेश दिया गया है। भजन में माँ को ऐसी करुणामयी शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो अपने सच्चे भक्त की पुकार सुनकर उसकी सहायता के लिए तुरंत दौड़ी चली आती हैं। इसका मूल संदेश यही है कि कठिन परिस्थितियों में मनुष्य को निराश होकर अपनी किस्मत को दोष देने के बजाय माता पर विश्वास और उनके चरणों में श्रद्धा बनाए रखनी चाहिए।
इस भजन का मुख्य भाव माँ पर अटूट विश्वास, शरणागति, ममता और संकट के समय माता के संरक्षण का है। “जो तू दिल से माँ को पुकारे, इक पल देर ना लाएगी” जैसी पंक्तियां भक्त के मन में यह विश्वास जगाती हैं कि सच्चे मन से की गई पुकार माता तक अवश्य पहुंचती है। भजन में माता को ऐसी शक्ति के रूप में देखा गया है जो भक्त के सामने खड़ी होकर उसकी परेशानियों से रक्षा करती हैं। भक्त से कहा गया है कि वह अपने मन में माता को बसाए और केवल सांसारिक मोह-माया में उलझने के बजाय उनके भरोसे को अपना आधार बनाए।
दूसरे अंतरे में भजन उस व्यक्ति की भावनाओं को सामने लाता है जो स्वयं को जीवन की परेशानियों में अकेला महसूस कर रहा है। उसे समझाया जाता है कि किस्मत को कोसने की जरूरत नहीं है, क्योंकि माता उसके साथ हैं। “गोद में रखके सर तेरा, ममता से सहलाएगी” पंक्ति माता के वात्सल्यपूर्ण स्वरूप को बहुत सुंदर तरीके से प्रस्तुत करती है। यहां माँ केवल देवी नहीं, बल्कि एक ऐसी स्नेहमयी माँ के रूप में दिखाई देती हैं जो अपने दुखी बच्चे को अपनी गोद में लेकर उसे सांत्वना देती हैं।
अंतिम अंतरे में जीवन के संघर्ष और रिश्तों से मिले दुख का भाव आता है। जब अपने ही लोग साथ छोड़ देते हैं और मनुष्य स्वयं को “भंवर में अकेला” महसूस करता है, तब भजन उसे निराश न होने की प्रेरणा देता है। “माँ अंजलि हाथ बढ़ाएगी” के माध्यम से माता के सहारे और उनकी कृपा की कल्पना की गई है। यहां “किशोरी दास” नाम भी भजन की पंक्तियों में आता है, जिससे यह किसी रचनाकार या प्रस्तोता से संबंधित नाम हो सकता है, लेकिन केवल इस पाठ के आधार पर इसकी निश्चित पुष्टि नहीं की जा सकती।