मईया तेरा सहारा सदा चाहिए
आसरा इस जहाँ का मिले ना मिले,
मईया तेरा सहारा सदा चाहिए,
चाँद तारे गगन में दिखे ना दिखे,
मुझको तेरा नज़ारा सदा चाहिए,
आसरा इस जहाँ का मिले ना मिले.....
जहाँ खुशियां है कम और ज्यादा है गम,
जहाँ देखो वही पे भर्म ही भर्म,
तेरी महफ़िल में शम्मा जले ना जले,
मेरे घर में उजाला सदा चाहिए,
आसरा इस जहाँ का मिले ना मिले.....
मेरी धीमी है चाल पथ है विशाल,
हर कदम पे है मालिक मुझे तू संभाल,
पैर मेरे ये दोनों चले ना चले,
मुझको तेरा ये साथ सदा चाहिए,
आसरा इस जहाँ का मिले ना मिले.....
श्रेणी : दुर्गा भजन
जीवन में दर्द और आँखों में आंसु के आलावा कुछ ना बचे इसे सुनो_Mata Bhajan 2022 _New Mata Bhajan_Devi
यह भजन माँ दुर्गा (मईया/माता रानी) के प्रति अटूट विश्वास, निर्भरता और भावपूर्ण प्रार्थना को दर्शाता है। “मईया तेरा सहारा सदा चाहिए” एक आधुनिक शैली का दुर्गा भजन है, जिसका रचयिता निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है, इसलिए इसे लोक-भक्ति परंपरा या समकालीन भक्ति गीत माना जाता है। यह भजन खासतौर पर माता की चौकी, जागरण और नवरात्रि जैसे अवसरों पर गाया जाता है।
इस भजन का मुख्य भाव “पूर्ण आश्रय (Dependence) और विश्वास” है। इसमें भक्त कहता है कि संसार का सहारा मिले या न मिले, लेकिन उसे माँ का सहारा हमेशा चाहिए। “चाँद तारे गगन में दिखे ना दिखे, मुझको तेरा नज़ारा सदा चाहिए” पंक्ति यह दर्शाती है कि भक्त के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़ देवी का दर्शन और उनकी कृपा है, बाकी सब गौण (secondary) है।
भजन में संसार की वास्तविकता को भी दर्शाया गया है—“जहाँ खुशियां है कम और ज्यादा है गम”—यानी यह दुनिया दुख और भ्रम से भरी हुई है। ऐसे में केवल देवी की शरण ही सच्ची शांति और प्रकाश दे सकती है—“मेरे घर में उजाला सदा चाहिए” उसी आंतरिक शांति और कृपा का प्रतीक है।
अंतिम अंतरे में जीवन के कठिन रास्ते और कमजोरियों को स्वीकार किया गया है—“मेरी धीमी है चाल, पथ है विशाल”—यह दर्शाता है कि इंसान अकेले जीवन का सफर नहीं कर सकता, उसे हर कदम पर माँ के मार्गदर्शन और सहारे की जरूरत है।
कुल मिलाकर, यह भजन एक भक्त के दिल की सच्ची पुकार है, जिसमें वह हर परिस्थिति में माँ दुर्गा का साथ, सहारा और कृपा चाहता है, और यही इसकी सबसे बड़ी भावना है।