एक नजर कृपा की कर दो सांवरे गिरधारी
एक नजर कृपा की कर दो, सांवरे गिरधारी,
दासी की विनती सुन लो, सांवरे गिरधारी,
कब से खडी हूँ, दर पे सवारिया,
डाल दो मुझपे, प्रेम नजरिया,
कब से खडी हूँ, दर पे सवारिया,
डाल दो मुझपे, प्रेम नजरिया,
एक बार इधर भी देखो, सांवरे गिरधारी,
दासी की विनती सुन लो, सांवरे गिरधारी,
एक नजर कृपा की कर दो, सांवरे गिरधारी,
दासी की विनती सुन लो, सांवरे गिरधारी,
जादू भरी है, तेरी नजरिया,
मैं भी देखु, तेरी लीला सवारिया,
जादू भरी है, तेरी नजरिया,
मैं भी देखु, तेरी लीला सवारिया,
मुझ पर भी जादू कर दो, सांवरे गिरधारी,
दासी की विनती सुन लो, सांवरे गिरधारी,
एक नजर कृपा की कर दो, सांवरे गिरधारी,
दासी की विनती सुन लो, सांवरे गिरधारी,
सच कहती है, दुनिया सारी,
जादूगर है, बांके बिहारी
सच कहती है, दुनिया सारी,
जादूगर है, बांके बिहारी
नजरो से करते है जादू, सांवरे गिरधारी,
मुझ पे भी कर दिया जादू, सांवरे गिरधारी,
मुझ पे नजर कृपा की कर दी, सांवरे गिरधारी,
दासी की विनती सुन ली, सांवरे गिरधारी,
Ly rics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : कृष्ण भजन
एक नजर कृपा की कर दो सांवरे गिरधारी । श्री कृष्ण भजन 2026 #bankebihari #krishna #krishnabhajan2026
यह भजन भगवान श्री कृष्ण के सांवरे गिरधारी और बांके बिहारी रूप की कृपा और प्रेममयी दृष्टि की प्रार्थना करता है। “एक नजर कृपा की कर दो” एक आधुनिक कृष्ण भजन है, जिसके बोल Jay Prakash Verma द्वारा लिखे गए बताए जाते हैं। यह भजन विशेष रूप से वृन्दावन और बांके बिहारी भक्ति की मधुर परंपरा से प्रेरित है।
इस भजन का मुख्य भाव “कृपा की याचना और प्रेम-भक्ति” है। भक्त स्वयं को भगवान की “दासी” मानकर विनम्रता से प्रार्थना करता है कि सांवरे गिरधारी उस पर एक कृपा-दृष्टि डाल दें। भक्ति परंपरा में भगवान की “एक नजर” को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि ऐसा विश्वास है कि उनकी कृपा-दृष्टि से जीवन बदल सकता है और दुख दूर हो सकते हैं।
“कब से खड़ी हूँ दर पे सांवरिया” पंक्ति भक्त की प्रतीक्षा और समर्पण को दर्शाती है। यहाँ भक्त भगवान के द्वार पर खड़ा होकर उनके प्रेम और स्वीकृति की आशा कर रहा है। “जादू भरी है तेरी नजरिया” में कृष्ण की मोहिनी शक्ति और उनकी दिव्य लीला का वर्णन है। वैष्णव भक्ति में कृष्ण की मुस्कान, मुरली और नजर को आत्मा को आकर्षित करने वाली दिव्य शक्ति माना जाता है।
“जादूगर है बांके बिहारी” पंक्ति वृन्दावन की प्रसिद्ध लोक-भक्ति भावना को दर्शाती है, जहाँ भक्त मानते हैं कि बांके बिहारी अपनी प्रेममयी नजर से भक्तों का हृदय जीत लेते हैं। अंत में जब भक्त कहता है “मुझ पे नजर कृपा की कर दी”, तो यह कृपा प्राप्त होने के आनंद और आत्मिक संतोष को प्रकट करता है।
कुल मिलाकर, यह भजन भगवान कृष्ण की कृपा-दृष्टि पाने की गहरी चाह, विनम्र प्रार्थना और प्रेममयी भक्ति का सुंदर चित्रण है, जिसमें भक्त पूरी श्रद्धा से अपने आराध्य से प्रेम और कृपा की याचना करता है।