बिहारी जी के दर पे जाता जो एक बार
बिहारी जी के दर पे, जाता जो एक बार,
उसके लिए खुल जाते है, वैकुंठ के भी द्वार,
कुंज गली में बेठे, बांके बिहारी,
महिमा उनकी है, सबसे न्यारी,
कुंज गली में बेठे, बाके बिहारी,
महिमा उनकी है, सबसे न्यारी,
जो भी जाता दर पे, हो जाता भव से पार,
उसके लिए खुल जाते है, वैकुंठ के भी द्वार,
बिहारी जी के दर पे, जाता जो एक बार,
उसके लिए खुल जाते है, वैकुंठ के भी द्वार,
चाहे वो राजा हो, या हो भिखारी,
सब पे कृपा करते, बाके बिहारी,
चाहे वो राजा हो, या हो भिखारी,
सब पे कृपा करते, बांके बिहारी,
पल भर में ही सबकी, नय्या लगाते पार,
उसके लिए खुल जाते है, वैकुंठ के भी द्वार,
बिहारी जी के दर पे, जाता जो एक बार,
उसके लिए खुल जाते है, वैकुंठ के भी द्वार,
बिन मांगे वो, सब कुछ देते है,
भक्तो की खाली झोली, वो भर देते है,
बिन मांगे वो, सब कुछ देते है,
भक्तो की खाली झोली, वो भर देते है,
अपने भक्तो पर वो, लुटाते है भंडार,
उसके लिए खुल जाते है, वैकुंठ के भी द्वार,
बिहारी जी के दर पे, जाता जो एक बार,
उसके लिए खुल जाते है, वैकुंठ के भी द्वार,
Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : कृष्ण भजन
बिहारी जी के दर पे, जाता जो एक बार । उसके लिए खुल जाते हैं वैकुंठ के भी द्वार । #bankebihari #radhe
यह भजन भगवान श्री कृष्ण के “बांके बिहारी” स्वरूप की महिमा का गुणगान करता है। इसमें बताया गया है कि जो भी भक्त सच्चे मन से बिहारी जी के दरबार में जाता है, उसके जीवन के दुख दूर हो जाते हैं और उसे आध्यात्मिक मुक्ति (वैकुंठ के द्वार) प्राप्त होती है। “बिहारी जी के दर पे जाता जो एक बार” भजन विशेष रूप से बांके बिहारी मंदिर की महिमा और वहाँ के दिव्य अनुभव को दर्शाता है।
इस भजन के रचयिता Jay Prakash Verma माने जाते हैं, जैसा कि अंत में उल्लेख है। यह एक आधुनिक भक्ति रचना है, लेकिन इसकी भावना पारंपरिक ब्रज भक्ति से प्रेरित है।
भजन का मुख्य भाव “श्रद्धा, विश्वास और भगवान की कृपा” है। इसमें कहा गया है कि चाहे कोई राजा हो या भिखारी, भगवान के दरबार में सभी समान हैं—“सब पे कृपा करते बांके बिहारी”। यह समभाव (equality) और करुणा का सुंदर संदेश देता है।
“पल भर में ही सबकी नैया लगाते पार” और “बिन मांगे वो सब कुछ देते हैं” जैसी पंक्तियाँ यह दर्शाती हैं कि भगवान अपने भक्तों की हर आवश्यकता को जानते हैं और बिना मांगे भी उनकी झोली भर देते हैं। यहाँ “नैया पार लगाना” जीवन के कष्टों और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति का प्रतीक है।
कुल मिलाकर, यह भजन भगवान बांके बिहारी की असीम कृपा, दया और भक्तों के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है, और यह प्रेरणा देता है कि सच्चे मन से उनकी शरण में जाने वाला कभी खाली हाथ नहीं लौटता।
Radhe - Radhe !! Sir ji ,
ReplyDeleteApka Bahut Bahut Aabhar
Radhe - Radhe !!