नराते मईया दे
ਨਰਾਤੇ ਮਈਆ ਦੇ ll, ਆਉਂਦੇ ਨੇ ਹਰ ਸਾਲ,
ਕਿ 'ਲੋਕ ਮਨਾਉਂਦੇ ਨੇ ll, ਬੜੇ ਹੀ ਚਾਵਾਂ ਨਾਲ,
ਨਰਾਤੇ ਮਈਆ ਦੇ, ਨਰਾਤੇ ਮਈਆ ਦੇ ll
ਤੈਨੂੰ ਕਦੇ ਨਾ ਭੁਲਾਵਾਂ, ਤਨ ਮਨ ਤੋਂ ਧਿਆਵਾਂ,
"ਭੇਂਟ, ਸ਼ਰਧਾਂ ਦੀ ਲਿਆਵਾਂ ਤੇਰੇ ਦਵਾਰ ਮਾਂ" ll
*ਭੋਗ ਮੈਂ ਲਗਾਵਾਂ, ਨਾਲੇ ਖੁਸ਼ੀਆਂ ਮੈਂ ਪਾਵਾਂ ll,
ਜਦੋ ਬੈਠ ਜਾਵਾਂ ਕੰਜ਼ਕਾਂ ਨਾਲ,
ਨਰਾਤੇ ਮਈਆ ਦੇ ll, ਆਉਂਦੇ ਨੇ..........
ਨਾ ਹੀ ਕਰਦੀ ਹਿਸਾਬ, ਨਾ ਤੂੰ ਰੱਖਦੀ ਕਿਤਾਬ,
"ਕਰੇ, ਪੂਰੀ ਸਭਨਾਂ ਦੀ ਆਸ ਮਾਂ" ll
*ਕਰੂੰ ਫਰਿਆਦ, ਪੂਰੀ ਹੁੰਦੀ ਏ ਮੁਰਾਦ ll,
ਝੰਡੇ ਵਾਲੀ ਜੀ ਦੀ ਕਿਰਪਾ ਨਾਲ,
ਨਰਾਤੇ ਮਈਆ ਦੇ ll, ਆਉਂਦੇ ਨੇ..........
ਨੱਚਦੇ ਨਚਾਉਂਦੇ, ਨਾਲੇ ਭੇਟਾਂ ਤੇਰੀ ਗਾਉਂਦੇ,
"ਤੇਰੇ, ਦਰ ਉੱਤੇ ਆਏ ਤੇਰੇ ਲਾਲ ਮਾਂ" ll
*ਰੀਆ ਅਤੇ ਰਾਜ, ਹੱਥ ਜੋੜ ਕੇ ਮਨਾਉਂਦੇ ll,
ਓਹ ਤਾਂ ਕਰ ਦੇਂਦੀ ਮਾਲਾਮਾਲ,
ਨਰਾਤੇ ਮਈਆ ਦੇ ll, ਆਉਂਦੇ ਨੇ..........
श्रेणी : दुर्गा भजन
Narate Maiya De || नराते मइया दे || Riya Thapar Live || Navratri Special Bhajan 2022||
यह “नराते मईया दे” एक सुंदर पंजाबी नवरात्रि और दुर्गा भजन है, जिसमें हर वर्ष आने वाले नवरात्रों के अवसर पर माता रानी की पूजा, भक्ति और उत्सव का वर्णन किया गया है। भजन में बताया गया है कि नवरात्रि आते ही भक्त बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ माता का पर्व मनाते हैं। भक्त माता को कभी न भूलने और तन-मन से उनका ध्यान करने का संकल्प लेता है तथा श्रद्धा से भेंट लेकर उनके द्वार पर पहुंचता है। इस रचना में नवरात्रि के दौरान माता की आराधना, भोग लगाने और कंजकों यानी कन्या पूजन जैसी धार्मिक परंपराओं की सुंदर झलक दिखाई देती है।
इस भजन का मुख्य भाव माता रानी के प्रति श्रद्धा, प्रेम, विश्वास और भक्तिभाव है। भक्त कहता है कि वह माता को श्रद्धा से भेंट अर्पित करेगा और उनके चरणों में बैठकर अपनी मनोकामना रखेगा। “ਨਾ ਹੀ ਕਰਦੀ ਹਿਸਾਬ, ਨਾ ਤੂੰ ਰੱਖਦੀ ਕਿਤਾਬ” अर्थात माता अपने भक्तों की भक्ति और प्रार्थना का कोई हिसाब-किताब नहीं रखतीं, बल्कि उनकी श्रद्धा को स्वीकार करके उनकी इच्छाओं को पूरा करती हैं। यह पंक्ति माता के करुणामयी और दयालु स्वरूप को दर्शाती है, जहां भक्त का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई फरियाद माता तक अवश्य पहुंचती है।
भजन में “झंडे वाली जी” के प्रति विशेष श्रद्धा भी दिखाई देती है। यह माता के प्रसिद्ध रूप और उनके पवित्र धाम से जुड़ी आस्था की ओर संकेत करता है। भक्त माता के दरबार में पहुंचकर भेंटें गाता है, नाचता है और हाथ जोड़कर उनकी आराधना करता है। “ਓਹ ਤਾਂ ਕਰ ਦੇਂਦੀ ਮਾਲਾਮਾਲ” के माध्यम से माता की कृपा को समृद्धि और खुशियों से जोड़ा गया है। यहां “मालामाल” का भाव केवल धन-दौलत तक सीमित नहीं, बल्कि माता की कृपा, सुख, संतोष और जीवन में खुशियों की प्राप्ति के रूप में भी समझा जा सकता है।
भजन की भाषा पंजाबी लोकभक्ति शैली में है, इसलिए इसमें नवरात्रि के उत्सव का वातावरण बहुत सहज और जीवंत दिखाई देता है। भक्त माता के दरबार में इकट्ठा होकर भेंटें गाते हैं, नृत्य करते हैं और सामूहिक रूप से माता की जय-जयकार करते हैं। अंतिम पंक्तियों में “रिया और राज” नाम का उल्लेख मिलता है, जो संभवतः रचना या प्रस्तुति से जुड़े व्यक्तियों का नाम हो सकता है, लेकिन केवल दिए गए पाठ के आधार पर उनके संबंध की निश्चित पुष्टि नहीं की जा सकती।