श्याम मेरे घर आयो कोई देखे ना, shyam mere ghar aayo koi dekhe na

श्याम मेरे घर आयो कोई देखे ना



श्याम मेरे घर आयो कोई देखे ना
चोरी-चोरी आयो, कोई देखे ना
चुपके-चुपके आयो, कोई देखे ना॥

सास-ससुरा मेरे बड़े चालक,
बड़े चालक जी बड़े चालक,
ओ कुंडा ना खड़कायो, कोई देखे ना॥

जेठ-जिठानी मेरे बड़े चालक,
बड़े चालक जी बड़े चालक,
ओ पायल ना छनकायो, कोई देखे ना॥

देवर-देवरानी मेरे बड़े चालक,
बड़े चालक कई बड़े चालक,
ओ कंगना ना खनकायो, कोई देखे ना॥

आंडी-गवांडी मेरे बड़े चालक,
बड़े चालक हाय बड़े चालक,
ओ मुरली ना बजायो, कोई देखे ना॥

पति मेरा बड़ा चालक,
बड़ा चालक कई बड़ा चालक,
ओ घूंघटा ना उठायो, कोई देखे ना॥



श्रेणी : कृष्ण भजन



#bhajan शाम मेरे घर आयो कोई देखे ना हो चोरी चोरी आयो कोई देखे ना #kirtan #kirtan🙏

यह भजन भगवान श्री कृष्ण (श्याम) के प्रति प्रेम और गुप्त मिलन की भावनाओं को दर्शाने वाला एक लोक-रस से भरा कृष्ण भजन है। “श्याम मेरे घर आयो कोई देखे ना” ब्रज और राजस्थानी लोकभक्ति शैली का प्रसिद्ध भजन माना जाता है, जिसके रचयिता के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह भजन विशेष रूप से महिला कीर्तन मंडलियों और राधा-कृष्ण भक्ति परंपरा में बड़े प्रेम से गाया जाता है।

इस भजन का मुख्य भाव “माधुर्य भक्ति” और “गोपनीय प्रेम” है। इसमें भक्त स्वयं को एक गोपी या प्रेमिका के भाव में रखकर कृष्ण से कहती है कि वे उसके घर चुपके-चुपके आएँ ताकि कोई देख न सके। यहाँ यह भाव सांसारिक प्रेम नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मधुर मिलन का प्रतीक माना जाता है। वैष्णव भक्ति में राधा और गोपियों का कृष्ण के प्रति प्रेम आत्मा की ईश्वर के लिए तड़प और समर्पण का प्रतीक होता है।

भजन में “सास-ससुरा”, “जेठ-जिठानी”, “आंडी-गवांडी” जैसे पारिवारिक और सामाजिक पात्रों का उल्लेख हास्य और लोकजीवन की झलक देता है। भक्त बार-बार कृष्ण से कहती है कि वे धीरे से आएँ—कुंडा न खड़काएँ, पायल न छनकाएँ, मुरली न बजाएँ—ताकि किसी को उनके आने का पता न चले। यह शैली ब्रज लोकगीतों की चंचलता और प्रेमपूर्ण नटखट भाव को दर्शाती है।

“मुरली ना बजायो” पंक्ति विशेष रूप से रोचक है, क्योंकि कृष्ण की मुरली को उनकी पहचान माना जाता है। यहाँ भक्त चाहती है कि कान्हा इतने चुपचाप आएँ कि दुनिया को उनके और भक्त के प्रेम का पता न चले।

कुल मिलाकर, यह भजन कृष्ण और भक्त के मधुर, अंतरंग और प्रेममय संबंध का प्रतीक है, जिसमें भक्ति को लोकगीतों की सरलता, हास्य और चंचलता के माध्यम से व्यक्त किया गया है।

Harshit Jain

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