मेरे गिरधर तू ही सहारा है
मेरे गिरधर तू ही सहारा है
मेरे गिरधर तू ही सहारा है
मेरी नैया का तू किनारा है
मेरी नैया का तू किनारा है
मेरे गिरधर तू ही सहारा है
मेरे गिरधर तू ही सहारा है
मेरी नैया का तू किनारा है
मेरी नैया का तू किनारा है
मेरे ख्वाबो में तू मेरी सांसो में तू
मेरे ख्वाबो में तू मेरी सांसो में तू
मेरे दिल की धड़कन में तू ही तू
मेरे दिल की धड़कन में तू ही तू
दीवाने तेरे प्यार में बड़ा ही बुरा हाल है
खड़ा हूँ तेरे दर पे ना होश ना ख्याल है
मेरी नैया का तू किनारा है
मेरे गिरधर तू ही सहारा है
मेरे गिरधर तू ही सहारा है
मेरी नैया का तू किनारा है
मेरी नैया का तू किनारा है
अंधेरो में जैसे उजाले हैं तू
कितनो को गिरते सँभाले ही तू
तेरे बिना सांवरे ये मेरे दुनियाँ वीरान है
तेरी कृपा से मेरा दुनियाँ मैं पहचान है
तेरी कृपा से मेरा दुनियाँ मैं पहचान है
मेरे गिरधर तू ही सहारा है
मेरे गिरधर तू ही सहारा है
मेरी नैया का तू किनारा है
मेरी नैया का तू किनारा है
श्रेणी : कृष्ण भजन
दुनिया का सबसे मीठा भजन | मेरे गिरधर तू ही सहारा है | Mere Girdhar Tu Hi Sahara Hai | Krishan Bhajan
यह भजन भगवान श्री कृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण, प्रेम और विश्वास की भावना को व्यक्त करता है। “मेरे गिरधर तू ही सहारा है” एक भावपूर्ण कृष्ण भजन है, जिसमें भक्त भगवान को अपने जीवन का एकमात्र सहारा और मार्गदर्शक मानता है। “गिरधर” नाम भगवान कृष्ण के उस स्वरूप को दर्शाता है जिसने गोवर्धन पर्वत उठाकर भक्तों की रक्षा की थी, इसलिए यह नाम सुरक्षा, करुणा और आश्रय का प्रतीक माना जाता है।
इस भजन का मुख्य भाव “आश्रय और प्रेम-भक्ति” है। भक्त कहता है कि उसकी जीवन-नैया का किनारा केवल भगवान हैं—अर्थात जीवन के दुख, संघर्ष और अनिश्चितताओं से पार लगाने वाले केवल वही हैं। “मेरे ख्वाबों में तू, मेरी सांसों में तू” पंक्तियाँ यह दर्शाती हैं कि भक्त का मन, हृदय और चेतना पूरी तरह कृष्ण में डूब चुकी है।
“दीवाने तेरे प्यार में बड़ा ही बुरा हाल है” में भक्त की प्रेममयी अवस्था दिखाई देती है, जहाँ वह संसार की सुध-बुध खोकर केवल भगवान के प्रेम में मग्न हो जाता है। यह भाव मीरा बाई जैसी संत परंपराओं की याद दिलाता है, जहाँ कृष्ण प्रेम ही जीवन का सबसे बड़ा सत्य बन जाता है।
भजन में “अंधेरों में जैसे उजाले हैं तू” पंक्ति भगवान को जीवन के प्रकाश और मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत करती है। जब भक्त कहता है “तेरे बिना सांवरे ये मेरी दुनिया वीरान है”, तो यह पूर्ण निर्भरता और आत्मिक जुड़ाव का प्रतीक बन जाता है।
कुल मिलाकर, यह भजन भक्त और भगवान के बीच उस गहरे रिश्ते को दर्शाता है, जहाँ कृष्ण केवल पूजनीय देवता नहीं, बल्कि जीवन के साथी, रक्षक और हर सांस में बसने वाले प्रियतम बन जाते हैं।