मैंने गुरु बनाया नंदलाला, मेरा मोहन मुरली वाला | Maine Guru Banaya Nandlala

मैंने गुरु बनाया नंदलाला मेरा मोहन मुरली वाला



मैने गुरु बनाया नंदलाला,
मेरा मोहन मुरली वाला,
मैने गुरु बनाया नंदलाला,
मेरा मोहन मुरली वाला,
मेरा मोहन मुरली वाला,
मेरा मोहन मुरली वाला,
मैने गुरु बनाया नंदलाला,
मेरा मोहन मुरली वाला,

कोई भजन करे तो करवा दो,
कोई सत्संग करे तो करवा दो,
कोई भजन करे तो करवा दो,
कोई सत्संग करे तो करवा दो,
तुम उसमें लगाना जयकारा,
मेरा मोहन मुरली वाला,
तुम उसमें लगाना जयकारा,
मेरा मोहन मुरली वाला,
मैने गुरु बनाया नंदलाला,
मेरा मोहन मुरली वाला,
मैने गुरु बनाया नंदलाला,
मेरा मोहन मुरली वाला,

कोई तीरथ करे तो करवा दो,
कोई मंदिर जाए तो पहुंचा दो,
कोई तीरथ करे तो करवा दो,
कोई मंदिर जाए तो पहुंचा दो,
तुम उसका बनना सहारा,
मेरा मोहन मुरली वाला,
तुम उसका बनना सहारा,
मेरा मोहन मुरली वाला,
मैने गुरु बनाया नंदलाला,
मेरा मोहन मुरली वाला,
मैने गुरु बनाया नंदलाला,
मेरा मोहन मुरली वाला,

कोई चोरी करे तो करने दो,
कोई निंदा करे तो करने दो,
कोई चोरी करे तो करने दो,
कोई निंदा करे तो करने दो,
उसमें तुम ना लगाना हुंकारा,
मेरा मोहन मुरली वाला,
उसमें तुम ना लगाना हुंकारा,
मेरा मोहन मुरली वाला,
मैने गुरु बनाया नंदलाला,
मेरा मोहन मुरली वाला,
मैने गुरु बनाया नंदलाला,
मेरा मोहन मुरली वाला,

कोई कीर्तन करे तो करवा दो,
कोई भजन करे तो करवा दो,
कोई कीर्तन करे तो करवा दो,
कोई भजन करे तो करवा दो,
उसमें नाच के हाजरी लगाना,
मेरा मोहन मुरली वाला,
उसमें नाच के हाजरी लगाना,
मेरा मोहन मुरली वाला,
मैने गुरु बनाया नंदलाला,
मेरा मोहन मुरली वाला,
मैने गुरु बनाया नंदलाला,
मेरा मोहन मुरली वाला,



श्रेणी : कृष्ण भजन



कृष्ण भजन - मैंने गुरु बनाया नंदलाला, मेरा मोहन मुरली वाला | Maine Guru Banaya Nandlala

यह भजन भगवान श्री कृष्ण को अपना गुरु, मार्गदर्शक और जीवन का सहारा मानने की भावना को व्यक्त करता है। “मैंने गुरु बनाया नंदलाला, मेरा मोहन मुरली वाला” एक सरल लेकिन गहरे भाव वाला कृष्ण भजन है, जिसमें भक्त भगवान कृष्ण को केवल आराध्य देव नहीं बल्कि अपना सद्गुरु मानता है। इस भजन के रचयिता के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे लोक-भक्ति शैली की रचना माना जाता है।

इस भजन का मुख्य भाव “गुरु-भक्ति, सत्संग और भक्ति मार्ग” है। यहाँ “नंदलाला” और “मोहन मुरली वाला” कृष्ण के प्रेममय और मधुर स्वरूप को दर्शाते हैं। भक्त कहता है कि उसने कृष्ण को अपना गुरु बना लिया है, यानी अब उसका जीवन उन्हीं के मार्गदर्शन में चलेगा।

भजन में बार-बार “भजन”, “सत्संग”, “कीर्तन” और “तीर्थ” का उल्लेख यह बताता है कि भगवान का स्मरण और अच्छे कर्मों में भाग लेना ही जीवन का सही मार्ग है। “तुम उसमें लगाना जयकारा” और “नाच के हाजरी लगाना” जैसी पंक्तियाँ यह भाव व्यक्त करती हैं कि जहाँ सच्ची भक्ति होती है, वहाँ स्वयं भगवान उपस्थित होकर आनंद देते हैं।

“कोई चोरी करे… कोई निंदा करे…” वाला हिस्सा सहनशीलता और विवेक का संदेश देता है। इसका भाव यह है कि व्यक्ति को दूसरों की बुराइयों में शामिल नहीं होना चाहिए, बल्कि अपना मन भक्ति और अच्छे कार्यों में लगाना चाहिए।

कुल मिलाकर, यह भजन भक्त को सिखाता है कि यदि जीवन में भगवान कृष्ण को गुरु मान लिया जाए, तो भजन, सत्संग, सेवा और प्रेम के मार्ग पर चलकर जीवन सफल और आनंदमय बन सकता है।

Harshit Jain

आपका स्वागत है "Yt Krishna Bhakti" में, जहां आपको भगवान से जुड़ी जानकारी, मधुर भजन, इतिहास और मंत्रों का अद्भुत संग्रह मिलेगा। मेरा नाम "Harshit Jain" है, और इस ब्लॉग का उद्देश्य आपको भगवान के भजन, उनके इतिहास, और उनके मंत्रों के बोल उपलब्ध कराना है। यहां आप अपने पसंदीदा भजनों और गायक के अनुसार भजन खोज सकते हैं, और हर प्रकार की धार्मिक सामग्री प्राप्त कर सकते हैं। आओ, इस भक्ति यात्रा में हमारे साथ जुड़े और भगवान के नाम का जाप करें।

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