तुम्हारी चाहत में हो के पागल
तुम्हारी चाहत में हो के पागल,
गली गली मैं भटक रही हूँ,
कहा मिलोगे तुम मुझको मोहन,
हर एक जगह पे ढूंढ रही हूँ,
पता बता दो तो मिलने आऊ,
हाल ये दिल का तुम्हे सुनाऊ,
ना बढ़ाओ मुझसे यूं दुरी मोहन,
हाथ जोड़कर ये कह रही हूँ,
तुम्हारी चाहत में हो के पागल,
गली गली मैं भटक रही हूँ,
क्या मैं करू जो तुम मान जाओ,
पास में अपने मुझे बुलाओ,
कोई तो राह बता दो मोहन,
हाथ जोड़कर में पूछ रही हूँ,
तुम्हारी चाहत में हो के पागल,
गली गली मैं भटक रही हूँ,
क्या कुछ तुमसे छुपा हैं मोहन,
तेरे भरोसे हैं मेरा जीवन,
जनम जनम से हूँ मैं तो प्यासी,
जनम जनम से हूँ तेरी दासी,
दरश को तेरे तरस रही हूँ,
तुम्हारी चाहत में हो के पागल,
गली गली मैं भटक रही हूँ,
Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : कृष्ण भजन
तुम्हारी चाहत में हो के पागल, गली गली में भटक रही हूँ । श्री कृष्ण भजन 2026 #krishna #krishnabhajan
यह भजन भगवान श्री कृष्ण (मोहन) के प्रति गहरे प्रेम, विरह और समर्पण को व्यक्त करता है। “तुम्हारी चाहत में हो के पागल” एक आधुनिक कृष्ण भजन है, जिसके बोल Jay Prakash Verma द्वारा लिखे गए बताए जाते हैं। यह भजन राधा-भाव और माधुर्य भक्ति की परंपरा से प्रेरित प्रतीत होता है, जहाँ भक्त भगवान को अपना प्रियतम मानकर उनसे मिलन की तड़प व्यक्त करता है।
इस भजन का मुख्य भाव “विरह-भक्ति” और “दर्शन की लालसा” है। भक्त कहता है कि वह कृष्ण की चाहत में पागल होकर गली-गली भटक रहा/रही है। यह भटकना केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आत्मा की उस खोज का प्रतीक है जिसमें भक्त अपने आराध्य को हर जगह ढूंढता है। “कहा मिलोगे तुम मुझको मोहन” पंक्ति भगवान के दर्शन और उनके सान्निध्य की गहरी इच्छा को दर्शाती है।
भजन में प्रेमपूर्ण विनती का भाव भी है — भक्त हाथ जोड़कर मोहन से दूरी न बढ़ाने और अपने पास बुलाने की प्रार्थना करता है। यहाँ भगवान और भक्त का संबंध बहुत व्यक्तिगत और आत्मीय दिखाई देता है। “जनम जनम से हूँ मैं तेरी दासी” पंक्ति पुनर्जन्म और अनादि प्रेम के भाव को व्यक्त करती है, जो वैष्णव भक्ति परंपरा में अक्सर देखने को मिलता है।
“दरश को तेरे तरस रही हूँ” इस भजन की सबसे गहरी भावना है। यहाँ दर्शन केवल भगवान को देखने की इच्छा नहीं, बल्कि आत्मा के परमात्मा से मिलन की तड़प का प्रतीक है।
कुल मिलाकर, यह भजन प्रेममयी कृष्ण भक्ति का सुंदर उदाहरण है, जिसमें भक्त अपने आराध्य के बिना अधूरा महसूस करता है और उनसे मिलन के लिए पूरी तरह समर्पित होकर पुकार करता है।