तू श्याम का सुमिरन कर सब दुख
तू श्याम का सुमिरन कर, सब दुख कट जायेगा,
यही श्याम नाम तुझको, भव पार लगायेगा......
मिथ्या जग में कबसे,तूं पगले रहा है बोल,
तूं इनकी शरंण आके, हाथों जोड़ के बोल,
ये दास तुम्हारा अब,कहीं ओर ना जायेगा,
यही श्याम नाम तुझको भव पार लगायेगा,
तू श्याम का सुमिरन कर......
कैसा भी समय आये कैसी भी घड़ी आये,
सच्चे हृदय से जो सुमिरन इनका गाये,
हर विपदा में उसका वो साथ निभायेगा,
यही श्याम नाम तुझको भव पार लगायेगा,
तू श्याम का सुमिरन कर......
कब जानें ढल जाये, दो पल का है जीवन,
भगवान के चरनों में करदे तूं इसे अर्पंण,
तेरे साथ में बस केवल यही नाम ही जायेगा,
यही श्याम नाम तुझको भव पार लगायेगा,
तू श्याम का सुमिरन कर......
श्रेणी : कृष्ण भजन
यह भजन भगवान श्री कृष्ण (श्याम) के नाम-स्मरण की महिमा को सरल और प्रभावशाली तरीके से समझाता है। इसमें “श्याम का सुमिरन” यानी भगवान के नाम का जप करने को जीवन के सभी दुखों का समाधान बताया गया है। भजन का रचयिता निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है, इसलिए इसे पारंपरिक/लोक भक्ति रचना माना जाता है, जो उत्तर भारत की कृष्ण-भक्ति परंपरा—विशेषकर ब्रज क्षेत्र—से जुड़ी हुई है।
इस भजन का मुख्य भाव “नाम-भक्ति और वैराग्य” है। इसमें संसार (मिथ्या जग) को अस्थायी बताया गया है और इंसान को समझाया गया है कि वह कब तक इस माया में भटकता रहेगा। “श्याम नाम तुझको भव पार लगायेगा” पंक्ति यह दर्शाती है कि भगवान का नाम ही जन्म-मरण के चक्र (भवसागर) से मुक्ति दिलाने वाला है। यहाँ सुमिरन (जप) को सबसे सरल और शक्तिशाली साधना बताया गया है, जो हर परिस्थिति—चाहे दुख हो या संकट—में मनुष्य का सहारा बनती है।
भजन यह भी सिखाता है कि जीवन बहुत छोटा और अनिश्चित है (“दो पल का है जीवन”), इसलिए इसे भगवान के चरणों में समर्पित कर देना ही सर्वोत्तम मार्ग है। अंत में यह संदेश दिया गया है कि इस संसार से जाते समय धन-दौलत या रिश्ते साथ नहीं जाते, केवल भगवान का नाम ही साथ रहता है।
कुल मिलाकर, यह भजन व्यक्ति को सांसारिक मोह से हटाकर भक्ति, श्रद्धा और भगवान के नाम में विश्वास रखने की प्रेरणा देता है, और यही इसका गहरा आध्यात्मिक संदेश है।