शेरावाली दा सहारा मिल गया: भजन
मिल गया मिल गया,
शेरावाली दा सहारा मिल गया,
अम्बे रानी दा सहरा मिल गया,
तुझे मिला मुझे मिला उसे मिला,
महारानी दा दवारा मिल गया,
शेरावाली दा सहारा मिल गया.....
जग में कोई बड़ा नहीं है माँ की ममता के आगे,
ऋषि मुनि सब शीश झुका के माँ की शक्ति के आगे,
खिल गया खिल गया माँ का प्यार मिला था दिल खिल गया,
शेरावाली दा सहारा मिल गया.....
माँ मेरी वैष्णो माता सबकी झोली तुम भरना,
सबके मन में तू वसे माँ फिर काहे का डरना,
मिल गया मिल गया माँ का एक दो लाख मिल गया,
शेरावाली दा सहारा मिल गया
दिन रात करू माँ बाप की सेवा ऐसा मुझको वर देना,
सुमंगल मांगे यही दुआवा सबके दुखड़े हर लेना,
दुबे हुए को किनारा मिल गया,
अम्बे रानी दा सहरा मिल गया,
श्रेणी : दुर्गा भजन
Maa Ka Pyar-Sheranwali Da Sahara I Devi Bhajan I SUMANGAL ARORA I Full HD Video Song I Maa Ka Sher
“शेरावाली दा सहारा मिल गया” एक भावपूर्ण दुर्गा भजन है, जिसमें भक्त मां शेरावाली, अम्बे रानी और वैष्णो माता को अपना सबसे बड़ा सहारा मानकर उनकी कृपा के लिए कृतज्ञता व्यक्त करता है। भजन की मुख्य पंक्ति “शेरावाली दा सहारा मिल गया” माता की शरण प्राप्त होने की खुशी और विश्वास को दर्शाती है। भक्त के लिए मां का सहारा मिलना जीवन की बड़ी उपलब्धि के समान है।
इस भजन का मुख्य भाव मां की ममता, शरणागति, विश्वास और कृतज्ञता का है। इसमें कहा गया है कि संसार में मां की ममता से बढ़कर कुछ नहीं है और ऋषि-मुनि भी मां की शक्ति के सामने शीश झुकाते हैं। इस भाव के माध्यम से माता को सर्वोच्च शक्ति और करुणामयी जननी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। मां का प्रेम मिलने पर भक्त का मन प्रसन्न हो जाता है और उसके भीतर आशा का भाव जागता है।
भजन में वैष्णो माता का भी स्मरण किया गया है और उनसे सभी भक्तों की झोलियां भरने की प्रार्थना की गई है। “सबके मन में तू वसे मां” जैसी पंक्ति यह भाव व्यक्त करती है कि यदि माता का स्मरण और विश्वास मन में बना रहे तो भक्त के भीतर भय कम होता है और उसे मानसिक सहारा मिलता है। यहां “झोली भरना” केवल धन-संपत्ति के अर्थ में नहीं, बल्कि माता की कृपा, सुख, शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने के भाव में भी समझा जा सकता है।
इस रचना का एक विशेष पक्ष यह है कि भक्त केवल अपने लिए कृपा नहीं मांगता, बल्कि माता से सभी के दुख दूर करने की प्रार्थना करता है। वह मां से ऐसा वर मांगता है कि वह दिन-रात अपने माता-पिता की सेवा कर सके। यह पंक्ति भजन में भक्ति के साथ-साथ भारतीय पारिवारिक संस्कारों और माता-पिता की सेवा के महत्व को भी सामने लाती है। “सुमंगल मांगे यही दुआवा” के माध्यम से सबके कल्याण की भावना व्यक्त होती है।
“डूबे हुए को किनारा मिल गया” भजन की एक सुंदर आध्यात्मिक अभिव्यक्ति है। इसमें माता की शरण को ऐसे सहारे के रूप में बताया गया है जो कठिन परिस्थितियों में व्यक्ति को संभालता है। भक्त के लिए मां का नाम और उनकी कृपा जीवन की परेशानियों के बीच आशा और विश्वास का आधार बनती है। इसीलिए बार-बार “अम्बे रानी दा सहारा मिल गया” और “शेरावाली दा सहारा मिल गया” का भाव दोहराया गया है।