मैं तो तेरे ही भरोसे मेरे श्याम वृन्दावन नगरी आया हूँ
मैं तो तेरे ही भरोसे मेरे श्याम, वृन्दावन नगरी आया हूँ,
मुझे रख ले शरण में श्याम, मैं तेरी नगरी आया हूँ,
सुना है मैंने तेरे दर पे, सबकी बिगड़ी हैं बनती,
तेरे एक इशारे पे ये, सारी दुनिया हैं चलती,
सुना है मैंने तेरे दर पे, सबकी बिगड़ी हैं बनती,
तेरे एक इशारे पे ये, सारी दुनिया हैं चलती,
मेरी भी बिगड़ी बना दे श्याम, मैं तेरी नगरी आया हूँ,
मैं तो तेरे ही भरोसे मेरे श्याम, वृन्दावन नगरी आया हूँ,
मुझे रख ले शरण में श्याम, मैं तेरी नगरी आया हूँ,
कब से खड़ा हूँ द्वार पे तेरे, दर्शन की लेकर आस,
मुझको भी तुम दोगे दर्शन, मुझको है विश्वास,
कब से खड़ा हूँ द्वार पे तेरे, दर्शन की लेकर आस,
मुझको भी तुम दोगे दर्शन, मुझको है विश्वास,
मुझे दे दो दरश मेरे श्याम, मैं तेरी नगरी आया हूँ,
मैं तो तेरे ही भरोसे मेरे श्याम, वृन्दावन नगरी आया हूँ,
मुझे रख ले शरण में श्याम, मैं तेरी नगरी आया हूँ,
मिल गया मुझको दर्शन तेरा, मिल गई दुनिया सारी,
तेरी इस नगरी से अब ना जाऊं, मैं बाके बिहारी,
मिल गया मुझको दर्शन तेरा, मिल गई दुनिया सारी,
तेरी इस नगरी से अब ना जाऊं, मैं बाके बिहारी,
मुझे रख ले बना के दास, मैं तेरी नगरी आया हूँ,
मैं तो तेरे ही भरोसे मेरे श्याम, वृन्दावन नगरी आया हूँ,
मुझे रख ले शरण में श्याम, मैं तेरी नगरी आया हूँ,
Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : कृष्ण भजन
मैं तो तेरे ही भरोसे मेरे श्याम , वृन्दावन नगरी आया हूँ ।#krishnabhajan2026 #bankebihari #vrindavan
यह “मैं तो तेरे ही भरोसे मेरे श्याम, वृन्दावन नगरी आया हूँ” एक भावपूर्ण श्री बाँके बिहारी जी और श्री श्याम की भक्ति से जुड़ा कृष्ण भजन है। इस भजन में भक्त अपने आराध्य श्याम पर पूरा विश्वास रखते हुए वृन्दावन नगरी आता है और उनसे अपनी शरण में रखने की प्रार्थना करता है। भक्त का भाव है कि संसार में चाहे कितनी भी परेशानियां हों, उसे अपने श्याम के चरणों के अलावा किसी और का सहारा नहीं चाहिए।
इस भजन का मुख्य भाव शरणागति, विश्वास, दर्शन की लालसा और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का है। भक्त को विश्वास है कि श्याम के दरबार में आने से बिगड़े हुए काम बनते हैं और भगवान की कृपा से जीवन की कठिनाइयां दूर हो सकती हैं। इसी विश्वास के साथ वह अपने श्याम से अपनी “बिगड़ी बनाने” की विनती करता है और स्वयं को उनके चरणों में समर्पित कर देता है।
भजन में भक्त की दर्शन पाने की तड़प बहुत सुंदर तरीके से दिखाई देती है। वह लंबे समय से श्याम के द्वार पर खड़ा होकर उनके दर्शन की आस लगाए हुए है और उसे पूरा विश्वास है कि बाँके बिहारी उसे दर्शन अवश्य देंगे। यहां दर्शन केवल भगवान को देखने की इच्छा नहीं, बल्कि भक्त के लिए जीवन की सबसे बड़ी प्राप्ति और आत्मिक शांति का माध्यम बन जाता है।
जब भक्त को अपने श्याम के दर्शन मिल जाते हैं, तो उसके लिए मानो पूरी दुनिया की सारी खुशियां मिल जाती हैं। वह कहता है कि अब वह बाँके बिहारी की नगरी छोड़कर कहीं नहीं जाना चाहता और उनके चरणों में दास बनकर रहना चाहता है। यह भावना वृन्दावन प्रेम और ठाकुर जी के चरणों में स्थायी शरण को दर्शाती है। भजन का संदेश है कि सच्चे भक्त के लिए भगवान का दर्शन और उनकी शरण ही सबसे बड़ा धन है।
इस भजन के लेखक Jay Prakash Verma, Indore हैं। भजन में वृन्दावन, श्याम और बाँके बिहारी जी के प्रति भक्त की श्रद्धा, विश्वास, दर्शन की इच्छा और दास भाव को बहुत सरल एवं भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त किया गया है। यह भजन विशेष रूप से वृन्दावन धाम, बाँके बिहारी जी और श्री कृष्ण की भक्ति में डूबे भक्तों के लिए एक सुंदर भक्तिमय रचना है।
Harshit Ji,
ReplyDeleteRadhe ! Radhe !
Bhajano Ka Ye Safar Ab Dhire Dhire Hone Laga Hai Amar Kyo Ki Banke Bihari ji ke Bahut Sare Bhakt In Bhajano Ko Gaa Rahe Hai Aur Apni Aawaj Me Bana Rahe Hai ,
Kuch Bhajan Bahut Hi Jyada Famous Ho Chuke Hai ,
1. Bula Ke Hamko Banke Bihari , Chhup Gaye Kyo Murari , Ye Parda Kyo Kiya Hai , ( 100 Se Jyada Channel Par Available Hai )
2. Chalo Re Chale Sab Vrindavan , Vrindavan Mein Karege Bhajan ,
3. Mathura Ke Kanhaiya , Gokul Ke Nand Kishore , Mujhe Rakh Le Apni Sharan Mein, Mein Aaya Teri Aur,
4. Vrindavan Se Aaya Bulawa Mere Shyam Ka ,
5. Parda Na Kar Pujari , Dikhane De Banke Bihari ,
Aur Bhi Bahut Sare Bhajan Ab Famous Ho Chuke Hai,
Apke Sahyog Ke Liye , Bahut Bahut Dhanyawad,
Radhe Radhe !!