लाल चोले में मैया खड़ी दर्शन कर लो
लाल चोले में मैया खड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
लाल चोले में मैया खड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
लाल चोले में मैया खड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
लाल चोले में मैया खड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी
ऐसी आँखों का क्या होना जग में
जो दर्शन करे न मैया का.
ऐसी आँखों का क्या होना जग में
जो दरस करे ना मैया का
इनको फोनो की आदत पड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
इनको फोनो की आदत पड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
लाल चोले में मैया खड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
लाल चोले में मैया खड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी
ऐसे कानों का क्या होना जग में
जो भजन सुने ना मैया का.
ऐसे कानों का क्या होना जग में
जो भजन सुने ना मैया का.
चुगली सुनने की आदत पड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
चुगली सुनने की आदत पड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
लाल चोले में मैया खड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
लाल चोले में मैया खड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
ऐसी जिभा का क्या होना जग में
जो भजन करे न मैया का.
ऐसी जिभा का क्या होना जग में
जो भजन करे न मैया का.
चाऊमीन डोसे की आदत पड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
चाऊमीन डोसे की आदत पड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
लाल चोले में मैया खड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
लाल चोले में मैया खड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी
ऐसे हाथों का क्या होना जग में
जो दान करे न निर्धन को.
ऐसे हाथों का क्या होना जग में
जो दान करे न निर्धन को.
हेरा फेरी की आदत पड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
हेरा फेरी की आदत पड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
लाल चोले में मैया खड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
लाल चोले में मैया खड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी
ऐसे पेरोन का क्या होना जग में
जो तीरथ करे न मैया का.
ऐसे पेरोन का क्या होना जग में
जो तीरथ करे न मैया का.
इन्हें शॉपिंग की आदत पड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
इन्हें शॉपिंग की आदत पड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
लाल चोले में मैया खड़ी
दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी.
लाल चोले में मैया खड़ी
श्रेणी : दुर्गा भजन
चैत्र नवरात्री New Bhajan || लाल चोले में मैया खड़ी दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी || satsangi bhajan ||
यह भजन माँ दुर्गा की भक्ति, आत्मचिंतन और आधुनिक जीवन की भटकनों पर आधारित एक प्रेरणादायक दुर्गा भजन है। “लाल चोले में मैया खड़ी, दर्शन कर लो घड़ी दो घड़ी” में भक्त लोगों को याद दिलाता है कि संसार की भागदौड़, मोबाइल, मनोरंजन और भौतिक इच्छाओं में उलझकर मनुष्य ईश्वर-भक्ति से दूर होता जा रहा है। भजन का भाव यह है कि थोड़ी देर के लिए ही सही, लेकिन माँ के चरणों में समय देकर आत्मिक शांति प्राप्त करनी चाहिए।
इस भजन का मुख्य भाव “भक्ति के प्रति जागरूकता और आत्म-सुधार” है। “लाल चोला” माँ दुर्गा की शक्ति, करुणा और दिव्य स्वरूप का प्रतीक है। भक्त कहता है कि माँ सामने खड़ी हैं, इसलिए उनके दर्शन और स्मरण का अवसर व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए।
भजन की विशेषता यह है कि इसमें आधुनिक जीवन की आदतों को बड़े सरल और लोकभाषा के अंदाज में समझाया गया है। “इनको फोनो की आदत पड़ी”, “चुगली सुनने की आदत पड़ी”, “चाऊमीन डोसे की आदत पड़ी” और “शॉपिंग की आदत पड़ी” जैसी पंक्तियाँ यह दर्शाती हैं कि मनुष्य की इंद्रियाँ भक्ति से हटकर सांसारिक आकर्षणों में उलझ गई हैं। यह शैली हास्य के साथ गहरा आध्यात्मिक संदेश देती है।
भजन में आँख, कान, जिह्वा, हाथ और पैर—इन सभी अंगों का उल्लेख करके यह समझाया गया है कि मानव शरीर ईश्वर की भक्ति, सेवा, दान और सत्कर्मों के लिए मिला है। यदि इनका उपयोग केवल सांसारिक सुखों और बुरी आदतों में हो, तो जीवन का असली उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
विशेष रूप से चैत्र नवरात्रि जैसे अवसरों पर यह भजन भक्तों को माँ की आराधना, भजन, दान और तीर्थ की ओर प्रेरित करता है।
कुल मिलाकर, यह भजन सरल भाषा में यह संदेश देता है कि आधुनिक व्यस्त जीवन में भी मनुष्य को कुछ समय ईश्वर भक्ति, अच्छे कर्म और आत्मिक शांति के लिए अवश्य निकालना चाहिए, क्योंकि वही जीवन को सच्चा सुख और संतुलन देता है।