मोरी मैया महान मोरी मैया महान
मोरी मैया महान मोरी मैया महान,
मैहर की शारदा भवानी,
मोरी मैया महान मोरी मैया महान,
मैहर की शारदा भवानी।।
संतन की मैया रखवाली,
मन बांछित फल देने वाली,
करे सबका कल्याण,
करे सबका कल्याण,
मैहर की शारदा भवानी,
मोरी मैया महान मोरी मैया महान,
मैहर की शारदा भवानी।।
माता के डर जो भी जावे,
खाली हाथ ना वापस आवे,
झोली भरती महान,
झोली भरती महान,
मैहर की शारदा भवानी,
मोरी मैया महान मोरी मैया महान,
मैहर की शारदा भवानी।।
मैं नित ध्यान धरत माँ तेरा,
बेड़ा पार करो माँ तेरा,
राजेंद्र ठहरा नादान,
राजेन्द्र ठहरा नादान,
मैहर की शारदा भवानी,
मोरी मैया महान मोरी मैया महान,
मैहर की शारदा भवानी।।
श्रेणी : दुर्गा भजन
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यह “मोरी मैया महान, मोरी मैया महान” एक भक्तिमय देवी भजन है, जिसमें मैहर की मां शारदा भवानी की महिमा और उनके प्रति भक्त की श्रद्धा को व्यक्त किया गया है। भजन में माता को महान, करुणामयी और अपने भक्तों की रक्षा करने वाली देवी के रूप में स्मरण किया गया है। “मैहर की शारदा भवानी” की बार-बार पुनरावृत्ति माता के प्रति गहरी आस्था और उनके पवित्र धाम से जुड़े भक्तिभाव को मजबूत करती है।
इस भजन का मुख्य भाव श्रद्धा, विश्वास, माता की कृपा और शरणागति का है। भक्त माता को “संतन की मैया रखवाली” कहकर उनकी रक्षा करने वाली शक्ति के रूप में नमन करता है। साथ ही माता को मनवांछित फल देने वाली और सबका कल्याण करने वाली देवी कहा गया है। यहां भक्त का विश्वास है कि मां अपने बच्चों की प्रार्थना सुनती हैं और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार कृपा करती हैं।
भजन में मैहर की शारदा माता के दरबार की महिमा विशेष रूप से दिखाई देती है। “माता के दर जो भी जावे, खाली हाथ ना वापस आवे” जैसी पंक्तियां भक्त की उस श्रद्धा को व्यक्त करती हैं कि मां के दरबार में सच्चे मन से आने वाले भक्तों पर माता की कृपा होती है। “झोली भरती” का भाव केवल सांसारिक वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे माता से सुख, शांति, आशीर्वाद और आध्यात्मिक संतोष प्राप्त करने की भक्तिपूर्ण भावना के रूप में भी समझा जा सकता है।
अंतिम अंतरे में भक्त स्वयं को नादान और माता पर निर्भर बताता है। “मैं नित ध्यान धरत मां तेरा” के माध्यम से वह रोज माता का ध्यान करने और उनके चरणों में अपनी श्रद्धा रखने की बात करता है। “बेड़ा पार करो” भारतीय भक्ति परंपरा में एक गहरा आध्यात्मिक भाव है, जिसमें भक्त जीवन की कठिनाइयों और संसार रूपी भवसागर से पार लगाने के लिए अपने आराध्य की कृपा मांगता है।