राम तुम बड़े कृपालु हो शाम
राम तुम बड़े कृपालु हो, शाम तुम बड़े दयालु हो ।
नाथ तुम बड़े दयालु हो,प्रभु जी तुम बड़े कृपालु हो ॥
और न कोई हमारा है, मुझे इक तेरा सहारा है ।
कि नईया डोल रही मेरी,प्रभु जी तुम करो न अब देरी ॥
तेरा यश गाया वेदों ने, पार नहीं पाया वेदों ने ।
नेती नेती गाया वेदों ने, सदा ही धिआया वेदों ने ॥
भले हैं बुरे हैं तेरे हैं, तेरी माया के घेरे हैं ।
चरण के हम सब चेरे हैं, प्रभु जी हम बालक तेरे हैं ॥
तुम्हारा नाम मिले भगवन, सुबह और शाम मिले भगवन ।
भक्ति का दान मिले भगवन, कि आठों याम मिले भगवन ॥
सहारा भक्तों के हो आप, मिटाते हो सब के संताप ।
करें जो भक्ति भाव से जाप, मिटे सब जन्म जन्म के पाप ॥
श्रेणी : राम भजन
Shyam Tum Bade Dayalu Ho || Peaceful Ram Bhajan || Shri Anurag Krishna Shastri
यह “राम तुम बड़े कृपालु हो” एक अत्यंत भावपूर्ण श्रीराम भजन है, जिसमें भक्त भगवान श्रीराम की असीम करुणा, दयालुता और कृपा का गुणगान करता है। भजन में भक्त बार-बार प्रभु को कृपालु, दयालु और अपने जीवन का एकमात्र सहारा कहकर संबोधित करता है। वह स्वीकार करता है कि संसार में उसके लिए भगवान के अतिरिक्त कोई दूसरा सच्चा आश्रय नहीं है और जीवन रूपी नैया को सुरक्षित पार लगाने की शक्ति केवल प्रभु श्रीराम के पास ही है।
इस भजन का मुख्य भाव पूर्ण शरणागति, विश्वास, विनम्रता और भगवान की कृपा पर अटूट आस्था है। भक्त कहता है कि उसकी जीवन-नैया डगमगा रही है और अब वह केवल प्रभु श्रीराम से ही सहायता की प्रार्थना करता है। यह भाव दर्शाता है कि जब मनुष्य जीवन की कठिनाइयों से घिर जाता है, तब भगवान का स्मरण ही उसे धैर्य, साहस और आशा प्रदान करता है। भजन यह संदेश देता है कि ईश्वर अपने सच्चे भक्तों को कभी निराश नहीं करते।
भजन में वेदों द्वारा भगवान की महिमा का वर्णन भी किया गया है। “तेरा यश गाया वेदों ने, पार नहीं पाया वेदों ने” का अर्थ है कि स्वयं वेद भी भगवान की अनंत महिमा का पूर्ण वर्णन नहीं कर सके। “नेति-नेति” का उल्लेख उपनिषदों में प्रयुक्त उस दार्शनिक सिद्धांत की ओर संकेत करता है, जिसका अर्थ है कि परमात्मा का स्वरूप इतना अनंत और असीम है कि उसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा सकता। इससे भगवान श्रीराम के दिव्य और अनंत स्वरूप की महिमा प्रकट होती है।
भजन आगे यह भी बताता है कि मनुष्य चाहे जैसा भी हो—अच्छा या बुरा—वह अंततः भगवान की ही संतान है और उनकी माया के अधीन है। इसलिए भक्त स्वयं को प्रभु का बालक और सेवक मानते हुए केवल उनके चरणों की शरण चाहता है। वह प्रार्थना करता है कि उसके जीवन के प्रत्येक क्षण में भगवान का नाम, भक्ति और स्मरण बना रहे। अंत में भजन यह संदेश देता है कि जो भक्त सच्चे भाव से भगवान का नाम जपते हैं, उनके दुःख दूर होते हैं और जन्म-जन्म के पापों का भी नाश हो जाता है।