कलयुग में आ रे कान्हा कलयुग में आ
कलयुग में आ रे कान्हा, कलयुग में आ,
कलयुग में आ के जरा, भक्ति बड़ा,
हर कोई यहा बस, माया में लगा है,
माया का पर्दा, यहा सबपे पड़ा है,
तू आ के माया का, पर्दा हटा,
कलयुग में आ रे कान्हा, कलयुग में आ,
कलयुग में आ के जरा, भक्ति बड़ा,
हर कोई चाहे बस, बंगला और गाड़ी,
भक्ति नहीं यहा, किसी को भी प्यारी,
तू आ के दिलो में, भक्ति जगा,
कलयुग में आ रे कान्हा, कलयुग में आ,
कलयुग में आ के जरा, भक्ति बड़ा,
झूठे है रिश्ते यहा, झूठे है नाते,
कड़वे है बोल और कड़वी है बाते,
तू आ के रिश्तो में, प्रेम बड़ा,
कलयुग में आ रे कान्हा, कलयुग में आ,
कलयुग में आ के जरा, भक्ति बड़ा,
Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : कृष्ण भजन
कलयुग में आ रे कान्हा, कलयुग में आ ।। #bankebihari #krishna #radhekrishna #newbhajan2026 #radheradhe
यह भजन भगवान श्री कृष्ण को कलयुग में पुनः आने की भावपूर्ण पुकार है। “कलयुग में आ रे कान्हा” एक आधुनिक कृष्ण भजन है, जिसके बोल Jay Prakash Verma द्वारा लिखे गए बताए जाते हैं। यह भजन वर्तमान समाज की स्थिति को देखते हुए भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक जागृति की आवश्यकता को व्यक्त करता है।
इस भजन का मुख्य भाव “कलयुग की विकृतियों पर चिंता और भगवान से मार्गदर्शन की प्रार्थना” है। इसमें बताया गया है कि आज का मनुष्य माया, धन-दौलत और भौतिक सुखों में इतना उलझ गया है कि भक्ति और आध्यात्मिकता पीछे छूट गई है। “माया का पर्दा” उस भ्रम और मोह का प्रतीक है, जिसने लोगों को ईश्वर से दूर कर दिया है। इसलिए भक्त कान्हा से प्रार्थना करता है कि वे आकर इस माया का पर्दा हटाएँ और लोगों के हृदय में भक्ति जगाएँ।
भजन में आधुनिक जीवन की समस्याओं का भी उल्लेख है—“हर कोई चाहे बस बंगला और गाड़ी” पंक्ति भौतिकवादी सोच को दर्शाती है, जबकि “झूठे हैं रिश्ते यहाँ” वर्तमान समाज में बढ़ती स्वार्थपरता और रिश्तों में कमी आए प्रेम को प्रकट करती है। भक्त चाहता है कि कान्हा आकर लोगों के दिलों में फिर से प्रेम, करुणा और सच्चाई भर दें।
यह भजन केवल भगवान को बुलाने की प्रार्थना नहीं, बल्कि समाज को आत्मचिंतन का संदेश भी देता है। इसमें भक्त यह महसूस करता है कि अगर भगवान की भक्ति और प्रेम जीवन में लौट आएँ, तो कलयुग की कई समस्याएँ दूर हो सकती हैं।
कुल मिलाकर, यह भजन आधुनिक युग में आध्यात्मिक मूल्यों के पतन पर चिंता व्यक्त करते हुए भगवान कृष्ण से प्रेम, भक्ति और मानवता को पुनर्जीवित करने की विनती करता है।