तुम कृपा करो महारानी जन पर
तुम कृपा करो महारानी जन पर कृपा करो,
सब पर कृपा करो जन पर कृपा करो,
दुखियो की तुम दाता हो माँ,
सब की भाग्य विधाता हो माँ,
तुम से रोशन चांद ओर तारे,
धरती अम्बर तेरे सहारे,
कल्याण करो कल्याणी,
सब पर कृपा करो।
हम पर भी उपकार करो माँ,
हमरा भी उद्दार करो माँ,
कर भी दो कल्याण हमारा,
मानेगे अहसान तुम्हारा,
वर देदो ऐ वरदानी,
जन पर कृपा करो।
मैया हमको तेरा सहारा,
तेरे बिना ना कोई हमारा,
हम बच्चे अनजान है माता,
तू तो जानी जान हैं माता,
हे अम्बे आद भवानी,
जन पर कृपा करो।
श्रेणी : दुर्गा भजन
Tum Kripa Karo Maharani By Narendra Chanchal [Full Song] I Kripa Karo Maharani
“तुम कृपा करो महारानी जन पर” एक भावपूर्ण दुर्गा भजन है, जिसमें भक्त मां भवानी से सभी भक्तों पर कृपा, दया और आशीर्वाद बनाए रखने की प्रार्थना करता है। भजन की मुख्य पंक्ति “तुम कृपा करो महारानी, जन पर कृपा करो” बार-बार दोहराकर माता के प्रति भक्त की विनम्र पुकार को व्यक्त करती है। इसमें भक्त अपनी व्यक्तिगत परेशानियों के साथ-साथ सभी दुखी और जरूरतमंद लोगों के कल्याण की भी कामना करता है।
इस भजन में मां दुर्गा को दुखियों की दाता और भाग्य विधाता के रूप में संबोधित किया गया है। भक्त के लिए माता केवल एक देवी नहीं, बल्कि पूरे संसार की आधार शक्ति हैं। “तुम से रोशन चांद और तारे, धरती अंबर तेरे सहारे” जैसी पंक्तियों में माता की व्यापक शक्ति और सृष्टि के प्रति उनके महत्व का भाव दिखाई देता है। इसके बाद “कल्याण करो कल्याणी” कहकर भक्त मां से सबके जीवन में मंगल और कल्याण की प्रार्थना करता है।
अगले अंतरे में भक्त माता से अपने ऊपर भी उपकार और उद्धार करने की विनती करता है। वह अपने जीवन का कल्याण करने और ऐसा वरदान देने की प्रार्थना करता है जिससे उसके जीवन में सुख, शांति और मंगल बना रहे। “वर देदो ऐ वरदानी” के माध्यम से माता को वरदान देने वाली शक्ति के रूप में स्मरण किया गया है। यहां भक्त का भाव किसी अधिकार का नहीं, बल्कि पूरी विनम्रता और श्रद्धा के साथ मां से कृपा मांगने का है।
भजन का अंतिम अंतरा मां और बच्चे के आत्मीय संबंध को बहुत सुंदर ढंग से सामने लाता है। भक्त कहता है कि माता ही उसका सहारा हैं और उनके बिना उसका कोई नहीं है। “हम बच्चे अनजान हैं माता, तू तो जानी जान है माता” में भक्त स्वयं को सरल और असहाय बच्चा मानता है, जबकि माता को ऐसी करुणामयी जननी माना गया है जो अपने बच्चों के मन की बात और उनकी परिस्थितियों को जानती हैं। यह पंक्तियां शरणागति और मातृ-स्नेह के भाव को गहरा करती हैं।
पूरे भजन में “जन पर कृपा करो” की पुनरावृत्ति इसे एक सामूहिक प्रार्थना का स्वर देती है। भक्त केवल अपने लिए नहीं, बल्कि सभी लोगों के लिए माता से कृपा, कल्याण और सहारे की मांग करता है। इसी कारण यह भजन माता की चौकी, जागरण, नवरात्रि और अन्य देवी-आराधना के अवसरों पर गाए जाने वाले प्रार्थनात्मक भजनों की भावना से जुड़ा हुआ दिखाई देता है।