मने राम नाम धुन लागि
मने राम नाम धुन लागि आज,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो,
मैं तो मोह माया ने त्यागी आज,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो,
ऐसी लगन हरी संग लागि आज,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो.......
सब बंधन जग का छूट्या आज,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो,
हरी चरणा में रम जाऊँ आज,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो,
म्हने राम नाम धुन लागि आज,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो.......
गुरु अंतर का पट खोल्या आज,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो,
हरी नाम बिना नहीं दूजो काज,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो,
म्हने राम नाम धुन लागि आज,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो.......
म्हारे रोम रोम में बस गया राम,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो,
हरी कारण छोड़ी लोक ने लाज,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो,
म्हने राम नाम धुन लागि आज,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो.......
म्हारा सपना में रामजी पधार्या आज,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो,
म्हारी जनम जनम की मिट गई प्यास,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो,
म्हने राम नाम धुन लागि आज,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो........
मने मिल गयो राम को आशीर्वाद,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो,
मैं तो झूम झूम हरी गुण गाऊं आज,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो,
म्हने राम नाम धुन लागि आज,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो........
श्रेणी : राम भजन
मने रामनाम धुन लागी | Mane Ram Nam Dhun Lagi | Ram Dhun Lagi | Kamlesh Barot | Hindi Bhajan
यह “मने राम नाम धुन लागि” एक अत्यंत प्रेरणादायक और भक्तिरस से ओतप्रोत श्रीराम भजन है, जिसमें भक्त भगवान श्रीराम के नाम की महिमा, सत्संग के प्रभाव और आध्यात्मिक जागृति का सुंदर वर्णन करता है। भजन में भक्त कहता है कि जब से उसके हृदय में राम नाम की धुन लगी है, तब से उसका मन सत्संग में रम गया है और उसने मोह-माया के बंधनों से स्वयं को अलग कर लिया है। यह भजन बताता है कि भगवान के नाम का स्मरण मनुष्य के जीवन में शांति, आनंद और आत्मिक परिवर्तन लेकर आता है।
इस भजन का मुख्य भाव राम नाम की महिमा, सत्संग का महत्व, वैराग्य, गुरु कृपा और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण है। भक्त अनुभव करता है कि सत्संग और राम नाम के प्रभाव से उसके जीवन के सभी सांसारिक बंधन ढीले पड़ गए हैं और अब उसका मन केवल भगवान के चरणों में ही लगना चाहता है। “सब बंधन जग का छूट्या आज” जैसी पंक्तियाँ इस बात का प्रतीक हैं कि सच्ची भक्ति मनुष्य को मोह, लोभ और अहंकार से मुक्त कर देती है तथा उसे आत्मिक शांति की ओर ले जाती है।
भजन में गुरु की महिमा का भी विशेष महत्व बताया गया है। “गुरु अंतर का पट खोल्या आज” का अर्थ है कि सद्गुरु की कृपा से भक्त के भीतर ज्ञान का प्रकाश हुआ और उसके अज्ञान का अंधकार दूर हो गया। इसके बाद उसे यह अनुभव होता है कि राम नाम से बढ़कर संसार में कोई दूसरा कार्य या साधन नहीं है। यह भाव भारतीय संत परंपरा की उस शिक्षा को दर्शाता है, जिसमें गुरु को ईश्वर तक पहुँचने का मार्गदर्शक माना गया है।
भजन के अंतिम भाग में भक्त कहता है कि अब उसके रोम-रोम में श्रीराम का वास हो गया है। उसे स्वप्न में भी भगवान श्रीराम के दर्शन होने लगे हैं और जन्म-जन्म की आध्यात्मिक प्यास शांत हो गई है। भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होने के बाद वह आनंदपूर्वक उनके गुणों का गान करता है। यह भजन यह संदेश देता है कि राम नाम का निरंतर जप, सत्संग और गुरु कृपा मनुष्य के जीवन को पवित्र बनाते हैं तथा उसे परम शांति और ईश्वर की निकटता का अनुभव कराते हैं।
यह भजन मुख्य रूप से राजस्थानी और गुजराती लोकभाषा की शैली में रचा गया है, जिससे इसमें सहजता, आत्मीयता और लोकभक्ति का सुंदर समावेश दिखाई देता है। आपके दिए गए वीडियो शीर्षक के अनुसार यह भजन “मने राम नाम धुन लागि” के नाम से लोकप्रिय है, जिसे कमलेश बारोट (Kamlesh Barot) ने प्रस्तुत किया है। उपलब्ध जानकारी में मूल गीतकार या रचनाकार का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता, इसलिए बिना प्रमाण के किसी व्यक्ति को इसका लेखक बताना उचित नहीं होगा। कुल मिलाकर, यह भजन राम नाम की महिमा, सत्संग की शक्ति, गुरु कृपा और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का अत्यंत भावपूर्ण और प्रेरणादायक संदेश देता है।