राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की
राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की,
राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की,
राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की,
राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की,
राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की,
राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की,
मिलकर बोलो राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की,
सारे बोलो राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की,
राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की,
राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की,
राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की,
बोलो राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की,
भजो राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की,
बोलो बोलो राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की,
मिल कर बोलो राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की,
श्रेणी : राम भजन
Ram Lakshman Janki Jay Bolo Hanuman Ki - Prabhjot Singh | Ram Bhajan | Sanskar Bhajan
यह “राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की” एक सरल और उत्साहपूर्ण राम भजन एवं हनुमान भक्ति गीत है, जिसमें भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता जानकी और भक्त हनुमान का एक साथ स्मरण किया गया है। भजन में बार-बार “राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की” का जयकारा लगाया गया है, जिससे सामूहिक भक्ति और धार्मिक उत्साह का वातावरण बनता है। इसकी विशेषता यह है कि इसमें किसी लंबी कथा या विस्तृत प्रसंग के बजाय भगवान के नाम का सामूहिक संकीर्तन और जयघोष प्रमुख है।
इस भजन का मुख्य भाव श्रीराम के प्रति श्रद्धा और हनुमान जी के प्रति भक्ति है। भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता का नाम लेने के साथ हनुमान जी की जय बोलना इस बात को दर्शाता है कि हनुमान जी की भक्ति का केंद्र स्वयं श्रीराम हैं। हनुमान जी को राम के परम भक्त और सेवक के रूप में स्मरण किया जाता है। इसलिए भजन में राम परिवार के नामों के साथ हनुमान जी का जयकारा लगाकर भक्तों को राम नाम और हनुमान भक्ति से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
इस रचना में “मिलकर बोलो”, “सारे बोलो” और “भजो” जैसे शब्द विशेष महत्व रखते हैं। इनके माध्यम से भक्तों को अकेले नहीं, बल्कि मिलकर भगवान का नाम लेने के लिए प्रेरित किया गया है। यह भजन सामूहिक सत्संग, राम कथा, हनुमान मंदिर, भजन संध्या और धार्मिक आयोजनों में गाए जाने के लिए विशेष रूप से उपयुक्त भाव रखता है। बार-बार जयकारे की पुनरावृत्ति भक्तों के भीतर उत्साह और भक्ति की ऊर्जा पैदा करती है।
भजन की भाषा अत्यंत सरल है, इसलिए इसे हर उम्र के भक्त आसानी से गा और समझ सकते हैं। इसमें किसी विशेष स्थान, घटना या पौराणिक कथा का विस्तृत वर्णन नहीं है, बल्कि नाम-स्मरण को ही भक्ति का माध्यम बनाया गया है। इसका मूल संदेश यही है कि श्रद्धा और प्रेम से श्रीराम, लक्ष्मण, माता जानकी और हनुमान जी का नाम लिया जाए तथा सामूहिक रूप से उनके जयकारे लगाए जाएं।