मेरी फरियाद सुनले माँ
मेरी फरियाद सुनले माँ,
तेरे दर आया दीवाना,
मन की मुरादें पूरी कर,
सिवा तेरे ना कोई ठिकाना,
मेरी फरियाद सुनले मां,
तेरे दर आया दीवाना.....
कैसे मनाऊं तुझको माता,
जानू ना तेरी पूजा,
तुझपे अर्पण जीवन मेरा,
तुझ बिन ना कोई दूजा,
मेरी अर्जी सुनले माँ,
है हँसता सारा जमाना,
मेरी फरियाद सुनले मां,
तेरे दर आया दीवाना.....
सच्चे मन से आया मैया,
तुझको भेंट चढाने,
पान सुपारी लाल चुनरिया,
आया तुझको चढाने,
ये ‘राजा गोहेर’ मांगे माँ,
चरण धूलि का नजराना,
मेरी फरियाद सुनले मां,
तेरे दर आया दीवाना....
श्रेणी : दुर्गा भजन
Meri Fariyad Sunle Maa | मेरी फरियाद सुनले माँ | Navratri Special Bhajan | by Rajan Mor | full HD
यह “मेरी फरियाद सुनले माँ” एक भावपूर्ण दुर्गा भजन और नवरात्रि विशेष भक्ति गीत है, जिसमें भक्त माता रानी के दरबार में आकर अपनी मनोकामनाओं और जीवन की परेशानियों को उनके सामने रखने की भावना व्यक्त करता है। भजन में भक्त स्वयं को माता का दीवाना बताकर कहता है कि उसके लिए माँ के अलावा कोई दूसरा सहारा नहीं है। वह माता से अपनी फरियाद सुनने और मन की मुराद पूरी करने की विनम्र प्रार्थना करता है। पूरी रचना में भक्त और माता के बीच एक गहरा माँ-बेटे जैसा आत्मीय संबंध दिखाई देता है।
इस भजन का मुख्य भाव शरणागति, प्रार्थना, विश्वास और माता के चरणों में पूर्ण समर्पण है। भक्त स्वीकार करता है कि उसे माता की पूजा की सही विधि भले ही न आती हो, लेकिन उसके मन में माँ के लिए सच्ची श्रद्धा है। “तुझपे अर्पण जीवन मेरा, तुझ बिन ना कोई दूजा” जैसी पंक्तियां यह दर्शाती हैं कि भक्त अपने जीवन को माता के चरणों में समर्पित करना चाहता है और उन्हें ही अपना सबसे बड़ा सहारा मानता है। यहां पूजा की विधि से ज्यादा मन की सच्चाई और श्रद्धा को महत्व दिया गया है।
भजन में भक्त माता के दरबार में अपनी भेंट लेकर आने की भावना भी व्यक्त करता है। वह पान, सुपारी और लाल चुनरिया माता को अर्पित करने की बात कहता है। ये वस्तुएं देवी पूजा की पारंपरिक श्रद्धा और भक्त के समर्पण का प्रतीक हैं। इसके बाद “चरण धूलि का नजराना” मांगना भक्त की अत्यंत विनम्र भावना को दर्शाता है। वह माता से धन या वैभव की अपेक्षा करने के बजाय उनके चरणों की धूल को ही सबसे बड़ा प्रसाद और सम्मान मानता है। यही भाव इस भजन को भावनात्मक रूप से विशेष बनाता है।