पंजाबीयों की शान वखरी
पंजाबीयों की शान वखरी, भक्तो की शान वखरी ।
कोई माई दर जाए, कोई साई घर जाए, कोई जाए गुरां दे द्वारे
पंजाबीयों की शान वखरी...
किधरे मंदिरां विच्च आरती, गुरुद्वारे गुरुबानी
किधर भगत पाए गांदे ने साई दी अमर कहानी
सारे हुंदे ने मगन, सब ने इक्को ही लगन
साडी बेड़ी लगे किनारे, जय हो...
पंजाबीयों की शान वखरी...
सब दे अपने अपने रस्ते, अपनी अपनी पूजा
पर सभना दा भाईचारा तोड़ सके ना दूजा
माँ है सब की ही माँ, इसके चरणों में जहां
माँ ने लगदे लाल प्यारे, जय हो...
पंजाबीयों की शान वखरी...
माँ के भक्तो भरो झोलिया, माँ के खेल न्यारे
साई सतगुरु राम कृष्ण शिव दिसदे माँ विच सारे
एहदे दर जो आये, खली ना ओह जाए,
एहदे भरे रेहन भंडारे, जय हो...
पंजाबीयों की शान वखरी...
यह जगदम्बे मात वैष्णो सारे जग की रानी
एहदे जेहा कोई होर न ‘चंचल’ एह है जग कल्याणी
आओ नाचिये गाईये सारे भंगड़े पाइये
लाईये माँ दे जैकारे, जय हो...
पंजाबीयों की शान वखरी...
श्रेणी : दुर्गा भजन
Punjabiyan Di Shaan Vakhri Narendra Chanchal Punjabi Devi Bhajan I Laal Choleyan Wali
पंजाब की मिट्टी में बसे प्रेम, उत्साह और धार्मिक एकता की खूबसूरती को दर्शाने वाला यह भजन माँ जगदम्बे की महिमा को एक अनोखे पंजाबी रंग में प्रस्तुत करता है। इसकी पंक्तियाँ बताती हैं कि किसी की श्रद्धा मंदिर की आरती में है, किसी की गुरुद्वारे की गुरुबाणी में, तो कोई साईं के दरबार में सिर झुकाता है, लेकिन सबके दिलों में प्रेम और भाईचारे की भावना एक जैसी है। भजन का संदेश है कि पूजा-पाठ के रास्ते भले अलग हों, पर इंसानियत और आपसी सम्मान ही समाज की असली ताकत हैं। माँ वैष्णो देवी को जगत जननी के रूप में याद करते हुए इसमें भक्तों की खुशहाली, भरे भंडार और उनकी कृपा का गुणगान किया गया है। अंतिम अंतरे में माँ के जयकारों, भंगड़े और भक्ति के उल्लास के माध्यम से ऐसा वातावरण रचा गया है, जिसमें श्रद्धा के साथ पंजाबी संस्कृति की जीवंत झलक भी दिखाई देती है। इस प्रसिद्ध पंजाबी देवी भजन को नरेंद्र चंचल ने अपनी दमदार और जोशीली गायकी से विशेष पहचान दी। गीत के अंतिम अंतरे में ‘चंचल’ नाम का उल्लेख भी मिलता है। हालाँकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर गीत के मूल रचनाकार और उनके निवास स्थान की अलग से पुष्टि नहीं की जा सकती। यह भजन माँ की भक्ति के साथ धार्मिक सद्भाव, एकता और पंजाब की अनूठी पहचान का उत्सव है। 🌺🙏