मंदिर के ऊपर हवा डोले | Mandir Ke Upar Hawa Dole

मंदिर के ऊपर हवा डोले हमारी राधा



मंदिर के ऊपर हवा डोले हमारी राधा हमसे ना बोले
मंदिर के ऊपर हवा डोले हमारी राधा हमसे ना बोले
हमसे ना बोले राधा हमसे ना बोले
हमसे ना बोले राधा हमसे ना बोले
मंदिर के ऊपर हवा डोले हमारी राधा हमसे ना बोले
मंदिर के ऊपर हवा डोले हमारी मैया हमसे ना बोले

रिद्धि से बोले राधा सिद्धि से बोल
रिद्धि से बोले राधा सिद्धि से बोले
गणपत से हंस हंस बोले हमारी राधा हमसे ना बोले
गणपत से हंस हंस बोले हमारी राधा हमसे ना बोले
मंदिर के ऊपर हवा डोले हमारी राधा हमसे ना बोले
मंदिर के ऊपर हवा डोले हमारी मैया हमसे ना बोले

ब्रह्मा से बोले राधा विष्णु से बोले
ब्रह्मा से बोले राधा विष्णु से बोले
नारद से हस हस बोले हमारी राधा हमसे ना बोले
नारद से हंस हंस बोले हमारी राधा हमसे ना बोले
मंदिर के ऊपर हवा डोले हमारी मैया हमसे ना बोले

राम से बोले राधा लक्ष्मण से बोले
राम से बोले राधा लक्ष्मण से बोले
हनुमत से हस हस बोले हमारी मैया हमसे ना बोले
हनुमत से हस हस बोले हमारी मैया हमसे ना बोले
मंदिर के ऊपर हवा डोले हमारी मैया हमसे ना बोले

भोले से बोले राधा नंदी से बोले
भोले से बोले राधा नंदी से बोले
संतों से हस हस बोले हमारी राधा हमसे ना बोले
संतों से हस हस बोले हमारी राधा हमसे ना बोले
मंदिर के ऊपर हवा डोले हमारी मैया हमसे ना बोले

कान्हा से बोले राधा दाऊ से बोले
कान्हा से बोले राधा दाऊ से बोले
ग्वालो से हस हस बोले हमारी राधा हमसे ना बोले
ग्वालो से हस हस बोले हमारी राधा हमसे ना बोले
मंदिर के ऊपर हवा डोले हमारी मैया हमसे



श्रेणी : कृष्ण भजन



मंदिर के ऊपर हवा डोले हमारी राधा हमसे ना बोलें | Mandir Ke Upar Hawa Dole | Radha Rani Bhajan

यह भजन राधा और श्री कृष्ण की प्रेम-भक्ति पर आधारित एक लोक शैली का कृष्ण भजन है, जिसमें भक्त राधा रानी से संवाद करने की भावपूर्ण इच्छा व्यक्त करता है। “मंदिर के ऊपर हवा डोले हमारी राधा हमसे ना बोले” एक पारंपरिक भजन माना जाता है, जिसके रचयिता की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह भजन उत्तर भारत, विशेषकर ब्रज क्षेत्र और लोक-भक्ति परंपरा में काफी लोकप्रिय है।

इस भजन का मुख्य भाव “मान-लीला” और “प्रेममयी शिकायत” है। भक्त बार-बार कहता है कि राधा सब देवताओं और भक्तों से हँसकर बात करती हैं, लेकिन उससे नहीं बोलतीं। यह शिकायत वास्तव में प्रेम की गहराई को दर्शाती है, जहाँ भक्त भगवान/राधा के स्नेह और कृपा की चाह में व्याकुल है। “हमसे ना बोले” की पुनरावृत्ति विरह, तड़प और प्रेमपूर्ण नाराज़गी का भाव उत्पन्न करती है।

भजन में कई देवी-देवताओं और पात्रों का उल्लेख आता है—जैसे गणेश, ब्रह्मा, विष्णु, नारद, राम, हनुमान, शिव, और कान्हा के ग्वाल-बाल। इसका उद्देश्य यह दिखाना है कि राधा सब पर कृपा करती हैं, लेकिन भक्त को ऐसा लगता है कि वह उसकी ओर ध्यान नहीं दे रहीं। यही भाव भक्त को और अधिक पुकारने और प्रेम करने के लिए प्रेरित करता है।

भजन में “मंदिर के ऊपर हवा डोले” जैसी पंक्ति वातावरण को भक्तिमय और लोक-संगीतमय बनाती है। यह केवल एक साधारण गीत नहीं, बल्कि राधा रानी के प्रति प्रेम, तड़प और उनके दर्शन पाने की गहरी चाह का प्रतीक है।

Harshit Jain

आपका स्वागत है "Yt Krishna Bhakti" में, जहां आपको भगवान से जुड़ी जानकारी, मधुर भजन, इतिहास और मंत्रों का अद्भुत संग्रह मिलेगा। मेरा नाम "Harshit Jain" है, और इस ब्लॉग का उद्देश्य आपको भगवान के भजन, उनके इतिहास, और उनके मंत्रों के बोल उपलब्ध कराना है। यहां आप अपने पसंदीदा भजनों और गायक के अनुसार भजन खोज सकते हैं, और हर प्रकार की धार्मिक सामग्री प्राप्त कर सकते हैं। आओ, इस भक्ति यात्रा में हमारे साथ जुड़े और भगवान के नाम का जाप करें।

Post a Comment

आपको भजन कैसा लगा हमे कॉमेंट करे। और आप अपने भजनों को हम तक भी भेज सकते है। 🚩 जय श्री राम 🚩

Previous Post Next Post